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अमरावती जिला महिला अस्पताल के बेबी वार्ड में भीषण आग: वेंटिलेटर ब्लास्ट से 3 नवजातों की दर्दनाक मौत

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अमरावती (महाराष्ट्र): महाराष्ट्र के अमरावती स्थित जिला महिला अस्पताल में तड़के एक हृदयविदारक और भीषण अग्निकांड की घटना सामने आई है। अस्पताल की तीसरी मंजिल पर स्थित विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU/NICU) में तड़के करीब 3:30 बजे अचानक एक वेंटिलेटर में जोरदार विस्फोट हुआ, जिसके बाद वार्ड में भीषण आग फैल गई। इस दर्दनाक हादसे में आग और धुएं की चपेट में आने से 3 नवजात बच्चों की झुलसकर मौत हो गई। घटना के तुरंत बाद अस्पताल परिसर में चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्य कर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए कई बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला।

👶 वार्ड में भर्ती थे 39 नवजात शिशु, 6 को सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में कराया गया शिफ्ट

बचाव कार्य और बच्चों की स्थिति का विवरण:

  • भर्ती बच्चों की संख्या: जिस समय यह दुखद हादसा हुआ, उस वक्त नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में कुल 39 नवजात शिशु उपचाराधीन थे।

  • अस्पताल कर्मियों की मुस्तैदी: आग की लपटें फैलते ही ड्यूटी स्टाफ ने तुरंत सक्रियता दिखाई और अधिकतम बच्चों को वार्ड की खिड़कियों व दरवाजों से सुरक्षित बाहर निकाला।

  • क्रिटिकल केयर में शिफ्टिंग: धुएं और संक्रमण के जोखिम को देखते हुए गंभीर रूप से प्रभावित 6 नवजात शिशुओं को तत्काल एंबुलेंस के जरिए नजदीकी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी गहन निगरानी की जा रही है।

❓ वेंटिलेटर की गुणवत्ता और मेंटेनेंस पर उठे सवाल, लोगों में गहरा आक्रोश

लापरवाही और व्यवस्थाओं पर उठ रहे प्रमुख सवाल:

  • तकनीकी खामी या पुराना उपकरण: इस भीषण दुर्घटना के बाद स्थानीय लोगों और परिजनों में भारी नाराजगी है। सवाल उठाया जा रहा है कि क्या वेंटिलेटर पुराना था या उसकी नियमित तकनीकी सर्विसिंग (मेंटेनेंस) नहीं कराई गई थी।

  • फायर सेफ्टी ऑडिट: घटना के बाद यह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि अस्पताल में अग्निशमन सुरक्षा के पर्याप्त उपकरण चालू हालत में थे या नहीं और दमकल की गाड़ियों को मौके पर पहुंचने में कितना समय लगा।

  • पुलिस की मौजूदगी: कानून-व्यवस्था और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए डीसीपी (DCP) और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर तैनात हैं।

🏥 10-15 दिन के मासूमों का चल रहा था इलाज, नए अस्पताल में हादसे से उठे सवाल

अस्पताल का इतिहास और सुरक्षा चिंताएं:

  • मासूमों का उपचार: वार्ड में भर्ती अधिकांश शिशु केवल 10 से 15 दिन के थे, जिनका जन्म के बाद विभिन्न जटिलताओं के कारण गहन उपचार चल रहा था।

  • उद्घाटन का संदर्भ: जिस जिला महिला अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई में यह अग्निकांड हुआ, उसका उद्घाटन पूर्व में उपमुख्यमंत्री अजीत पवार द्वारा किया गया था।

  • सुरक्षा की अनदेखी: एक आधुनिक और अपेक्षाकृत नए अस्पताल भवन में इस प्रकार की घातक तकनीकी खराबी और अग्निकांड होना स्वास्थ्य महकमे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

⚖️ पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने दिए उच्चस्तरीय जांच के आदेश

प्रशासनिक निर्देश और सरकारी सहायता:

  • जांच के सख्त निर्देश: अमरावती जिले के पालकमंत्री और राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने घटना का तुरंत संज्ञान लिया और सोशल मीडिया के जरिए पूरे मामले की निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।

  • पीड़ित परिवारों को ढांढस: उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पीड़ित परिवारों के साथ पूरी संवेदनशीलता के साथ खड़ी है और प्रशासन को प्रभावित परिजनों को हरसंभव चिकित्सकीय व आर्थिक सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया गया है।

  • लगातार मॉनिटरिंग: मंत्री और जिला प्रशासन के आला अधिकारी अस्पताल प्रबंधन के संपर्क में रहकर पल-पल की स्थिति और भर्ती बच्चों के स्वास्थ्य पर नजर बनाए हुए हैं।

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