Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Bathinda Clash: किसान नेताओं की रिहाई पर पंजाब में बवाल, पुलिस ने दागे आंसू गैस के गोले Himachal Crime: 'बेरोजगार, ऊपर से बीवी की कमाई...', ताने से भड़के पति ने पत्नी का गला रेता, फिर की ख... Supreme Court on Disability Pension: 'रोज 10 बीड़ी पीने से आया स्ट्रोक', पूर्व सैनिक की याचिका खारिज Punjabi Wedding Viral Video: क्या शादी में सच में उड़ाए 8 करोड़? जानिए नोटों की बारिश का सच Delhi Crime: 'पापा मुझे बचा लो...', बेटे की गुहार सुनकर दौड़े पिता को हमलावरों ने मारी गोली, मौत Shivpal Yadav on Brajesh Pathak: चोटी विवाद पर शिवपाल का डिप्टी सीएम पर वार, बोले- पाप तो आपको भी लग... Vaishno Devi Ropeway Protest: कटरा में भारी बवाल, बाजार बंद और होटलों के बाहर लगे विरोध के पोस्टर India's Fastest Metro: भारत की सबसे तेज मेट्रो की रफ्तार ने चौंकाया, अब घंटों का सफर मात्र 30 मिनट म... India AI Impact Summit 2026: बिहार में तकनीक का नया दौर, राज्य सरकार ने ₹468 करोड़ के MoU पर किए हस्... Mamata Banerjee vs EC: "चुनाव आयोग की हिम्मत कैसे हुई?" सुप्रीम कोर्ट के नियमों के उल्लंघन पर भड़कीं...

DDA ने अरावली रोड प्रोजेक्ट को लेकर किया सुप्रीम कोर्ट का रुख, पेड़ों की कटाई की मांगी इजाजत

6

दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने अरावली रेंज क्षेत्र में सड़क निर्माण के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. DDA ने SC में याचिका दायर कर 473 पेड़ों को काटने या दूसरी जगह स्थानांतरित करने और 2,519 छोटे पौधों को हटाकर अन्य किसी दूसरे स्थान पर लगाने की अनुमति मांगी है.

यह सड़क CAPFIMS (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल चिकित्सा विज्ञान संस्थान), केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के लिए बने अस्पताल तक पहुंच आसान बनाने के उद्देश्य से प्रस्तावित है. DDA के अनुसार, सड़क निर्माण के लिए मॉर्फोलॉजिकल रिज के 0.79 हेक्टेयर क्षेत्र में काम किया जाएगा, जबकि कुल 2.97 हेक्टेयर वन भूमि के उपयोग की अनुमति मांगी गई है. प्राधिकरण का कहना है कि पहले इस परियोजना के लिए 3.6 हेक्टेयर वन भूमि की जरूरत बताई गई थी, लेकिन पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के प्रयासों के तहत अब इस आवश्यकता को घटाया गया है.

3.68 हेक्टेयर भूमि पर नए पेड़ लगाए जाएंगे

DDA ने बताया है कि पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के तौर पर द्वारका के धूलसिरास इलाके में 3.68 हेक्टेयर भूमि पर नए पेड़ लगाए जाएंगे. प्राधिकरण का दावा है कि परियोजना को इस तरह डिजाइन किया गया है ताकि कम से कम वन क्षेत्र प्रभावित हो और हरित आवरण का संतुलन बना रहे.

पुराने निर्देशों को SC ने किया स्थगित

इससे पहले 29 दिसंबर को अरावली पहाड़ियों की परिभाषा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने निर्देशों को स्थगित कर दिया था. कोर्ट ने कहा था कि यह एक संवेदनशील मुद्दा है और इस पर और स्पष्टता की जरूरत है, क्योंकि विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट और कोर्ट की टिप्पणियों की अलग-अलग व्याख्याएं की जा रही हैं.

तीन जजों की बेंच कर रही सुनवाई

इस मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन जजों की पीठ (जिसमें जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एजी मसीह भी शामिल हैं) ने की. बेंच ने स्वप्रेरित याचिका ‘अरावली पहाड़ियों और श्रेणियों की परिभाषा एवं संबद्ध मुद्दे’ में नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई 21 जनवरी को तय की है.

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में स्पष्ट किया कि जब तक एक नई उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन नहीं हो जाता, तब तक पहले की समिति की सिफारिशें और कोर्ट के पुराने निर्देश लागू नहीं होंगे. कोर्ट का मानना है कि किसी भी अंतिम फैसले से पहले वैज्ञानिक, पर्यावरणीय और भू-वैज्ञानिक पहलुओं की समग्र समीक्षा आवश्यक है.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.