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दुनियाभर में मनाया जा रहा श्री गुरु नानक देव का 554वां प्रकाश पर्व

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सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी का जन्म कार्तिक पूर्णिमा के दिन 1469 में तलवंडी गांव, पाकिस्तान में हुआ था। आज गुरु जी की 554वीं वर्षगांठ है, जिसे दुनिया भर के सिखों द्वारा प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जा रहा है। गुरु नानक देव जी का जीवन और शिक्षाएं ज्ञान और एकता का प्रतीक थीं, जो ईश्वर की एकता, सभी मानवता की समानता, सच्चा और दयालु जीवन जीने के महत्व पर जोर देती थी। गुरु जी ने प्रेम और शांति का संदेश फैलाते हुए पूरे भारत, मध्य एशिया और मध्य पूर्व में बड़े पैमाने पर यात्रा की।

गुरु नानक देव जी की शिक्षाएं

गुरु नानक देव जी की शिक्षाएं सिखों की पवित्र पुस्तक गुरु ग्रंथ साहिब में निहित हैं। उनका संदेश सभी धर्मों और पृष्ठभूमि के लोगों के लिए है। उनकी कुछ प्रमुख शिक्षाएँ निम्नलिखित अनुसार हैं।

इक ओंकार: ईश्वर की एकता।
नाम सिमरन: भगवान के नाम का निरंतर स्मरण।
सेवा: दूसरों की निःस्वार्थ सेवा।
वंड छक्को: अपनी कमाई को दूसरों के साथ साझा करना।

प्रकाश पर्व समारोह

प्रकाश पर्व दुनिया भर के सिखों के लिए एक खुशी का अवसर है। गुरुद्वारों, सिख मंदिरों को रोशनी और फूलों से सजाया जाता है और विशेष प्रार्थनाएँ की जाती हैं। धार्मिक समारोहों के अलावा, प्रकाश पर्व को कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों द्वारा भी चिह्नित किया जाता है, जैसे नगर कीर्तन, कीर्तन कार्यक्रम और लंगर। गुरु नानक देव जी की विरासत दुनिया भर के लाखों सिखों के जीवन में जीवित है। उनकी शिक्षाएं लोगों को धार्मिकता, करुणा और सेवा का जीवन जीने के लिए प्रेरित और मार्गदर्शन करती रहती हैं।
आइए हम इस प्रकाश पर्व पर गुरु नानक देव जी के प्रेम, एकता और सेवा के संदेश को याद करें। आशा है कि उनकी शिक्षाएं हमें एक अधिक न्यायपूर्ण और शांतिपूर्ण विश्व की ओर मार्गदर्शन करती रहेंगी।

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