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HC ने दुर्घटना में जान गंवाने वाले युवक के परिवार का मुआवजा बढ़ाकर किया 22.94 लाख, जानें पूरा मामला

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चंडीगढ़ : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मोटर वाहन दुर्घटना में मृत युवक शाकिर उर्फ मोहम्मद शाकिर के परिजनों को दिए गए मुआवजे को बढ़ाते हुए अहम टिप्पणी की है कि मुआवजा निर्धारण कोई यांत्रिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि पीड़ित परिवार को न्यायसंगत और यथोचित राहत देने का माध्यम है। जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने नूंह स्थित मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के 5 अप्रैल 2024 के मुआवजा आदेश में – संशोधन करते हुए कुल मुआवजा – राशि 18 लाख 16 हजार 48 रुपए से बढ़ाकर 22 लाख 94 हजार 300 = रुपए कर दिया है। इस प्रकार पीडित परिवार को 4 लाख 78 हजार 252 रुपए की अतिरिक्त राशि देने के – आदेश दिए गए हैं।

29 दिसम्बर 2018 को हुई सड़क दुर्घटना में शाकिर की मौत हो गई थी। परिजनों ने मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 166 के तहत मुआवज की मांग की थी। ट्रिब्यूनल ने मृतक की आय को अकुशल श्रमिक मानते हुए मुआवजा तय किया था, जिसे हाईकोर्ट ने अपर्याप्त माना। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि रिकार्ड पर मौजूद मृतक का ड्राइविंग लाइसेंस यह दर्शाता है कि वह कुशल चालक था। ऐसे में उसकी आय का आंकलन अकुशल श्रमिक की बजाय कुशल श्रमिक के न्यूनतम वेतन के आधार पर किया जाना चाहिए था। अदालत ने हरियाणा सरकार द्वारा अधिसूचित न्यूनतम मजदूरी के आधार पर मृतक की मासिक आय 9 हजार 887 रुपए 99 पैसे मानते हुए इसे व्यावहारिक रूप से 10 हजार रुपए रुपए प्रतिमाह स्वीकार किया।

अदालत ने यह भी कहा कि भविष्य की संभावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इस आधार पर 40 प्रतिशत भविष्यगत वृद्धि जोड़ते हुए व्यक्तिगत खर्च के रूप में एक-चौथाई कटौती की गई और मृतक की आयु 32 वर्ष होने के कारण 16 का मल्टीप्लायर लागू किया गया। इसके अतिरिक्त, संपत्ति हानि, अंतिम संस्कार खर्च और भावनात्मक (वैवाहिक पैतृक) के मदों में भी बढ़ोतरी की गई। हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह 2 माह के भीतर बढ़ी हुई राशि ट्रिब्यूनल में जमा करे, जिसे बाद में पीड़ित परिजनों के बैंक खातों में वितरित किया जाएगा।

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