Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
चांदनी चौक की गलियों में एक इमोशनल सफर— 376 साल पुराना इतिहास, यादें और इंसानी रिश्तों की खूबसूरत दा... आज का मौसम: देश के कई राज्यों में बदला मिजाज, दक्षिण में बारिश का दौर जारी— जानिए अपने शहर का हाल मध्य प्रदेश के जबलपुर में धनतेरस की रात दर्दनाक हादसा, गाजी नगर की झुग्गी बस्ती में भीषण आग से 50 से... रामनगरी अयोध्या में भव्य दीपोत्सव 2026 आज, 35 लाख दीयों और 2100 ड्रोनों के शो से जगमगाएगी राम की पैड... उत्तर प्रदेश के ताजनगरी आगरा में एक कोचिंग सेंटर के अंदर मिला गणित के शिक्षक का सड़ा-गला शव, इलाके म... आंध्र प्रदेश में बड़ा राजनीतिक सदमा, चुनाव परिणाम से ठीक पहले जन सेना पार्टी की युवा प्रत्याशी का हा... जयपुर में बिक रही 1 लाख 23 हजार रुपये किलो वाली शाही मिठाई, सोने के सिक्के जैसी ‘त्योहार अशर्फी’ बनी... नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर बनेगा आर्क टाइप फ्लाईओवर, 84 करोड़ की लागत से दूर होगी जाम की समस्... महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की खबरों पर अनिल देशमुख का बड़ा बयान, खारिज ... पाकिस्तान ने पंजाब के सीएम भगवंत मान को वीजा देने पर कही बड़ी बात, लाहौर में होने वाले सम्मेलन का मा...

दिल्ली में हवा हुई बेहद जहरीली, एक्यूआई 382 पर पहुंचा— एनसीआर में ग्रैप-3 की पाबंदियां लागू

2

दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण एक बार फिर विकराल रूप धारण करता जा रहा है, जहाँ शुक्रवार को शहर की हवा ‘गंभीर’ श्रेणी के और अधिक करीब पहुंच गई है। प्रदूषण के भारी स्तर और शहर को अपनी आगोश में लेने वाले घने स्मॉग के कारण विजिबिलिटी (दृश्यता) काफी कम हो गई है। केंद्रीय आंकड़ों के मुताबिक, शहर का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) उछलकर 382 के आंकड़े पर जा पहुंचा है, जो सीधे तौर पर ‘बहुत खराब’ श्रेणी को दर्शाता है। शुक्रवार को कुल 58 एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशनों में से 26 केंद्र ऐसे रहे जहाँ एक्यूआई सीधे ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज किया गया, जबकि 31 केंद्रों पर यह ‘बहुत खराब’ और केवल एक केंद्र (लोधी रोड) पर ‘खराब’ स्थिति में पाया गया। इनमें पंजाबी बाग में सबसे अधिक 453, जहांगीरपुरी में 447 और रोहिणी में 444 एक्यूआई दर्ज किया गया।

प्रदूषण के बढ़ते खतरे को थामने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने दिल्ली-एनसीआर में लागू किए ग्रैप-3 के कड़े आपातकालीन उपाय

राजधानी की आबोहवा को और अधिक जहरीला होने से रोकने के वास्ते ‘वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग’ (CAQM) ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ‘ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान’ (GRAP) के तीसरे चरण के तहत तमाम आपातकालीन प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि दीपावली के जश्न, वाहनों से निकलने वाले भारी धुएं तथा पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने के चरम सत्र के कारण आने वाले दिनों में प्रदूषण का यह बोझ और अधिक बढ़ सकता है।

दीपावली के नजदीक आते ही लोगों को महसूस होने लगी हवा में महक, 7 से 9 नवंबर के बीच ‘गंभीर’ श्रेणी में रहने की आशंका

त्योहार के मुहाने पर खड़े शहर में सोशल मीडिया से लेकर आम जनजीवन तक लोग लगातार हवा की दयनीय स्थिति पर चिंता जता रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि उन्हें हवा में अभी से पटाखों और धुएं की गंध महसूस होने लगी है। दिल्ली के लिए अधिकृत ‘एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम’ की रिपोर्ट के अनुसार, आगामी 7 से 9 नवंबर के बीच राजधानी में हवा की गुणवत्ता पूरी तरह से ‘गंभीर’ श्रेणी के दायरे में बनी रह सकती है। इसके बाद के सप्ताहभर के दौरान भी हवा के ‘गंभीर’ और ‘बहुत खराब’ श्रेणियों के बीच ही झूलते रहने का अनुमान जताया गया है।

धूल उड़ाने वाली निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियों पर सख्त पाबंदियां, मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियां बढ़ा रही हैं संकट

GRAP-3 के नियमों के तहत पूरे एनसीआर क्षेत्र में धूल उत्पन्न करने वाली सभी प्रकार की कंस्ट्रक्शन और डिमोलिशन (निर्माण और तोड़फोड़) गतिविधियों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए गए हैं। पर्यावरण वैज्ञानिकों का मानना है कि हवा की गुणवत्ता में आई इस भारी गिरावट के पीछे प्रतिकूल मौसमी दशाएं मुख्य वजह हैं, जिसमें 6,000 वर्ग मीटर प्रति सेकंड से कम का ‘वेंटिलेशन इंडेक्स’ और 10 किमी प्रति घंटे से कम की सुस्त हवा की गति शामिल है, जो प्रदूषकों को वातावरण में फैलने से रोक रही है। इस दौरान हवा में पीएम2.5 (PM2.5) के सूक्ष्म कण मुख्य प्रदूषक के रूप में उभरे हैं जो फेफड़ों में गहराई तक जा सकते हैं।

परिवहन क्षेत्र और पराली जलाने की घटनाएं बनीं प्रदूषण की मुख्य वजह, सैटेलाइट डेटा में सामने आए आंकड़े

दिल्ली के ‘डिसीजन सपोर्ट सिस्टम’ (DSS) से मिले विश्लेषण के मुताबिक, शहर में प्रदूषण फैलाने में ट्रांसपोर्ट सेक्टर (परिवहन) की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 17.9 प्रतिशत रही, जबकि पराली जलाने का योगदान 13 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसके अलावा स्थानीय स्रोतों में ऊर्जा उत्पादन, आसपास के उद्योग, कचरा जलाना, निर्माण कार्य और घरेलू स्रोत भी प्रदूषण में योगदान दे रहे हैं। अंतरिक्ष अनुसंधान प्रयोगशालाओं के सैटेलाइट डेटा के अनुसार, विभिन्न राज्यों में खेतों में पराली जलाने की घटनाएं लगातार जारी हैं, जिनका धुआं उत्तर भारत की हवा को और अधिक जहरीला बना रहा है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.