Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुणे को दी 21,800 करोड़ की मेट्रो परियोजनाओं की सौगात, हिंजेवाड़ी से शि... बॉम्बे हाईकोर्ट का बीएमसी को कड़ा निर्देश, अभिनेत्री दीया मिर्जा का हटाया गया वीडियो दोबारा सोशल मीड... अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी में सियासी घमासान, छह वरिष्ठ नेताओं ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्र... जम्मू-कश्मीर की राजनीति में बड़ा भूचाल, सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी के इस्तीफे से उमर अब्दुल्ला क... दक्षिण ब्लॉक होगा पूरी तरह खाली, थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ और डीजीएमओ का कार्यालय नए शौर्य भवन में... अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी में सियासी हलचल तेज, कोर कमेटी की बैठक में पार्थ पवार के फैसलों पर ज... आगरा के कमला नगर में पीवीसी कारोबारी के घर बड़ी चोरी, तीन नकाबपोश बदमाश 70 लाख के जेवर ले उड़े गोवंश तस्करी मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, वाहन जब्ती को अवैध करार देकर सरकार पर लगाया ... बिहार में नदियों की गाद से बनेंगे नेशनल हाईवे, NHAI और राज्य सरकार के बीच हुआ बड़ा समझौता Health and Nutrition Tips Protein Products Market: बाजार में बिकने वाले प्रोटीन प्रोडक्ट्स खरीदने से...

Amritsar Smog Air Pollution Diwali 2026: अमृतसर में दीपावली से पहले बढ़ा वायु प्रदूषण, AQI पहुंचा 164; पराली जलाने के मामलों पर प्रशासन सख्त

4

अमृतसर: पंजाब के ऐतिहासिक शहर अमृतसर में दीपावली के त्यौहार से कुछ दिन पहले ही प्रदूषण और स्मॉग ने लोगों की सांसों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। पराली जलाने से उठने वाले धुएं, वाहनों के भारी धुएं और मौसम में आए बदलाव के कारण शहर की आबोहवा लगातार जहरीली होती जा रही है। वर्तमान में यहाँ वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 164 दर्ज किया गया है। सुबह के वक्त और शाम ढलते ही शहर के वातावरण में धुंध और धुएं की एक मोटी परत साफ महसूस की जा रही है। हवा में तैर रहे ये बारीक जहरीले कण और गैसें सीधे सांस के रास्ते फेफड़ों तक पहुंचकर दमा, ब्रोंकाइटिस और सीओपीडी (COPD) से पीड़ित मरीजों के लिए गंभीर मुसीबतें पैदा कर रहे हैं। इस बीच, धान की कटाई के दौरान खेतों में पराली जलाने के अब तक 144 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 27 किसानों के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है और 56 किसानों के खेतों में रेड एंट्री की गई है।

हवा में घुले पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे खतरनाक सूक्ष्म कण, श्वसन तंत्र को पहुंचा रहे हैं भारी नुकसान

विशेषज्ञों के मुताबिक, अमृतसर में छाए इस स्मॉग के दौरान हवा में कई तरह के हानिकारक प्रदूषक तत्व और गैसें मौजूद हैं, जिनमें मुख्य रूप से पीएम 2.5 (PM 2.5) और पीएम 10 (PM 10) शामिल हैं। पीएम 2.5 के अत्यधिक बारीक कण, जिनका आकार 2.5 माइक्रोमीटर से भी कम होता है, सांस के जरिए फेफड़ों की सबसे गहरी परतों तक उतर जाते हैं और रक्त संचार को भी प्रभावित कर सकते हैं। वहीं, पीएम 10 कण सांस की नलियों में अवरोध पैदा कर तेज खांसी, गले में खराश और सांस फूलने की दिक्कतें बढ़ाते हैं। इसके अलावा पराली के धुएं, गाड़ियों के निकास और अन्य स्रोतों से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और विभिन्न वाष्पशील कार्बनिक यौगिक मिलकर ओजोन के स्तर को भी बढ़ाते हैं, जो फेफड़ों को सीधे तौर पर कमजोर करते हैं।

जमीन के करीब जम जाते हैं प्रदूषक कण, छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. नरेश चावला ने दी तापमान उलटाव की स्थिति पर चेतावनी

प्रख्यात छाती रोग विशेषज्ञ और पूर्व जिला टीबी अधिकारी डॉ. नरेश चावला ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि स्मॉग की इस गंभीर स्थिति में जब हवा की गति धीमी होती है और तापमान की परतों के कारण ऊपरी वायुमंडल में हवा का मिश्रण रुक जाता है, तब प्रदूषक तत्व जमीन के बिल्कुल करीब ही जमा होकर रह जाते हैं। इस पर्यावरणीय स्थिति को ‘तापमान उलटाव’ (Temperature Inversion) कहा जाता है। इसके कारण धुआं और अन्य विषैले तत्व ऊपर नहीं फैल पाते और इंसानों के सांस लेने वाले स्तर पर ही मंडराते रहते हैं। ऐसे में जो लोग सुबह की सैर के लिए निकलते हैं या कामकाज हेतु बाहर जाते हैं, वे इस प्रदूषित हवा को सीधे अपने शरीर के अंदर खींच लेते हैं, जिसका बुरा असर पुरानी बीमारियों से ग्रस्त लोगों पर सबसे ज्यादा पड़ता है।

दमा के मरीजों के लिए संवेदनशील हुई हवा, सांस की नलियों में सूजन और सीने में जकड़न की बढ़ सकती है समस्या

वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रजनीश शर्मा का कहना है कि स्मॉग और पीएम 2.5 जैसे सूक्ष्म कण दमा (अस्थमा) के रोगियों के लिए जी का जंजाल बन सकते हैं। दमा के मरीजों की श्वसन नलियां पहले से ही काफी संवेदनशील होती हैं और प्रदूषित हवा के संपर्क में आते ही उनमें सूजन व जलन अत्यधिक बढ़ जाती है। परिणामस्वरूप, मरीज को सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज आना, सीने में भारी जकड़न, लगातार खांसी उठना और सांस लेने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे मरीजों को सुबह और रात के वक्त विशेष सावधानी बरतने तथा डॉक्टरों द्वारा निर्धारित इनहेलर व दवाइयों का नियमित रूप से उपयोग करने की सलाह दी जाती है।

सीओपीडी और ब्रोंकाइटिस के मरीजों के लिए भी मंडरा रहा है बड़ा खतरा, बुजुर्गों और बच्चों को बरतने की है खास जरूरत

सरकारी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर विशाल वर्मा के अनुसार, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) और पुरानी ब्रोंकाइटिस से पीड़ित मरीजों का श्वसन तंत्र पहले से ही काफी कमजोर स्थिति में होता है। दूषित हवा के लगातार संपर्क में आने से इन रोगियों में बलगम बनने, तेज खांसी और सांस फूलने के लक्षण तेजी से गंभीर हो सकते हैं, जिससे कई बार उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत भी आ सकती है। इसके अलावा घर के बुजुर्गों, हृदय रोगियों और छोटे बच्चों को भी इस प्रदूषित वातावरण में खुद को सुरक्षित रखने के लिए विशेष एहतियात बरतनी चाहिए तथा जरा सी भी तकलीफ होने पर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।

दीपावली के पटाखों से और अधिक विकट हो सकते हैं हालात, सीनियर डॉक्टरों ने सुबह-शाम सैर से बचने की दी सलाह

आगामी दीपावली के त्यौहार पर पटाखों की आतिशबाजी से निकलने वाला धुआं, धूल और रासायनिक कण इस हवा की गुणवत्ता को और अधिक रसातल में ले जा सकते हैं। पटाखों के जलने से पीएम 2.5, पीएम 10 के साथ-साथ सल्फर डाइऑक्साइड और विभिन्न भारी धातुओं के सूक्ष्म कण वातावरण में घुल जाते हैं, जिससे बीमार व्यक्तियों की सेहत पर बहुत बुरा असर पड़ता है। सरकारी छाती रोग अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. संदीप महाजन ने आम जनता से अपील की है कि वे इन दिनों सुबह और शाम के समय खुले में सैर करने से परहेज करें। घर से बाहर निकलते वक्त अच्छी क्वालिटी वाले एन-95 मास्क का उपयोग करें और अपने घरों के भीतर भी धुएं व प्रदूषण के स्रोतों से दूरी बनाकर रखें।

फेफड़ों की गहरी परतों तक पहुंच रहे हैं पीएम 2.5 के जहरीले कण, डॉक्टर दलजीत सिंह ने की नियमित इलाज जारी रखने की अपील

सरकारी टीबी अस्पताल के छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. दलजीत सिंह ने रेखांकित किया कि स्मॉग के इस दौर में हवा में तैर रहे पीएम 2.5 के सूक्ष्म कण इंसानी फेफड़ों की सूक्ष्मतम इकाइयों और गहरी परतों तक आसानी से पैठ बना लेते हैं। ये कण फेफड़ों के भीतर पहुंचकर अंदरूनी सूजन को बढ़ाते हैं, जिससे दमा, ब्रोंकाइटिस और सीओपीडी के मरीजों का दम घुटने जैसी स्थिति बन सकती है। उन्होंने सभी ऐसे मरीजों को आगाह किया है कि वे प्रदूषित हवा के सीधे संपर्क में आने से बचें और बिना किसी कोताही के अपना नियमित चिकित्सीय उपचार और दवाइयां जारी रखें।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.