Kisan Andolan Chhattisgarh: धान के बढ़े दाम और बकाया भुगतान की मांग को लेकर किसानों ने निकाली ट्रैक्टर रैली
छत्तीसगढ़ भारतीय किसान संघ के बैनर तले प्रदेशभर के किसानों ने अपनी प्रमुख 12 सूत्रीय मांगों को लेकर राज्य के सभी 33 जिला मुख्यालयों पर जोरदार प्रदर्शन किया। वर्तमान सरकार पर वादाखिलाफी का गंभीर आरोप लगाते हुए किसानों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। जिला मुख्यालयों तक पहुंचने के लिए किसानों ने बड़े पैमाने पर ट्रैक्टर रैलियां निकालीं। रायपुर में किसान पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में राजधानी रायपुर का बड़ा घेराव किया जाएगा।
📋 छत्तीसगढ़ भारतीय किसान संघ की प्रमुख 12 सूत्रीय मांगें
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गौ संरक्षण: प्रदेश में ‘गौवंदन योजना’ के प्रस्ताव को लागू किया जाए और ‘जी-राम-जी’ योजना को गायों के संरक्षण व संवर्धन से जोड़ा जाए।
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बकाया राशि का भुगतान: धान खरीदी वर्ष 2022-23 की किसानों की रुकी हुई 1700 करोड़ रुपये की बकाया राशि का तुरंत भुगतान किया जाए।
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धान का बढ़ा हुआ दाम: केंद्र सरकार द्वारा पिछले 3 वर्षों में की गई वृद्धि का लाभ जोड़कर 3358 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान की खरीदी हो। इसके साथ ही सब्जी और फल उत्पादकों को भी ‘कृषक उन्नति योजना’ से जोड़ा जाए।
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धान खरीदी की तारीख व नियम: धान की खरीदी 15 नवंबर से 15 फरवरी तक की जाए और प्रति बोरी अधिकतम 40 किलो 700 ग्राम तौल लेने का सरकारी आदेश जारी हो।
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बाढ़ का मुआवजा: हाल ही में आई बाढ़ से खराब हुई फसलों का तुरंत सर्वे कराकर प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा और बीमा का लाभ दिया जाए।
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टोकन व्यवस्था में सुधार: धान बेचने के लिए टोकन व्यवस्था सुधारी जाए (बड़े किसानों को 5 और छोटे किसानों को 2-3 टोकन मिलें) तथा दबाव बनाकर खाता सरेंडर कराने की प्रक्रिया बंद हो।
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अन्य मांगें: गन्ने के मूल्य में 150 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि, अधूरी सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करना, बिजली निजीकरण पर रोक, खाद की कालाबाजारियों पर लगाम और वैकल्पिक फसलों (मक्का-गेहूं) की एमएसपी पर खरीदी शामिल है।
📢 सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप, आंदोलन तेज करने की चेतावनी
छत्तीसगढ़ भारतीय किसान संघ के प्रदेश महामंत्री नवीन शेस ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार के कार्यकाल के लगभग 3 साल पूरे होने को हैं, लेकिन किसानों के साथ लगातार वादाखिलाफी हो रही है। पिछली सरकार का बकाया धान भुगतान आज तक नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि गौमाता की रक्षा को लेकर सरकार गंभीर नहीं है, जबकि सनातन धर्म में गाय का विशेष महत्व है। किसान नेताओं ने दोटूक शब्दों में कहा कि यदि समय रहते किसानों की इन जायज मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो प्रदेश भर के किसान सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
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