Shilpi Neha Tirkey Ranchi Visit: एशिया के प्रमुख मीट प्रोसेसिंग सेंटर को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की पहल, जल्द शुरू होंगे काम
रांची: कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने सोमवार को कांके स्थित बंद पड़ी बेकन फैक्ट्री का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने फैक्ट्री के पुनर्जीवन की दिशा में आ रही तकनीकी, प्रशासनिक एवं अन्य अड़चनों की विस्तृत जानकारी ली तथा इनके समाधान को लेकर विभागीय अधिकारियों के साथ चर्चा की। हैदराबाद स्थित National Meat Research Institute (NMRI) से रांची आए विशेषज्ञों एवं इंजीनियरों की टीम के साथ भी मंत्री ने फैक्ट्री की तकनीकी स्थिति, आवश्यक सुधार, आधुनिक सुविधाओं तथा भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। निरीक्षण के दौरान मंत्री ने कहा कि बेकन फैक्ट्री केवल एक पुराना औद्योगिक संस्थान नहीं है, बल्कि यह झारखंड के कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र के विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक विरासत है।
📉 एशिया के प्रमुख मीट प्रोसेसिंग सेंटर की रही है गिनती
एक समय में इसकी गणना भारत ही नहीं, बल्कि एशिया के प्रमुख मीट प्रोसेसिंग सेंटरों में की जाती थी। कूलिंग सिस्टम में आई तकनीकी खराबी के बाद लंबे समय से इसके बंद रहने का असर इससे जुड़े किसानों, पशुपालकों और पूरे क्षेत्र पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल फैक्ट्री को दोबारा शुरू करना नहीं है, बल्कि इसे आधुनिक, तकनीकी रूप से सक्षम और दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ संस्थान के रूप में विकसित करना है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ऐसा कोई प्रोजेक्ट नहीं बनाया जाना चाहिए जो कुछ वर्षों बाद फिर से बंद हो जाए, इसलिए विशेषज्ञों की सलाह और तकनीकी जांच के आधार पर ही आगे की कार्यवाही की जा रही है। मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन कार्यों के लिए आवश्यक क्लियरेंस उपलब्ध हैं, उन्हें बिना अनावश्यक विलंब के तेजी से पूरा किया जाए, ताकि शीघ्र ही जमीनी स्तर पर कार्य प्रारंभ होता दिखाई दे। उन्होंने लंबित प्रक्रियाओं, तकनीकी अनुमतियों तथा विभागीय स्तर पर सामने आ रहे विषयों की भी समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
🏛️ इतिहास और आधुनिकता का होगा अनूठा संगम
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि बेकन फैक्ट्री के पुनर्जीवन के साथ-साथ इसकी ऐतिहासिक विरासत को भी संरक्षित किया जाएगा। परिसर में मौजूद पुरानी मशीनरी, उपकरणों और अन्य ऐतिहासिक वस्तुओं को सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां इस संस्थान के गौरवशाली इतिहास और उस दौर की तकनीकी सोच को समझ सकें। उन्होंने कहा कि बेकन फैक्ट्री का इतिहास अपने आप में प्रेरणादायक है। जिस समय इसकी स्थापना हुई थी, उस दौर में भी आधुनिक तकनीक, दक्षता और प्रशिक्षण को विशेष महत्व दिया गया था। यहां कार्यरत तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों तक को प्रशिक्षण के लिए तब डेनमार्क भेजा गया था। परिसर में मौजूद पुरानी Mercedes वैन भी उस समय की दूरदर्शी सोच और आधुनिक तकनीक को अपनाने की प्रतिबद्धता की गवाही देती है।
📈 किसानों और पशुपालकों के लिए पैदा होंगे नए रोजगार के अवसर
राज्य की कृषि एवं पशुपालन मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि सरकार की कोशिश है कि बेकन फैक्ट्री की गौरवशाली विरासत को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर इसे फिर से जीवंत किया जाए। उन्होंने कहा कि इस संस्थान का पुनर्जीवन केवल एक फैक्ट्री को दोबारा संचालित करने की पहल नहीं होगी, बल्कि इससे झारखंड के किसानों और पशुपालकों के लिए नए अवसर पैदा होंगे, पशुपालन आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और राज्य के विकास को नई दिशा मिलेगी।
Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.