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IRCTC अधिकृत एजेंट पर नहीं चलेगा रेलवे एक्ट की धारा 143 का केस: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रद्द किया क्रिमिनल केस

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जबलपुर (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की एकलपीठ ने रेलवे टिकट बुकिंग से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट और ऐतिहासिक व्यवस्था दी है।जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति IRCTC का अधिकृत एजेंट (Authorized Agent) है, तो उसके खिलाफ रेलवे अधिनियम 1989 की धारा 143 के तहत आपराधिक मामला नहीं बनता है। इस स्पष्टीकरण के साथ ही अदालत ने रेलवे कोर्ट के एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) के समक्ष लंबित आपराधिक प्रकरण को पूरी तरह निरस्त करने का आदेश पारित किया है।

🚨 साइबर कैफे पर आरपीएफ का छापा: पर्सनल आईडी से टिकट बुक करने पर दर्ज किया था केस

मामले की पृष्ठभूमि और एफआईआर का विवरण:

  • याचिकाकर्ता की स्थिति: याचिकाकर्ता अविनाश कुमार सोनी सिंगरौली में साइबर कैफे संचालित करते हैं और वे वर्ष 2015 से आईआरसीटीसी (IRCTC) के अधिकृत ई-टिकटिंग एजेंट हैं।

  • आरपीएफ की कार्रवाई: रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) ने उनके साइबर कैफे पर छापेमारी कर दो ई-टिकट जब्त किए थे, जो अधिकृत एजेंट लॉगिन के बजाय याचिकाकर्ता की व्यक्तिगत (Personal) यूजर आईडी से बुक किए गए थे।

  • चार्जशीट दाखिल: आरपीएफ ने इसे अनधिकृत टिकटिंग मानते हुए रेलवे एक्ट की धारा 143 के तहत मामला दर्ज कर सक्षम रेलवे मजिस्ट्रेट कोर्ट में चार्जशीट दायर कर दी थी।

👨‍⚖️ ‘अनधिकृत कारोबार का कोई प्रमाण नहीं’: अधिवक्ता विशाल डेनियल ने रखीं दलीलें

अदालत में याचिकाकर्ता पक्ष की प्रमुख दलीलें:

  • अनधिकृत दलाली का अभाव: याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विशाल डेनियल ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता एक वैध अधिकृत एजेंट है। रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे साबित हो कि वह टिकटों की कालाबाजारी या अवैध खरीद-बिक्री में लिप्त था।

  • छापेमारी के समय अनुपस्थिति: 20 नवंबर 2019 को जब आरपीएफ ने दुकान पर छापा मारा, तब याचिकाकर्ता वहां मौजूद नहीं था; वह वाराणसी में चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) की पढ़ाई कर रहा था और वह लॉ ग्रेजुएट भी है।

  • अवैध जब्ती का आरोप: बचाव पक्ष ने दलील दी कि दुकान पर उपस्थित याचिकाकर्ता के बुजुर्ग पिता को गैरकानूनी रूप से हिरासत में लिया गया और बिना वैधानिक अधिकार के कंप्यूटर सिस्टम, प्रिंटर व आईआरसीटीसी डोंगल जब्त कर लिए गए।

🏛️ सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला: सिर्फ बुकिंग के तरीके पर धारा 143 लागू नहीं

हाईकोर्ट का विधिक निष्कर्ष और केस निरस्त:

  • सुप्रीम कोर्ट की नजीर: जस्टिस हिमांशु जोशी की पीठ ने देश की शीर्ष अदालत (सुप्रीम कोर्ट) के पूर्व न्यायदृष्टांतों का हवाला दिया।

  • अपराध की सीमा: कोर्ट ने टिप्पणी की कि आरोप केवल टिकट बुक करने की तकनीकी प्रक्रिया (एजेंट आईडी की जगह पर्सनल आईडी के इस्तेमाल) तक ही सीमित है।

  • केस पूरी तरह रद्द: अदालत ने माना कि यदि इस आरोप को शत-प्रतिशत सही भी मान लिया जाए, तब भी यह रेलवे एक्ट की धारा 143 के तहत दंडनीय अपराध के दायरे में नहीं आता है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने निचली अदालत में लंबित समस्त कानूनी कार्यवाही को निरस्त कर दिया।

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