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RBI का बड़ा मास्टरस्ट्रोक: भारतीय बैंकिंग को मिलेगी नई ऊर्जा, युवाओं के लिए खुलेंगे करियर के हजारों नए द्वार

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देश का बैंकिंग सेक्टर आने वाले दिनों में मजबूती से आगे बढ़ेगा. इसमें नौकरियों के नए अवसर खुलेने की भी संभावना है. दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक ने 14 जनवरी को कहा कि उसने जापान के सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉर्पोरेशन को भारत में पूरी तरह से अपनी कंपनी Wholly Owned Subsidiary खोलने के लिए शुरुआती मंजूरी देने का फैसला किया है.

केंद्रीय बैंक ने बताया कि यह फैसला RBI के 2025 के नियमों के तहत लिया गया है, जो विदेशी बैंकों को भारत में पूरी तरह से स्वामित्व वाली सब्सिडियरी खोलने की अनुमति देते हैं. फिलहाल SMBC भारत में ब्रांच मोड के जरिये काम कर रहा है और इसकी नई दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरु में चार शाखाएं हैं. RBI ने कहा कि बैंक को अपनी मौजूदा शाखाओं को बदलकर भारत में WOS बनाने की शुरुआती मंजूरी दी गई है.

कब मिलेगा लाइसेंस?

RBI ने आगे बताया कि बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 22 (1) के तहत SMBC को WOS के रूप में बैंकिंग कारोबार शुरू करने का लाइसेंस बाद में दिया जाएगा, जब यह तय हो जाएगा कि बैंक ने RBI की ओर से तय की गई सभी शर्तों का पालन कर लिया है. भारत में एक सब्सिडियरी बैंक बनने से SMBC को अपने कामकाज में ज्यादा आजादी और लचीलापन मिलेगा.

भारत को इससे बड़े फायदे होंगे

SMBC जैसी बड़ी जापानी बैंक की सब्सिडियरी से भारत में जापान से निवेश और पूंजी प्रवाह तेज होगा. इसके अलावा भारत-जापान के बीच व्यापार करने वाली कंपनियों को बेहतर फाइनेंस, लोन और ट्रेजरी सेवाएं मिलेंगी साथ ही विदेशी बैंक के लोकल सब्सिडियरी बनने से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और बैंकिंग सेवाओं की गुणवत्ता सुधरेगी. नई शाखाएं खुलने से बैंकिंग और उससे जुड़े क्षेत्रों में नौकरियां बढ़ेंगी. WOS मॉडल से विदेशी बैंक भारत में ज्यादा जवाबदेह होंगे, जिससे सिस्टम ज्यादा सुरक्षित जापानी कंपनियों के भारत में प्रोजेक्ट्स को फंडिंग आसान होगी.

क्या होती है WOS?

Wholly Owned Subsidiary (WOS) वह कंपनी या बैंक होती है, जिसकी पूरी 100% हिस्सेदारी एक ही मूल कंपनी के पास होती है. यह भारत में एक अलग कानूनी इकाई के रूप में काम करती है और स्थानीय कानूनों व नियमों का पालन करती है. WOS मॉडल से कंपनी को कारोबार बढ़ाने, शाखाएं खोलने और फैसले लेने की ज्यादा आजादी मिलती है, जबकि जोखिम मूल कंपनी तक सीमित रहता है.

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