Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
SIR Process in Karnataka: कर्नाटक में एसआईआर प्रक्रिया पर कांग्रेस के अंदर अंतर्कलह, मंत्रियों के अल... NEET UG Paper Leak Case: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में नीट पेपर लीक मामले पर सुनवाई, 18 नवंबर को ... Cyclone Arnab Rapid Intensification: बंगाल की खाड़ी में खतरनाक रूप ले रहा चक्रवात 'अर्णब', वैज्ञानिक... Rajesh Khanna Case Supreme Court Verdict: अनीता आडवाणी को सुप्रीम कोर्ट से झटका, राजेश खन्ना के साथ ... Barmer Panchayat Election Controversy: नामांकन खारिज होने के बावजूद शख्स ने लड़ा चुनाव और बन गया सरप... Purnia News: अवैध संबंधों का विरोध करने पर पति की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, पूर्णिया में पत्नी औ... Gorakhpur Encounter News: महिला को बाइक से धक्का देकर मारने वाला बदमाश पुलिस मुठभेड़ में ढेर, गिरफ्त... Karwa Chauth 2026: अपनों से दूर भरतपुर के ‘अपना घर आश्रम’ में 212 मानसिक रूप से स्वस्थ महिलाएं रखेंग... Samastipur Viral Video: बिहार के समस्तीपुर में विवाहिता की मांग में जबरन सिंदूर भरने का वीडियो वायरल... Ghaziabad Crime News: गाजियाबाद में पत्नी ने जिम ट्रेनर प्रेमी के साथ मिलकर रची पति की हत्या की साजि...

Dantewada News: बस्तर दशहरा से वापस लौटी मां दंतेश्वरी की छत्र-डोली, गॉड ऑफ ऑनर के साथ शहर में हुआ भव्य स्वागत

5

दंतेवाड़ा: छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी दंतेवाड़ा में उस वक्त पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा, जब बस्तर दशहरा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के बाद मां दंतेश्वरी की पवित्र छत्र और डोली मंगलवार देर रात वापस दंतेवाड़ा पहुंच गई। आंवराभाटा स्थित विश्राम डेरे में रात्रि विश्राम पूरा होने के बाद बुधवार को सुबह विधि-विधान से माता की विशेष पूजा-अर्चना संपन्न की गई। इसके पश्चात, पुलिस बल के जवानों ने मां की छत्र-डोली को गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया। पारंपरिक लोकनृत्य, ढोल-नगाड़ों की थाप और ‘मां दंतेश्वरी’ के जयकारों के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालु छत्र-डोली को पैदल लेकर नगर की ओर रवाना हुए। रास्ते में जगह-जगह पर भक्तों द्वारा माता का भव्य स्वागत किया गया, जिससे पूरा शहर आस्था के रंग में रंगा नजर आया।

सदियों पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का निर्वहन, बस्तर दशहरा से जगदलपुर से लौटीं माता

मां दंतेश्वरी की यह वापसी केवल एक सामान्य धार्मिक आयोजन भर नहीं है, बल्कि यह दंतेवाड़ा की सदियों पुरानी समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं के जीवंत निर्वहन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर है। विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा उत्सव में शामिल होने के लिए जगदलपुर गई माता की छत्र-डोली की जब अपने धाम वापसी हुई, तो नगरवासियों ने गजब के उत्साह और श्रद्धा के साथ उनका स्वागत किया।

बाबा बोधराज के दरबार में हाजिरी और विशेष पूजा, नगर के संरक्षक माने जाते हैं क्षेत्रपाल देवता

नगर में प्रवेश के दौरान मां दंतेश्वरी की छत्र-डोली सीधे जय स्तंभ चौक स्थित बाबा बोधराज के दरबार में पहुंची, जहां पारंपरिक रस्मों को निभाते हुए विशेष पूजा-अर्चना की गई। स्थानीय लोक मान्यताओं और जनश्रुतियों के अनुसार, बाबा बोधराज को दंतेवाड़ा नगर का मुख्य संरक्षक और प्रमुख क्षेत्रपाल देवता माना जाता है। यही कारण है कि बस्तर से लौटने के बाद सबसे पहले उनके दरबार में हाजिरी लगाने और आशीर्वाद लेने की परंपरा का गहरा धार्मिक महत्व है।

माता की अनुपस्थिति में संभालते हैं नगर की सुरक्षा की कमान, निभाई जाती है अनुमति की विशेष रस्म

मान्यता है कि जब मां दंतेश्वरी बस्तर दशहरा में शामिल होने के लिए जगदलपुर प्रस्थान करती हैं, उस अंतराल में दंतेवाड़ा नगर की सुरक्षा और व्यवस्था की संपूर्ण जिम्मेदारी बाबा बोधराज तथा नगर कोतवाल घाट भैरव बाबा को सौंप दी जाती है। माता के नगर से बाहर रहने के दौरान इन स्थानीय देवताओं को ही नगर का मुख्य रक्षक मानकर उनकी विधिवत पूजा की जाती है। यही वजह है कि जब माता वापस लौटती हैं, तो मंदिर में प्रवेश करने से पूर्व बाबा बोधराज के दरबार में पहुंचकर अनुमति लेने की प्राचीन रस्म को पूरी निष्ठा से निभाया जाता है।

सफेद मुर्गा भेंट करने की परंपरा के साथ मंदिर में होता है प्रवेश, लोकसंस्कृति की अनूठी मिसाल

दंतेवाड़ा की इस विशिष्ट और पारंपरिक अनुष्ठान के तहत बाबा बोधराज के दरबार में पूजा संपन्न होने के बाद ही मां दंतेश्वरी को मुख्य मंदिर में प्रवेश कराने की अनुमति मिलती है। परंपरा के अनुसार स्थानीय पुजारी विधि-विधान से अनुष्ठान पूरा कराते हैं, जिसमें पारंपरिक रूप से सफेद मुर्गा भेंट करने की रस्म भी शामिल है। इन सभी धार्मिक विधानों को पूरा करने के बाद ही माता की छत्र-डोली को मंदिर के गर्भ गृह में प्रवेश कराया जाता है। यह परंपरा नगर की सुरक्षा व्यवस्था सौंपने और वापसी पर कृतज्ञता ज्ञापित करने का प्रतीक है।

पीढ़ियों से चली आ रही आस्था, ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक नृत्य से जीवंत हुई विरासत

मां दंतेश्वरी की छत्र-डोली की वापसी के अवसर पर शहर में दिखाई देने वाला जनसैलाब और उत्साह इस क्षेत्र की गहरी धार्मिक आस्था को दर्शाता है। ढोल-नगाड़ों की गूंज, पारंपरिक लोकनृत्य और श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा ने पूरे परिवेश को अलौकिक बना दिया। बस्तर दशहरा के बाद माता की वापसी और बाबा बोधराज के दरबार में अनुमति की यह अनूठी परंपरा दंतेवाड़ा की सांस्कृतिक पहचान का मुख्य आधार है, जिसे आज भी यहां की पीढ़ियां पूरी श्रद्धा के साथ निभाती आ रही हैं।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.