खामेनेई की हत्या पर जमात-ए-इस्लामी हिंद का बड़ा बयान: सैयद सदातुल्लाह हुसैनी ने बताया वैश्विक नियमों का खुला उल्लंघन
ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की अमेरिका और इजराइली हमले में मौत हो गई. खामेनेई की मौत पर भारत में मुस्लिम समुदाय के लोगों में खासी नाराजगी है. इस बीच जमात-ए-इस्लामी हिंद के अध्यक्ष सैयद सदातुल्लाह हुसैनी का बयान सामने आया है. उन्होंने इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह सैयद अली खामेनेई की शहादत पर गहरा दुख और संवेदना जाहिर की है. साथ ही तेहरान में हाल ही में हुए अमेरिका और इजराइली सैन्य हमलों की निंदा की है.
जमात-ए-इस्लामी हिंद ने रविवार (1 मार्च) को एक बयान जारी किया, जिसमें अध्यक्ष सैयद सदातुल्लाह हुसैनी ने खामेनेई के निधन पर गहरा दुख और संवेदना व्यक्त की. उन्होंने कहा कि हम ईरान के लोगों
‘खामेनेईमहान हस्ती थे’
सैयद सदातुल्लाह हुसैनी ने कहा कि अयातुल्लाह अली खामेनेई आज की मुस्लिम दुनिया में एक महान हस्ती थे जिनकी लीडरशिप ने तीन दशकों से ज़्यादा समय तक ईरान की राजनीतिक और वैचारिक दिशा को बनाया. उन्होंने कहा कि अयातुल्लाह इमाम रूहुल्लाह खुमैनी के निधन के बाद 1989 में सुप्रीम लीडर का पद संभालने के बाद से खामेनेई मजबूती, आजादी और विदेशी दबदबे के विरोध की निशानी के तौर पर खड़े रहे.
‘खामेनेई की मौत से लाखों लोग दुखी’
हुसैनी ने कहा कि खामेनेई की ज़िंदगी अपने देश की संप्रभुता की रक्षा करने और ईरान की इस्लामिक क्रांति के सिद्धांतों को बनाए रखने के लिए एक गहरी प्रतिबद्धता दिखाती है. उन्होंने कहा कि रमजान के पवित्र महीने में अमेरिका-इजराइली सैन्य हमले में उनकी शहादत ने मुस्लिम दुनिया भर में लाखों लोगों को बहुत दुखी किया है.
‘खामेनेई की हत्या अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन’
सैयद सदातुल्लाह हुसैनी ने कहा कि जिस तरह से अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या हुई हम उसकी कड़ी निंदा करते हैं. उन्होंने कहा कि खामेनेई की हत्या अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है, देश की संप्रभुता पर खुला हमला है, और जानबूझकर किया गया हमला है, जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर और प्रथागत अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत साफ तौर पर निषिद्ध है, जिसके लिए अमेरिका और इजराइल को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने पूरी तरह से जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए.
अमेरिका और इजराइल पर भड़के हुसैनी
उन्होंने कहा कि एक मौजूदा राष्ट्राध्यक्ष की बेरहमी से हत्या को सही ठहराने के लिए बहाने बनाकर अमेरिका और इजराइल ने न सिर्फ युद्ध का एक गैर-कानूनी काम किया है बल्कि अपना दुष्ट स्वभाव भी दिखाया है. उन्होंने कहा कि ऐसे देश जो अंतरराष्ट्रीय नियमों, मानव स्वभाव और बुनियादी सभ्यतागत मूल्यों का सम्मान नहीं करते, उन्हें अलग-थलग कर देना चाहिए और उनके गैर-कानूनी हमले और अंतर्राष्ट्रीय कानून के बार-बार उल्लंघन के लिए सज़ा मिलनी चाहिए.
जमात-ए-इस्लामी हिंद के प्रेसिडेंट ने कहा कि हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील करते हैं कि वो ईरान के खिलाफ और हमले पर विराम लगाने के लिए आगे आएं और इस भयानक तनाव के गंभीर नतीजों का सामना करें. उन्होंने कहा कि उन्हें जवाबदेही तय करनी चाहिए और ईरान पर बिना उकसावे के हमला करने वालों को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के सामने उनके कामों के लिए जवाबदेह ठहराना चाहिए. उन्होंने कहा कि इतने बड़े हमले को अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत सामान्य या नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.उन्होंने कहा कि स्थायी शांति और स्थिरता तभी कायम हो सकती है जब देशों की संप्रभुता का सम्मान किया जाए और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में न्याय सुनिश्चित करने का दृढ़ता से पालन हो.
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