Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Bhopal Crime News: ट्रेन पकड़कर दिल्ली भागा आरोपी केयरटेकर, मध्य प्रदेश से लेकर पंजाब तक पुलिस की 12... Amit Shah Tour Security: रात 8 बजे से सामान्य वाहनों के लिए भी लागू होंगे वैकल्पिक मार्ग, एंबुलेंस क... Indore News Today: कनाड़िया थाना क्षेत्र में सड़क हादसा, स्कॉर्पियो और कार की टक्कर में निखिल नंदी क... Bhopal Cyber Fraud News: राजधानी में साइबर ठगी का तांडव, 24 घंटे के भीतर 25 मामलों में उड़े 15 लाख र... Middle East Aviation Update: सऊदी अरब में इमरजेंसी लैंडिंग के बाद बंधा मिला आरोपी को-पायलट, यूएई ट्र... CJP Protest Jantar Mantar: दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था सख्त, DMRC और ट्रैफिक पुलिस ने जारी किए जरूरी... No PUC No Fuel Rule Delhi: 1 अक्टूबर से लागू हुआ नया नियम, सीएम रेखा गुप्ता और मनजिंदर सिंह सिरसा का... October Weather Update: उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक झमाझम बारिश के आसार, केरल में जारी किया गया ऑरे... ED Officers SC ST Act Case Ranchi: हाईकोर्ट ने जवाब दाखिल करने के लिए मांगा समय, 2 नवंबर को होगी अगल... Jharkhand Food Department Guidelines: अवैध एलपीजी उपयोग रोकने के लिए जिला प्रशासन और तेल कंपनियों मे...

बिहार में NDA की रिकॉर्ड जीत, महिलाओं की भारी भागीदारी बनी गेमचेंजर

165

बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों ने एक बार फिर दिखा दिया है कि सामाजिक समीकरण, मजबूत चुनावी रणनीति और साफ नेतृत्व जनता के मन पर गहरा असर डालते हैं. एनडीए की Sweeping जीत किसी एक कारण से नहीं, बल्कि कई पहलुओं के सही समय पर एक साथ आने का नतीजा रही. सबसे बड़ा और साफ संकेत महिलाओं की भारी भागीदारी से मिला. इस बार राज्य के कई जिलों में महिलाओं ने पुरुषों से कहीं अधिक मतदान किया.

सात जिलों में महिलाओं ने पुरुषों से चौदह प्रतिशत या उससे भी ज्यादा ज्यादा मतदान किया. किशनगंज में यह अंतर सबसे ज्यादा उन्नीस दशमलव पांच प्रतिशत रहा. इसके बाद मधुबनी में अठारह दशमलव चार प्रतिशत, गोपालगंज में सत्रह दशमलव बहत्तर प्रतिशत, अररिया में चौदह दशमलव तैंतालीस प्रतिशत, दरभंगा में चौदह दशमलव इकतालीस प्रतिशत और मधेपुरा में चौदह दशमलव चौबीस प्रतिशत दर्ज किया गया.

महिलाओं की भारी भागीदारी से मिली जीतइसी तरह कई अन्य जिलों में भी महिलाओं ने दस प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ मतदान किया. इनमें सिवान, पूर्णिया, शिवहर, सीतामढ़ी, सहरसा, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, खगड़िया, समस्तीपुर और बांका शामिल हैं. महिलाओं और अति पिछड़े वर्गों तक पहुंचने वाली योजनाओं, दस हजार रुपये की नकद सहायता और जीविका दीदी जैसी योजनाओं ने महिलाओं में भरोसे की मजबूत जमीन तैयार की. नीतीश कुमार का लंबे समय से महिलाओं के सशक्तिकरण पर फोकस भी इस समर्थन को स्थायी बनाता गया.

इसके साथ ही एनडीए ने एक मजबूत जातीय गठजोड़ खड़ा किया. परंपरागत सवर्ण मतदाता उसके साथ बने रहे. ओबीसी, ईबीसी और दलित समुदायों का बड़ा हिस्सा भी इस गठजोड़ में शामिल हो गया. यह व्यापक सामाजिक मिश्रण विपक्ष की जातीय गणित पर भारी पड़ा.

एनडीए ने चुनाव प्रबंध मजबूत किया

साल 2020 के चुनाव में दिखी कमियों से सीख लेकर एनडीए ने इस बार अपने चुनाव प्रबंधन को काफी मजबूत किया. सहयोगी दलों के बीच बेहतर तालमेल, स्पष्ट संदेश और बूथ स्तर पर कुशल प्रबंधन हर जगह दिखा. बीजेपी, जेडीयू, लोजपा, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल ने पूरे अभियान को और संगठित रूप दिया.

इसके उलट महागठबंधन का चेहरा बिखरा हुआ दिखा. कई सीटों पर आपसी मुकाबला और वोट ट्रांसफर में कमी साफ नजर आई. एकजुट रणनीति के अभाव ने विपक्ष को कमजोर कर दिया. इसका सीधा फायदा एनडीए को मिला. महागठबंधन अपने पारंपरिक मुस्लिम-यादव वोट बैंक को भी पूरी तरह नहीं जोड़ पाया. सीमांचल में एआईएमआईएम के प्रदर्शन ने मुस्लिम वोटों में बंटवारा कर दिया. इससे महागठबंधन को अपने मजबूत क्षेत्रों में भी नुकसान हुआ. यादव वोटों में भी बिखराव दिखा और एक हिस्सा राजद की मूल आधार से अलग होकर अन्य विकल्पों की ओर बढ़ा.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.