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Delhi News: सत्य निकेतन PG हादसे में मकान मालिकों पर कसेगा शिकंजा, स्निफर डॉग्स की मदद से NDRF का सर्च ऑपरेशन जारी

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नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के साउथ कैंपस से सटे सत्य निकेतन इलाके में पेइंग गेस्ट (PG) के रूप में संचालित हो रही एक पांच मंजिला इमारत के अचानक जमींदोज होने से राजधानी दहल उठी है।

इस भयावह हादसे में अब तक 6 छात्रों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि मलबे से 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। महज 55 वर्ग गज के सीमित भूखंड पर यह इमारत 1990 के दशक के अंतिम वर्षों में निर्मित की गई थी, जिसे समय के साथ अवैध रूप से बहुमंजिला पीजी में बदल दिया गया। इस रिसेटलमेंट कॉलोनी में पिछले 15 वर्षों के भीतर यह चौथी बड़ी घटना है, जिसने अवैध हॉस्टलों और जर्जर निर्माणों पर नगर निगम व प्रशासन की लापरवाही की पोल खोल दी है।

🐕 ग्राउंड जीरो पर NDRF का रेस्क्यू ऑपरेशन: प्रशिक्षित स्निफर डॉग्स कर रहे जिंदगी की तलाश

राहत और बचाव कार्य की स्थिति:

  • स्निफर डॉग्स की तैनाती: राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की विशेष टीमें अत्याधुनिक उपकरणों के साथ लगातार रेस्क्यू में जुटी हैं। कंक्रीट के विशाल मलबे के नीचे फंसे लोगों की गंध ट्रेस करने के लिए विशेष प्रशिक्षित खोजी कुत्तों (Sniffer Dogs) की मदद ली जा रही है।

  • कटर और क्रेन से मलबा हटाने का काम: बचाव दल गैस कटर और हाइड्रोलिक जैक के जरिए भारी स्लैब को काटकर अंदर दबे संभावित जीवित लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं।

❓ 1. क्या बिना परमिशन अवैध रूप से जोड़े गए थे अतिरिक्त फ्लोर?

अवैध निर्माण पर उठे सवाल:

  • MCD रिकॉर्ड और धरातल में अंतर: स्थानीय निवासियों के अनुसार, एमसीडी रिकॉर्ड में इस भवन को P-14 के रूप में चिह्नित किया गया था, जिसमें केवल बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर के ऊपर 4 मंजिलें थीं।

  • अवैध फ्लोर का निर्माण: आरोप है कि करीब दो साल पहले बिना किसी वैधानिक स्वीकृति के इसके ऊपर दो अतिरिक्त फ्लोर और तान दिए गए। इतनी घनी आबादी में खुलेआम हुए इस अवैध निर्माण पर स्थानीय निकाय आंखें मूंदे क्यों रहा?

🛠️ 2. बिना स्ट्रक्चरल असेसमेंट के कैसे चल रहा था रिपेयरिंग का काम?

तकनीकी लापरवाही और लोड-बेयरिंग से छेड़छाड़:

  • बेसमेंट में हो रही थी खुदाई: हादसे से लगभग एक सप्ताह पहले से बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर पर मरम्मत का काम चल रहा था।

  • इंजीनियरिंग अनदेखी: इमारत की दीवारों में पहले से सीलन, पानी का रिसाव और दरारें साफ दिखाई दे रही थीं। इसके बावजूद किसी प्रमाणित स्ट्रक्चरल इंजीनियर से भार वहन क्षमता (Load-Bearing Assessment) की जांच कराए बिना पिलर्स के पास काम क्यों कराया जा रहा था?

🚪 3. भारी-भरकम किराया, लेकिन इमरजेंसी एग्जिट शून्य: सुरक्षा मानकों की अनदेखी

मुनाफाखोरी और छात्रों की सुरक्षा से खिलवाड़:

  • 14 से 18 हजार तक किराया: ‘हॉस्टल डेज’ नामक निजी कंपनी को लीज पर देकर संचालित किए जा रहे इस पीजी में प्रत्येक छात्र से 14,000 से 18,000 रुपये प्रति बेड वसूला जाता था।

  • निकास का कोई दूसरा रास्ता नहीं: मोटी रकम वसूलने के बावजूद पीजी में आग या आपदा से बचने के लिए कोई इमरजेंसी एग्जिट (Emergency Exit) नहीं था और न ही नियमित फायर सेफ्टी ऑडिट का कोई रिकॉर्ड मौजूद मिला।

⏳ 4. 15 सालों में 4 हादसे: क्या पिछली त्रासदियों से सबक नहीं लिया गया?

लापरवाही का पुराना ढर्रा:

  • 299 मकानों की रिसेटलमेंट कॉलोनी: सत्य निकेतन की इस घनी कॉलोनी में पिछले 15 वर्षों में इमारत ढहने की यह चौथी घटना है।

  • 2022 का हादसा: साल 2022 में भी इसी क्षेत्र में इमारत गिरने से 2 मजदूरों की जान चली गई थी। बार-बार होने वाली इन त्रासदियों के बावजूद नगर निगम द्वारा पुरानी संरचनाओं का सेफ्टी ऑडिट क्यों नहीं कराया जाता?

🛑 5. दिखती दरारों और शिकायतों पर क्यों सोता रहा नगर निगम?

जिम्मेदार एजेंसियों की भूमिका:

  • प्रशासनिक उदासीनता: स्थानीय नागरिकों का दावा है कि भवन की जर्जर स्थिति और चौड़ी होती दरारें काफी समय से स्पष्ट दिख रही थीं।

  • लिखित शिकायत का बहाना: निगम अधिकारियों का कहना है कि उनके पास कोई आधिकारिक लिखित शिकायत दर्ज नहीं थी। यह सवाल सीधे तंत्र की जवाबदेही पर है कि क्या प्रशासन को खतरे का संज्ञान लेने के लिए हमेशा किसी बड़े जानलेवा हादसे का इंतजार रहता है?

⚖️ जांच के दायरे में लीज और मकान मालिक: तीनों भाइयों पर कस सकता है शिकंजा

विधिक पड़ताल और आगे की कार्रवाई:

  • मकान मालिकों की पहचान: पुलिस जांच के अनुसार, यह संपत्ति गुरुग्राम निवासी तीन भाइयों—हरि राम बंसल, आनंद बंसल और आजाद बंसल के नाम पर दर्ज है।

  • पहलुओं की जांच: दिल्ली पुलिस लीज एग्रीमेंट, हॉस्टल संचालन की अनुमतियों, लोड-बेयरिंग पिलर्स के साथ छेड़छाड़ और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता के सभी पहलुओं पर भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत जांच कर रही है।

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