Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Delhi School Bomb Threat: स्कूल में छुट्टी पाने के लिए छात्रा ने ही दी थी बम की झूठी धमकी, दिल्ली पु... Air India Flight Cancellations: मध्यपूर्व तनाव के चलते एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने बढ़ाईं ... Amit Shah Delhi Meeting: गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली पुलिस और सीएम के साथ की उच्चस्तरीय बैठक, कानू... Mumbai Protest News: शिवाजी पार्क में आदिवासियों का GenZ जनआक्रोश मोर्चा आज, मंत्रियों के इस्तीफे और... Pakistan Cricket News: सलमान अली आगा की वापसी, मोहम्मद रिजवान बाहर; श्रीलंका के खिलाफ 14 सदस्यीय टेस... Mobile Market Trends India: मेमोरी चिप महंगी होने से कम हुए सस्ते फोन, लावा और एआई+ जैसे देसी ब्रांड... SIM Binding Rules in India: WhatsApp और Telegram के लिए नया नियम, सिम कार्ड हटाने पर बंद हो जाएंगे म... Sharad Purnima 2026: आज मनाई जा रही है शरद पूर्णिमा, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और संपूर्ण पौराणिक... Betul News: बैंक ऑफ महाराष्ट्र में 1.14 करोड़ का बड़ा फर्जीवाड़ा, सहायक प्रबंधक समेत दो गिरफ्तार; फर... Weather Forecast Delhi: पश्चिमी विक्षोभ का असर, दिल्ली-एनसीआर में झमाझम बारिश के बाद गिरा तापमान; मौ...

Sharad Purnima 2026: आज मनाई जा रही है शरद पूर्णिमा, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और संपूर्ण पौराणिक व्रत कथा

1

नई दिल्ली: हिंदू पंचांग के अनुसार, आज 25 अक्टूबर 2026, रविवार को शरद पूर्णिमा का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस विशेष तिथि को कोजागरी पूर्णिमा और रास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की इस रात में चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होकर आकाश से अमृत की वर्षा करता है, जिसके गुण स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी माने जाते हैं। इस दिन दूध और चावल से तैयार खीर को खुले आसमान के नीचे चंद्रमा की चांदनी में रखने की प्राचीन परंपरा है। इसके साथ ही, यह मान्यता भी है कि इस रात्रि माता लक्ष्मी पृथ्वी लोक पर भ्रमण करती हैं और जो भक्त रात्रि जागरण कर विधि-विधान से उनकी उपासना करते हैं, उन पर मां लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है।

शरद पूर्णिमा 2026 का शुभ मुहूर्त और समय

शरद पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर चंद्रमा की पूजा, मां लक्ष्मी की आराधना और व्रत कथा का पाठ करने का विशेष विधान है। इस दिन के प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं:

  • पूर्णिमा तिथि का आरंभ: 25 अक्टूबर 2026 को सुबह 11:55 बजे से

  • पूर्णिमा तिथि की समाप्ति: 26 अक्टूबर 2026 को सुबह 9:41 बजे तक

  • चंद्रोदय का समय: शाम लगभग 5:00 बजे से

  • निशीथ काल में महालक्ष्मी पूजा का समय: रात 11:40 बजे से 26 अक्टूबर को रात 12:31 बजे तक

शरद पूर्णिमा पर व्रत कथा सुनने का धार्मिक महत्व

सनातन परंपरा के अनुसार, शरद पूर्णिमा के दिन उपवास रखने, माता लक्ष्मी की पूजा करने और व्रत कथा पढ़ने या सुनने से समस्त पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। ऐसा माना जाता है कि जो जातक सच्चे मन और पूरी श्रद्धा के साथ इस व्रत को पूरा करते हैं, उनके जीवन में सुख-समृद्धि और वैभव का संचार होता है। यह व्रत जीवन में अनुशासन और भक्ति का संदेश देता है, इसलिए पूजा के दौरान कथा का श्रवण करना बेहद शुभ माना गया है। आइए जानते हैं इससे जुड़ी प्रचलित पौराणिक कथा।

साहूकार की दो बेटियों की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, किसी नगर में एक धनी साहूकार रहता था जिसकी दो पुत्रियां थीं। दोनों बहनें पूर्णिमा का व्रत रखती थीं, लेकिन उनके व्रत करने के तरीकों में अंतर था। बड़ी बेटी सभी नियमों और विधि-विधान का पूरी निष्ठा से पालन करते हुए व्रत करती थी, जबकि छोटी बेटी व्रत तो अवश्य करती थी, लेकिन उसके नियमों की अनदेखी करती थी और कई बार व्रत अधूरा छोड़ देती थी।

छोटी बेटी के जीवन में आए दुखों का कारण

समय बीतने के साथ दोनों बहनों का विवाह हो गया। बड़ी बेटी को सुखी और स्वस्थ संतानों का सुख प्राप्त हुआ, किंतु छोटी बेटी के भाग्य में लगातार दुख लिखा था। उसकी संतानें जन्म लेते ही दम तोड़ देती थीं, जिससे उसका जीवन अत्यधिक कष्टमय हो गया और उसे समझ नहीं आ रहा था कि उसके साथ ऐसा क्यों हो रहा है।

पंडित के परामर्श से दूर हुई समस्या

अपनी संतानों की बार-बार हो रही मृत्यु से व्यथित होकर छोटी बहन ने एक ज्ञानी पंडित से इसका कारण पूछा। पंडित ने उसे समझाया कि वह पूर्णिमा के व्रत को विधि-विधान से पूरा नहीं करती और नियमों की अनदेखी करती है, जिसके कारण उसे व्रत का पूर्ण फल नहीं मिल पाता। पंडित ने उसे सलाह दी कि यदि वह पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ आगामी पूर्णिमा का उपवास रखेगी, तो उसकी संतान अवश्य जीवित रहेगी।

व्रत के प्रभाव से मिला संतान सुख और चमत्कार

पंडित की बात मानकर छोटी बहन ने पूरी श्रद्धा के साथ व्रत का संकल्प लिया और सभी नियमों का पालन किया। कुछ समय पश्चात उसके घर एक और संतान का जन्म हुआ। उसने अपनी बड़ी बहन को घर बुलाया, लेकिन उससे पहले नवजात शिशु को एक सुरक्षित आसन पर लिटाकर ऊपर से कपड़ा ढक दिया। जब बड़ी बहन वहां आई, तो अनजाने में उसका आंचल शिशु को छू गया। उस पवित्र स्पर्श से वह मृतप्राय शिशु जीवित हो उठा।

व्रत के नियमों की महत्ता का संदेश

इस चमत्कारिक घटना को देखकर छोटी बहन की खुशी का ठिकाना न रहा। उसने अपनी बड़ी बहन और सभी को पूरी बात बताई और अपनी पिछली भूल का अहसास करते हुए विधि-विधान से व्रत करने के महत्व को समझा। यह कथा हमें यह सीख देती है कि किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या व्रत को हमेशा पूर्ण निष्ठा, श्रद्धा और नियमों के साथ ही पूरा करना चाहिए।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.