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कलयुगी पोते की करतूत: बीमार दादी को अस्पताल में लावारिस छोड़ भागा, अब वृद्ध आश्रम बना नया घर

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विदिशा: मध्य प्रदेश के विदिशा से इंसानियत को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है. ग्राम उमरिया निवासी 70 वर्षीय लक्ष्मीबाई जाटव को लगभग 3 माह पूर्व कमर की हड्डी टूटने के कारण उनके नाती ने विदिशा के अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था. भर्ती के समय उसने अपना पता, मोबाइल नंबर और आधार कार्ड जमा कराया, लेकिन इसके बाद वह अचानक गायब हो गया. यानी लगभग 3 महीने बीतने के बाद भी वह वापस नहीं आया और वृद्धा पूरी तरह लावारिस हो गईं.

मेडिकल कॉलेज के जिम्मेदारों ने मानवता का परिचय देते हुए न केवल लक्ष्मीबाई का इलाज किया, बल्कि लगातार 3 माह तक उनकी सेवा भी की. हालांकि, किसी भी मेडिकल संस्थान के लिए किसी मरीज को जीवनभर रखना संभव नहीं होता हैं. इस परिस्थिति में मेडिकल कॉलेज ने परिजन को खोजने के लिए पुलिस और प्रशासन की मदद ली, लेकिन सभी प्रयास असफल रहे.

महिला को वृद्धा आश्रम में किया शिफ्ट
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. मनीष निगम ने श्री हरि वृद्ध आश्रम की अध्यक्ष इंदिरा शर्मा और संचालक वेद प्रकाश शर्मा से चर्चा की. विचार-विमर्श के बाद कोई अन्य विकल्प न निकलने पर वृद्ध आश्रम ने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए लक्ष्मीबाई को अपने आश्रम में शिफ्ट करने का निर्णय लिया

वृद्ध आश्रम की अध्यक्ष इंदिरा शर्मा ने बताया कि, ”आश्रम में सामान्य चिकित्सा व्यवस्था तो उपलब्ध है, लेकिन इस प्रकार के गंभीर मरीजों की देखभाल बेहद चुनौतीपूर्ण होती है. इसके बावजूद आश्रम की टीम ने लक्ष्मीबाई की सेवा करने का संकल्प लिया है. उन्हें बिस्तर पर ही दैनिक आवश्यकताएं जैसे भोजन, स्नान और शौच आदि की सुविधा प्रदान की जाएगी.”

उपेक्षा और तिरस्कार का शिकार बुजुर्ग
उन्होंने कहा कि, ”एक समय था जब बुजुर्गों की सेवा को सौभाग्य माना जाता था, लेकिन आज कई परिवारों में संवेदनाएं समाप्त होती जा रही हैं. जिन माता-पिता ने अपने बच्चों को पाल-पोसकर बड़ा किया, आज वही बुजुर्ग उपेक्षा और तिरस्कार का शिकार हो रहे हैं. कई मामलों में बच्चे अपने माता-पिता को सड़क या आश्रम के बाहर छोड़कर चले जाते हैं, जो समाज के लिए अत्यंत चिंताजनक स्थिति है.

वेद प्रकाश शर्मा ने बताया कि, ”वर्तमान में वृद्ध आश्रम में एक विशेष केयरगिवर टीम तैयार करने की योजना बना रहे हैं. जिसमें सामाजिक संगठनों, मेडिकल और नर्सिंग कॉलेज के विद्यार्थियों को शामिल किया जाएगा. इसका उद्देश्य लावारिस और असहाय बुजुर्गों की बेहतर देखभाल सुनिश्चित करना है. तीन माह से यह अस्पताल में थी, बुजुर्ग महिला ने जीवन भर मजदूरी की है. इस बुजुर्ग की वृद्धावस्था की कठिन सेवा से परिवार वाले बच रहे हैं.”

अस्पताल प्रबंधन ने सैकड़ों बार उस परिजन से संपर्क किया जो उसे छोड़कर गया था पर निराशा ही हाथ लगी. पोते का नाम अमित जाटव जो इलाज के लिए छोड़कर चला गया और 3 महीने बीत जाने के बाद भी फिर वापस नहीं आया. कहा जाता है कि पुलिस अपराधी को तो पाताल से भी खोज लाती है पर इस बुजुर्ग के परिजन को तो पुलिस भी नहीं खोज पा रही है.

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