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बेंगलुरु नरसंहार मामले में सनसनीखेज खुलासा, आरोपी कैब ड्राइवर ने नाबालिग बेटी का किया ब्रेनवाश— 10 साल के बच्चे को बताया था कचरा

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बेंगलुरु: कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के राजाजीनगर इलाके में हुए एक ही परिवार के सात सदस्यों के सनसनीखेज नरसंहार कांड में हर गुजरते घंटे के साथ बेहद चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं। बेंगलुरु शहर के पुलिस कमिश्नर सीमांत कुमार सिंह और उत्तर डिवीजन के पुलिस उपायुक्त (DCP) की देखरेख में चल रही गहन जांच में यह बात साफ हो गई है कि मुख्य आरोपी और पूर्व कैब चालक इंदुशेखर ने कत्ल का यह खूनी खेल बीते 16 अक्टूबर से ही अंजाम देना शुरू कर दिया था। इस रोंगटे खड़े कर देने वाले हत्याकांड में सबसे हैरान करने वाला पहलू यह सामने आया है कि आरोपी ने किस तरह अपने 10 साल के मासूम भतीजे/बच्चे को मौत के मुंह से बचाया था और अपनी ही नाबालिग बेटी का मानसिक रूप से ‘ब्रेनवाश’ कर उसे इस भयानक साजिश में शामिल कर लिया था।

शवों से भरे थैलों को कार की डिग्गी में लादकर मासूम बच्चे के सामने ही बोला झूठ, शिराडी घाट की खाई में फेंके थे दंपति के शव

पुलिस पूछताछ में सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि जब इंदुशेखर ने नलिनी और शंकर (दंपति) की हत्या की, तो उनके शवों को एक बड़े प्लास्टिक के थैले में ठूंसकर अपनी कार की पिछली सीट व डिग्गी में लाद लिया। सबसे दिल दहला देने वाली बात यह थी कि उसने नलिनी और शंकर के 10 साल के मासूम बेटे को भी उसी गाड़ी में साथ बैठा लिया था। जब रास्ते में मासूम बच्चे ने गाड़ी में रखे उन भारी थैलों के बारे में जिज्ञासावश पूछा, तो शातिर इंदुशेखर ने बेहद बेफिक्र अंदाज में जवाब दिया कि ‘यह घर का बेकार कचरा है, जिसे ठिकाने लगाने जा रहे हैं।’ इसके बाद वह मासूम को साथ लेकर सीधे शिराडी घाट पहुंचा और गहरी खाई में दोनों पति-पत्नी के शव फेंककर वापस बेंगलुरु लौट आया।

रिश्तेदारों को गुमराह करने के लिए जिंदा रखा था 10 साल के बच्चे को, घर लौटने पर मासूम का भी करने वाला था अंत

पुलिस की विस्तृत पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपी इंदुशेखर ने उस 10 साल के बच्चे को जानबूझकर तुरंत नहीं मारा था, बल्कि उसकी एक सोची-समझी चाल थी। वह चाहता था कि यदि इस दौरान पीड़ित परिवार के कोई रिश्तेदार फोन करें, तो वह उस बच्चे से फोन पर बात करवा सके, ताकि सबको यह यकीन दिलाया जा सके कि पूरा परिवार अभी किसी ट्रिप पर बाहर गया हुआ है। घर वापस लौटने के बाद उसकी योजना उस मासूम को भी रास्ते से हटाने की थी, लेकिन गनीमत यह रही कि उससे पहले ही सतर्क पुलिस ने उसे धर दबोचा और एक बड़ी अनहोनी टल गई।

पिता के बहकावे में आकर खूनी साजिश में शामिल हुई नाबालिग बेटी, पुलिस कमिश्नर ने दी क्रूरता और आपराधिक इतिहास की जानकारी

बेंगलुरु शहर के पुलिस कमिश्नर सीमांत कुमार सिंह ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी इंदुशेखर ने अपनी ही कम उम्र की नाबालिग बेटी का मानसिक रूप से पूरी तरह ‘ब्रेनवाश’ कर दिया था। उसने अपनी बेटी से कहा था कि, “यह पूरा परिवार हमारी जान का दुश्मन बना हुआ है। जब तक ये दुनिया में जिंदा रहेंगे, हम कभी सुकून से नहीं जी पाएंगे। इसलिए चलो मिलकर इन्हें हमेशा के लिए खत्म कर देते हैं।” पिता के इस नापाक और बहकावे भरे शब्दों में आकर नादान बेटी भी इस जघन्य साजिश में शामिल हो गई। पुलिस कमिश्नर ने पुष्टि की है कि नाबालिग बेटी को हिरासत में लेकर उससे भी गहन पूछताछ की जा रही है। इसके अलावा कमिश्नर ने यह भी खुलासा किया कि आरोपी इंदुशेखर पहले कैब चलाने का काम करता था और उसके खिलाफ पहले से ही मदननायकनहल्ली पुलिस थाने में चेन स्नेचिंग का एक आपराधिक मामला दर्ज है।

कत्ल का पूरा टाइमलाइन— 16 अक्टूबर से शुरू हुआ था सिलसिलेवार हत्याओं का खौफनाक सिलसिला

जांच के दौरान पुलिस ने इस पूरे नरसंहार की क्रमानुसार टाइमलाइन तैयार की है:

  • 16 अक्टूबर: आरोपी ने सुनियोजित तरीके से सबसे पहले अपनी पत्नी सुनीता और फिर अपनी सास रूपवती की ओखली व भारी पत्थरों से सिर कुचलकर हत्या कर दी।

  • सालों और उनके परिजनों का कत्ल: इसके बाद उसने अपनी पत्नी के भाई शिवकुमार, उनकी पत्नी दिव्या और उनके 7 साल के मासूम बेटे पुनीत को अपने घर बुलाया और बेरहमी से मार डाला।

  • अंतिम शिकार (नलिनी और शंकर): अंत में उसने नलिनी और उसके पति शंकर को अपना निशाना बनाया तथा उनके शवों को 10 साल के बच्चे के सामने ही गाड़ी में लादकर शिराडी घाट की खाइयों में ठिकाने लगा दिया।

  • 3 नवंबर (गुमशुदगी और गिरफ्तारी): श्रीरामपुर पुलिस थाने में 3 नवंबर को दर्ज कराई गई गुमशुदगी की रिपोर्ट के आधार पर जब पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की, तो सनसनीखेज सच सामने आया। पुलिस ने मुख्य आरोपी इंदुशेखर को गिरफ्तार कर राजाजीनगर थाने में हत्या का गंभीर मामला दर्ज कर लिया।

मनोचिकित्सक डॉ. आदित्य पांडुरंगी का विश्लेषण— आरोपी में पछतावा न होना गंभीर मानसिक विकृति और साइकोपैथी का स्पष्ट लक्षण

धारवाड़ स्थित डीआईएमएचएएनएस (DIMHANS) के वरिष्ठ प्रोफेसर और जाने-माने मनोचिकित्सक डॉ. आदित्य पांडुरंगी ने इस हाई-प्रोफाइल और दहला देने वाले केस का विश्लेषण करते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि “आरोपी इंदुशेखर का यह दावा करना कि उसे अपने किए गए सात कत्लों पर जरा भी पछतावा नहीं है, उसकी अत्यंत गंभीर मानसिक विकृति, व्यक्तित्व विकार (Personality Disorder) और क्रूर साइकोपैथी (Psychopathy) को दर्शाता है। जरूरत से ज्यादा नशा करने की आदत, बचपन से ही अत्यधिक गुस्सैल स्वभाव और छोटी-छोटी बातों पर भी बेरहमी से बदला लेने की प्रवृत्ति इंसान को धीरे-धीरे एक क्रूर राक्षस बना देती है।” इस मामले में पुलिस आगे की विधिक कार्रवाई में जुती हुई है।

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