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जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय में डॉ अखिल जैन देंगे व्याख्यान, 5 लाख किसानों को दे चुके हैं निशुल्क प्रशिक्षण

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रायपुर : छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ के मनोहर गौशाला के ट्रस्टी डॉक्टर अखिल जैन मध्य प्रदेश के जबलपुर के कृषि विश्वविद्यालय में 2 दिवसीय व्याख्यान में शामिल होंगे. यह व्याख्यान जबलपुर में 17 और 18 जनवरी को होगा. इसमें मनोहर गौशाला के ट्रस्टी डॉक्टर अखिल जैन आधुनिक संस्कृत में भारतीय गौवंश का महत्व और भारतीय देसी नस्लों की श्रेष्ठता विषय पर अपनी बात रखेंगे.

5 लाख किसानों को दी है ट्रेनिंग

इस व्याख्यान कार्यक्रम में देशभर 100 से अधिक वैज्ञानिक कृषक और पीएचडी करने वाले कृषि के छात्र-छात्राएं भी शामिल होंगे. मनोहर गौशाला की ट्रस्टी पिछले 10 साल से गौ और कृषि को लेकर काम कर रहे हैं. अब तक उनके द्वारा लगभग 5 लाख किसानों को निशुल्क ऑनलाइन और ऑफलाइन प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है.

वैज्ञानिकों के साथ पीएचडी करने वाले छात्र भी करेंगे शिरकत

मनोहर गौशाला के ट्रस्टी डॉक्टर अखिल जैन ने बताया कि जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय में एक प्राचीन संस्कृति का सम्मेलन होना है. जिसमें गाय आधारित कृषि का विशेष महत्व के रूप में एक व्याख्यान माला होगा. इस कार्यक्रम में पूरे भारत के 100 अधिक वैज्ञानिक, लगभग 300 उत्कृष्ट कृषक और कृषि विश्वविद्यालय के स्टूडेंट्स समेत पीएचडी करने वाले छात्र-छात्राएं हिस्सा बनेंगे.

किसलिए किया गया आमंत्रित ?

मनोहर गौशाला की ट्रस्टी डॉ अखिल जैन बताया कि कृषि में गाय के महत्व और प्रकृति को बचाने के लिए हम कार्य कर रहे हैं. धरती बचाने का काम किया जा रहा है. रासायनिक खेती को कम कैसे करें या इससे कैसे बचा जाए. खैरागढ़ के मनोहर गौशाला में फसल अमृत बन रहा है. मनोहर गौशाला में ऑर्गेनिक गोल्ड बन रहा है, जो गाय के गोबर और गोमूत्र से बनाए जा रहे हैं. जो पेटेंट भी है. वर्तमान में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर में रिसर्च चल रहा है. मुझे इन्हीं सब बातों को लेकर व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया गया है.

केमिकल के कारण फल सब्जियां धरती हो रही जहरीली

मनोहर गौशाला के ट्रस्टी डॉक्टर अखिल जैन ने आगे कहा कि मैं हमेशा यही कहूंगा कि धरती को बचाने के लिए गौ आधारित कृषि आधारित होगी तब हमारी गौ माता बचेगी. हमारी संस्कृति बचेगी. धरती के अंदर जो केमिकल या रासायनिक खाद होते हैं वह हमारे फल सब्जी और दूसरे कृषि आधारित उत्पाद में जहर की मात्रा जो आई है उसे कम किया जा सकता है.

पर्यावरण भी जहरीला हो रहा,इससे बचना होगा

अखिल जैन ने बताया कि खैरागढ़ का मनोहर गौशाला पिछले 10 साल से इसी काम को लगातार करते आ रहा है. इन्हीं सब कामों को देखते हुए जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय में उन्हें व्याख्यान के लिए आमंत्रित किया है. हमारा मानव स्वास्थ्य जो वर्तमान स्थिति में लगातार बीमारियों का घर बनता जा रहा है, जो चीज हम खा रहे हैं वह जहरीली होती जा रही है. वायु प्रदूषण हो रहा है. पानी भी जहरीली होती जा रही है. इसके साथ ही हमारा पर्यावरण भी असंतुलित हो रहा है. यह बिल्कुल जग जाहिर चीज है.

गौशाला में तैयार हो रहा फसल अमृत

खैरागढ़ की मनोहर गौशाला में फसल अमृत तैयार किया जा रहा है.फसल अमृत को बनाने में हमें प्रकृति का सहयोग चाहिए. गौ माता का सहयोग चाहिए. गौ माता से हमें गोमूत्र मिलता है.प्रकृति से हमें नीम और सीताफल के पत्तों की जरूरत पड़ती है. इन तीनों को हम 30 दिनों तक धूप यानी सूर्य देवता के सामने रखकर फसल अमृत बनाते हैं.

कैसे इस्तेमाल करते हैं फसल अमृत ?

एक एकड़ खेत में 1 महीने में 1 लीटर फसल अमृत के साथ 10 लीटर पानी में मिलाकर खेतों में छिड़का जाता है. वैज्ञानिकों का प्रमाण है कि ऐसा करने से 25 से 30% रासायनिक उर्वरक की बचत होती है. इसके साथ ही फसल में 10 से लेकर 18% तक ग्रोथ होता है. यह पूरा परीक्षण रायपुर के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में चल रहा है. जिसका व्याख्यान भारत के लगभग 12 राज्यों में जाकर दिया गया है.

इस व्याख्यान के माध्यम से पूरे देश के लगभग 5 लाख किसान इससे लाभान्वित हुए हैं. किसानों को इस तरह का प्रशिक्षण निशुल्क ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों तरीकों से दिया जाता है. यह विषय मेरी रुचि का है. धरती को हमारे मानव स्वास्थ्य को सभी को जहर से मुक्त करें. अपने आप को स्वस्थ्य उन्नत भारत की तरफ लेकर जाए.

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