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टिकुरिया में उल्टी-दस्त का कहर, 4 दिन में 4 मौत, विभाग ने बताया स्वाभाविक

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सतना। रामपुर बाघेलान के टिकुरिया गांव में गंदगी, दूषित जल एवं बारिश जनित बीमारी कहर बनकर टूटी है। टिकुरिया गांव में उल्टी-दस्त के बढ़ते प्रकोप से 4 दिनों में 4 लोगों की मौत हो गई है। इन मौतों के बाद जिले का स्वास्थ्य अमला हरकत में आया है। गांव में हेल्थ चेकअप शुरू कर दिया गया है। एहतियात तौर पर हैंड पंंप का पानी इस्तेमाल करने पर पाबंदी लगा दी गई है।

टिकुरिया में डायरिया की बढ़ती आशंका

रामपुर बाघेलान जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम टिकुरिया में डायरिया की बढ़ती आशंका के बीच 6 से 10 सितंबर के बीच बच्चों समेत 4 लोगों की मौत हो चुकी हैं। मृतकों में राज कोल पिता रामकरण उम्र 10 वर्ष, राजा कोल पिता शम्मी कोल उम्र 45 वर्ष, केमला कोल उम्र 90 वर्ष और दुअसिया कोल उम्र 8 वर्ष शामिल हैं।

स्वास्थ्य विभाग की टीम कर रही मेडिकल चेकअप

राजा कोल को 6 सितंबर को उल्टी दस्त के कारण जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां से अगले दिन उसे छुट्टी दे दी गई। वह गांव पहुंचा और उसी दिन उसकी मौत हो गई। राज कोल ने अस्पताल पहुंचने के पहले ही दम तोड़ दिया जबकि दुअसिया और केमला की भी मौत गांव में ही हो गई। हालांकि स्वास्थ्य विभाग भी तक इन मौतों को स्वाभाविक बता रहा है। टिकुरिया गांव में हो रही मौतों की सूचना के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम टिकुरिया पहुंची और लोगों का मेडिकल चेकअप शुरू कर दिया गया।

मौके पर पहुंचे अधिकारी

सीएमएचओ डॉ एलके तिवारी, बीएमओ डॉ आरके सतनामी, एपिडेमियोलॉजिस्ट प्रदीप गौतम मेडिकल स्टाफ के साथ टिकुरिया पहुंचे। टीम ने यहां सर्वे शुरू कर 6 लोगों को जिला अस्पताल रेफर किया है। जिला अस्पताल लाए गए लोगों में सतीश कोल, चंदू कोल, अमित कोल, दुर्गा कोल, रागिनी कोल एवं नीरज कोल शामिल हैं।

आशा-एएनएम को जानकारी नहीं

टिकुरिया गांव में लोगों के उल्टी दस्त से पीड़ित होने और चार दिनों में चार मौतें हो जाने के बावजूद यहां तैनात एएनएम और आशा कार्यकर्ता इस पूरी स्थिति से बेखबर ही रहीं। उन्होंने ने तो ग्रामीणों की सुध ली और न ही वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया। उन्हें नोटिस देकर जवाब तलब किया गया है

हैंडपंंप के पानी पर रोक, टैंकर से सप्लाई

भले ही स्वास्थ्य अमला टिकुरिया में हुई मौतों को स्वाभाविक मौतें बता रहा है। लेकिन डायरिया की आशंका से जिम्मेदार भी चिंतित हैं। एहतियात तौर पर ग्रामीणों को हैंडपंप का पानी इस्तेमाल करने से रोक दिया गया है। पीएचई के अमले को जल का शुद्धिकरण करने के लिए भी कहा गया है। फिलहाल ग्रामीणों की जरूरत पूरी करने के लिए यहां टैंकर से पानी भेजा जा रहा हैं।

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