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पलामू टाइगर रिजर्व में अब AI रखेगा ‘तीसरी आंख’! हाथियों का हमला और जंगल की आग होगी बीते दिनों की बात; जानें कैसे काम करेगी ये जादुई तकनीक

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पलामूः पीटीआर (पलामू टाइगर रिजर्व) देश का दूसरा टाइगर रिजर्व बन गया है जो वन्य जीवों के संरक्षण में एआई का इस्तेमाल करेगा. ओडिशा के सिमलीपाल टाइगर रिजर्व ने सबसे पहले वन्य जीव के संरक्षण में एआई तकनीक का इस्तेमाल किया. पलामू टाइगर रिजर्व के तीन अलग-अलग इलाकों में एआई सिस्टम से लैस कैमरों को लगाया गया है, जबकि अन्य इलाकों में भी पायलट प्रोजेक्ट के तहत एआई कैमरा को इंस्टॉल किया जाएगा.

जल्दी मिलेगी जानकारी

दरअसल गर्मी के दौरान पलामू टाइगर रिजर्व के अलावा कई इलाकों में आग से वन संपदा को नुकसान पहुंचता है. आगजनी की घटना की जानकारी के लिए फिलहाल पलामू टाइगर रिजर्व एवं वन विभाग की टीम फॉरेस्ट सर्वे आफ इंडिया के सेटेलाइट पर निर्भर है. आगजनी की घटना की जानकारी मिलने में कभी-कभी 24 घंटे भी लग जाते हैं. वहीं कई इलाकों से ग्रामीणों एवं वन कर्मियों द्वारा दी गई सूचना से आग की जानकारी मिलती है. पलामू टाइगर रिजर्व में 2024-25 में एआई की योजना पर कार्य शुरू किया गया था.

एआई से आग और हाथी के बारे में मिलेगी जानकारी

पलामू टाइगर रिजर्व शुरुआती चरण में आगजनी की घटना से निपटने के लिए एआई का इस्तेमाल करेगा. बाद में यह वन्य जीव के संरक्षण में बड़ी भूमिका निभाएगा. हाथियों के मूवमेंट की भी जानकारी रियल टाइम में पलामू टाइगर रिजर्व के अधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीणों को मिलेगी. पलामू टाइगर रिजर्व के बरवाडीह, छिपादोहर एवं बेतला के इलाके में एआई तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. शुरुआत में बफर एरिया में एआई तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, बाद में इसका विस्तार पूरे पलामू रिजर्व के इलाके में किया जाएगा. फिलहाल कई इलाकों में ड्रोन से भी निगरानी होती है एवं हाई रेजोल्यूशन कैमरा भी मौजूद है.

पलामू टाइगर रिजर्व एआई और मॉडर्न टूल्स वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन के लिए इस्तेमाल कर रह है. जंगल में लगने वाली आग से बचाव के लिए एआई का इस्तेमाल किया जाएगा. यह पायलटिंग के तहत इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे जंगल में लगने वाली आग की जानकारी रियल टाइम में उपलब्ध हो जाएगी. इसके कई फायदे हैं, फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया पर निर्भरता कम होगी और आग से निपटने के लिए रिस्पांस टाइम कम हो जाएगा. एआई वन्य जीव की मॉनिटरिंग में भी काफी सहायक होगा.- प्रजेशकान्त जेना, उपनिदेशक, पीटीआर

पीटीआर में हर साल घटती है आगजनी की घटना

पलामू टाइगर रिजर्व में प्रतिवर्ष 300 से अधिक आगजनी की घटनाओं को रिकॉर्ड किया जाता है. गर्मी की शुरुआत के साथ-साथ महुआ के सीजन की भी शुरुआत होती है. ग्रामीण महुआ चुनने के लिए जंगलों में आग लगाते हैं, धीरे-धीरे यह आग फैलती जाती है. 2024 में 370 जबकि 2023 में 345 घटनाओं को रिकॉर्ड किया गया था. 2025 में भी आंकड़ा 300 के करीब था जबकि 2022 में यह आंकड़ा 1000 से अधिक था.

पलामू टाइगर रिजर्व करीब 1149 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है जिसके अंतर्गत 200 के करीब गांव मौजूद हैं. आग से निपटने के लिए पलामू टाइगर रिजर्व की स्पेशल टीम को विभिन्न इलाकों में तैनात किया जाता है. सूचना मिलने के बाद यह टीम ग्रामीण एवं ईको डेवलपमेंट समिति के सहयोग से आग पर काबू पाने का प्रयास करती है.

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