Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Kokrajhar Medical College Update: हॉस्टल का खाना खाने से बिगड़ी 60 छात्राओं की तबीयत, अस्पताल में चल... Varanasi Visitor Statistics: वाराणसी में लगातार बढ़ रहा देश-विदेश के पर्यटकों का आंकड़ा, स्थानीय अर्... Ravi Kishan and Councillor Viral Audio: जल निकासी की समस्या को लेकर सांसद रवि किशन पर भड़के पार्षद, ... Munger Mirzachouki Greenfield Highway: निर्माणाधीन फोरलेन सड़क पर फिर दिखी 50 मीटर लंबी दरार, स्थानी... Bijnor Police Investigation: हरिद्वार घुमाने ले गया और फिर दुपट्टे से घोंट दिया गला, बिजनौर में महिल... Motihari Crime and Police News: शराब पीने के आरोप में पकड़े गए युवक को लाठी से पीटने का वीडियो आया स... LDA Action in Lucknow: सड़क की मरम्मत करने की बजाय चादर और पॉलीथिन से ढंका गया गड्ढा, एलडीए की कार्य... West Bengal News: टीएमसी नेता कुणाल घोष पर 18 घंटे में दूसरी बार हमला, अभिषेक बनर्जी ने राज्यपाल से ... Rajasthan News: राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) चुनाव में सियासी घमासान, अध्यक्ष पद पर आमने-सामने दो... MP Political News: वरिष्ठ नेता तरुण कुमार गोले को मिली बड़ी जिम्मेदारी, मध्य प्रदेश के लिए FCI सलाहक...

Janakpur News: गांव को महामारी से बचाने के लिए अनोखी रस्म, जानें होली से पहले क्यों छोड़ी जाती है मुर्गी

32

मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर: जिले के भरतपुर विकासखंड के जनकपुर क्षेत्र में होली से पहले सदियों पुरानी ‘निकारि’ प्रथा आज भी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है. यह इलाका आदिवासी बहुल है, जहां बैगा समाज की परंपराएं आज भी जीवंत हैं. ग्रामीणों का मानना है कि इस अनुष्ठान से गांव को आपदा और बीमारियों से सुरक्षा मिलती है.

होली से पहले होता है विशेष अनुष्ठान

जनकपुर के पुजारी गरीबा मौर्य ने बताया कि गांव बसने के समय से ही यह परंपरा चली आ रही है. होली से पहले ‘डांग न गढ़ने’ की परंपरा से पूर्व निकारि की जाती है. पहले गांव के बैगा इस प्रथा को निभाते थे, वहीं वर्ष 2006 से गरीबा मौर्य ठाकुर बाबा से जुड़कर इस अनुष्ठान को आगे बढ़ा रहे हैं.

बीमारियों से बचाव की मान्यता

ग्रामीणों के अनुसार, निकारि प्रथा का मुख्य उद्देश्य गांव को हैजा, कॉलरा जैसी गंभीर बीमारियों और अन्य आपदाओं से बचाना है. इस अनुष्ठान के दौरान बैगा द्वारा मुर्गी चराई जाती है. गांव के हर चौक-चौराहे पर यह प्रक्रिया पूरी की जाती है, ताकि नकारात्मक शक्तियां गांव में प्रवेश न कर सकें.

गांव की सीमा के बाहर छोड़ी जाती है मुर्गी

मान्यता है कि अनुष्ठान के बाद मुर्गी को गांव की सीमा पार, नदी के उस पार छोड़ दिया जाता है. इससे किसी भी प्रकार की विपत्ति गांव में प्रवेश नहीं कर पाती. इस मौके पर गांव के सभी टोला-मोहल्लों के लोग मिलकर बैगा को अखत, झाड़ू और पूजन सामग्री देते हैं.

एकजुटता और आस्था का प्रतीक

गरीबा मौर्य का कहना है कि यह केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि गांव की एकता और सामूहिक सुरक्षा का प्रतीक है. ग्रामीणों का विश्वास है कि निकारि प्रथा से गांव में शांति, सुख-समृद्धि और निरोगी जीवन बना रहता है. जनकपुर क्षेत्र में आज भी परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन देखने को मिलता है.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.