JNU News: जेएनयू परिसर की दीवारों पर ‘फ्री उमर खालिद’ और ‘लॉन्ग लिव नक्सल’ के नारे, एबीवीपी ने वामपंथी संगठनों पर बोला तीखा हमला
नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर के भीतर दीवारों पर ‘फ्री उमर खालिद’ और ‘लॉन्ग लिव नक्सल’ जैसे विवादास्पद नारे लिखे जाने के बाद एक बार फिर यहां का राजनीतिक माहौल गरमा गया है। इन घटनाओं के सामने आने के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने आक्रामक रुख अपनाते हुए वामपंथी छात्र संगठनों और जेएनयू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) के नेतृत्व पर तीखा प्रहार किया है।
एबीवीपी का आरोप, वास्तविक मुद्दों से भटकाया जा रहा ध्यान
एबीवीपी संगठन का दावा है कि ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा द्वारा विभिन्न मंचों से उमर खालिद के पक्ष में दिए गए बयानों और उकसावे वाले नारों से प्रेरणा लेकर ही उनके कार्यकर्ताओं ने जेएनयू की दीवारों को गंदा किया है। संगठन का कहना है कि यह कृत्य विश्वविद्यालय के भीतर स्वस्थ लोकतांत्रिक और वैचारिक बहस को बढ़ावा देने के बजाय केवल टकराव और अराजकता को बढ़ावा दे रहा है। एबीवीपी नेताओं का यह भी कहना है कि वीर सावरकर जैसे महान राष्ट्रीय व्यक्तित्वों के चित्रों पर आपत्तिजनक टिप्पणियां और लेखन किया गया है, जो किसी भी स्थिति में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं बल्कि राष्ट्रीय नायकों का सीधा अपमान है। ज्ञात हो कि उमर खालिद वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े आपराधिक मामले में न्यायिक हिरासत में जेल में बंद है।
‘विचारों की स्वतंत्रता का अर्थ राष्ट्र नायकों का अपमान नहीं’
इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी आपत्ति जताते हुए जेएनयू एबीवीपी अध्यक्ष मयंक पंचाल ने स्पष्ट किया कि जेएनयू में विचारों की स्वतंत्रता का कतई यह अर्थ नहीं निकाला जा सकता कि किसी एक विचारधारा को अन्य विचारों और देश के सम्मानित राष्ट्रीय व्यक्तित्वों के प्रति अपमानजनक आचरण करने की खुली छूट मिल जाए। उन्होंने कहा कि परिसर की दीवारों पर इस तरह के उग्र राजनीतिक नारे लिखना और स्वतंत्रता सेनानियों के चित्रों के साथ तोड़फोड़ या आपत्तिजनक लेखन करना विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और शांतिपूर्ण माहौल को जानबूझकर दूषित करने का कुत्सित प्रयास है। जेएनयू का सामान्य छात्र समाज इस प्रकार की विभाजनकारी राजनीति को कभी स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि इन मामलों का तुरंत संज्ञान लेकर जिम्मेदार तत्वों की पहचान की जाए और परिसर की गरिमा की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
वामपंथी संगठनों पर माहौल बिगाड़ने का आरोप, कार्रवाई की मांग
एबीवीपी जेएनयू के सचिव प्रवीण पीयूष ने कहा कि वामपंथी संगठनों द्वारा लगातार विश्वविद्यालय का सौहार्दपूर्ण माहौल बिगाड़ने की साजिश रची जा रही है, क्योंकि यह संस्थान किसी एक विशेष विचारधारा की बपौती नहीं है। परिसर में सभी को असहमति जताने का अधिकार है, लेकिन सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, राष्ट्रीय विभूतियों का अनादर करना और उग्र नारों की आड़ में तनाव पैदा करना किसी भी रूप में छात्रहित में नहीं कहा जा सकता।
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