युद्ध से बर्बाद हो चुके गाजा में शांति के प्रयास किए जा रहे हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समस्या के समाधान के लिए एक अलग संगठन बोर्ड ऑफ पीस का गठन किया है. 19 फरवरी को इस बोर्ड की पहली मीटिंग हुई जिसमें सऊदी अरब और पाकिस्तान समेत कई देशों ने हिस्सा लिया. भारत को इस बोर्ड का सदस्य बनने के लिए न्योता भेजा गया था लेकिन अभी तक भारत ने उसे स्वीकार नहीं किया है.हालांकि, बोर्ड की पहली मीटिंग में भारत ने संतुलन बनाते हुए अलग रुख अपनाया और ऑब्जर्वर के तौर पर इस मीटिंग का हिस्सा बना. जबकि दूसरी तरफ दुनिया की दो बड़ी ताकतें चीन और रूस ने पूरी तरह से इस बोर्ड से किनारा किया. हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और चीन के भी इसमें शामिल होने की उम्मीद जताई.
किन देशों ने लिया हिस्सा?
अमेरिका की ओर से इस बोर्ड ऑफ पीस संगठन को 10 बिलियन यूएडी देने की घोषणा भी गई है. इस संगठन के कुल 27 देश सदस्य हैं, जिनमें अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अजरबैजान, हंगरी, पाकिस्तान, सऊदी अरब और UAE जैसे देश शामिल हैं. 19 फरवरी को आयोजित की गई इस मीटिंग में करीब 50 देशों और यूरोपियन यूनियन ने अपने अधिकारी भेजे. इस मीटिंग में जर्मनी, इटली, नॉर्वे, स्विट्जरलैंड और यूनाइटेड किंगडम सहित एक दर्जन से ज्यादा देशों ने हिस्सा लिया. वहीं जो यहां पर नहीं आए उन्होंने बतौर ऑब्जर्वर इसका हिस्सा बने.
किन देशों ने हिस्सा नहीं लिया?
अमेरिका की इस बोर्ड ऑफ पीस मीटिंग में फ्रांस, ब्रिटेन, रूस और चीन समेत यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल के खास सदस्य इसमें शामिल नहीं हुए. वहीं भारत का भी रुख खुलकर इसके समर्थन में नहीं रहा. भारत ने संतुलन का रास्ता अपने हुए ऑब्जर्वर के तौर पर इसमें शामिल हुआ.
भारत उन देशों में से था जिसने 22 जनवरी को दावोस में हुए जो बोर्ड ऑफ पीस के समारोह में हिस्सा नहीं लिया था. इस इवेंट में बोर्ड ऑफ पीस का उद्घाटन किया गया था.
‘चीन के साथ मेरे बहुत अच्छे रिश्ते हैं’
डोनाल्ड ट्रंप ने बोर्ड ऑफ पीस मीटिंग में चीन के शामिल होने का भरोसा जताया. उन्होंने कहा कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मेरे बहुत अच्छे रिश्ते हैं. मैं अप्रैल में चीन जा रहा हूं. यह बहुत मजेदार होने वाला है. उन्होंने कहा कि पिछली बार जब मैं चीन गया था, तो राष्ट्रपति शी ने मेरे साथ बहुत अच्छा बर्ताव किया था. ट्रंप ने यह भी कहा कि नया बना बोर्ड ऑफ़ पीस यूनाइटेड नेशंस पर नजर रखेगा, ताकि यह पक्का हो सके कि वह ठीक से काम करे.
ट्रंप के मुताबिक, बोर्ड ऑफ पीस का मकसद इंटरनेशनल झगड़े सुलझाने के तरीकों को मजबूत करना है. ट्रंप का मानना है कि इससे दुनिया भर के संकट से निपटने के लिए सहयोग बढ़ेगा.
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