Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
बालाघाट में घर में घुसकर सो रही महिला को उठा ले गया बाघ: कान्हा बफर जोन में दिल नहला देने वाला हादसा... पन्ना में दर्दनाक हादसा: 9 माह की गर्भवती महिला और अजन्मे बच्चे की मौत, एनीमिया बनी वजह; पति पर लापर... इंदौर ने नम आंखों से दी वीर सपूत को अंतिम विदाई, मेजर हमजा आरिफ सैन्य सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक ग्वालियर में गुमशुदा तोते 'शकुंतला' के लिए 50 हजार का इनाम: ढोल-लाउडस्पीकर से तलाश में जुटा ओझा परिव... इंदौर में महज 7 दिन में टूटा शादी का बंधन, फैमिली कोर्ट ने तलाक की अर्जी को दी मंजूरी रतलाम में एग्रीमेंट वाली शादी का खौफनाक अंत: 3rd फ्लोर से रस्सी के सहारे भाग रही थी 23 साल की दुल्हन... छतरपुर में हॉस्टल की बड़ी लापरवाही! छत फांदकर एक साथ भागे 3 छात्र; मचा हड़कंप, परिजनों के उड़े होश गोरखपुर में दिल दहला देने वाली घटना, बहन से छेड़छाड़ का विरोध करने पर 9 वर्षीय मासूम की पीट-पीटकर हत... Vपप्पू यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस में हंगामा: चाकू लेकर पहुंचा युवक, समर्थकों ने दबोचा; सांसद बोले— 'म... Solar Eclipse 2027: 75 साल बाद सऊदी अरब में दिखेगा पूर्ण सूर्य ग्रहण, 21वीं सदी की सबसे बड़ी खगोलीय ...

नाबालिग की हिरासत में पिटाई और यौन उत्पीड़न का मामला, SC का सुनवाई से इनकार, हाई कोर्ट जाने का निर्देश

26

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (15 सितंबर) को गुजरात पुलिस द्वारा 17 साल के नाबालिग लड़के के कथित यौन उत्पीड़न और हिरासत में पिटाई के आरोपों पर दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को गुजरात हाई कोर्ट जाने की सलाह दी है.

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने याचिकाकर्ता के प्रति सहानुभूति जताई और याचिकाकर्ता के वकील से सवाल किया कि आपने हाई कोर्ट का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाया?. बेंच ने कहा ‘हमें आपसे पूरी सहानुभूति है, लेकिन आपने हाईकोर्ट का रुख क्यों नहीं किया?’. कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट से राहत मांगी जा सकती है.

पीड़ित की बहन का आरोप

पीड़ित की बहन की तरफ से दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि 18 अगस्त को गुजरात ते बोटाद कस्बे की पुलिस ने लड़के को सोना और कैश चोरी के शक में उठाया और 19 से 28 अगस्त तक हिरासत में रखा. इस दौरान पुलिसकर्मियों ने उसके साथ न सिर्फ बेरहमी से मारपीट की बल्कि उसका यौन शोषण भी किया.

‘पुलिस ने नहीं कराई मेडिकल जांच’

याचिका में दावा किया गया कि लड़के को हिरासत में लिए जाने के 24 घंटे के भीतर न तो किशोर न्याय बोर्ड और न ही मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया. इसमें कहा गया है कि हिरासत में लेने के बाद पुलिस ने उसकी मेडिकल जांच भी नहीं कराई. इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS), पोक्सो अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कर स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई.

सीबीआई जांच कराने की मांग

याचिकाकर्ता ने गुजरात कैडर के अधिकारियों को छोड़कर विशेष जांच दल (SIT) गठित करने या वैकल्पिक रूप से कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच कराने की मांग की. इसके अलावा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), दिल्ली से मेडिकल बोर्ड बनाकर पीड़ित की चोटों की जांच करने का निर्देश देने की गुहार भी लगाई.

‘ऐसी मांगों पर हाई कोर्ट भी विचार कर सकता’

हालांकि बेंच ने कहा कि ऐसी मांगों पर हाई कोर्ट भी विचार कर सकता है. जब वकील ने तर्क दिया कि यह मुद्दा पूरे देश में नाबालिगों की पुलिस हिरासत में यातना से जुड़ा है, तो अदालत ने कहा, ‘आप हाईकोर्ट जाइए, अगर हाईकोर्ट आपके मामले पर विचार नहीं करता है तो वापस आइए। हम आपकी याचिका पर गौर करेंगे’.

याचिकाकर्ता ने बोटाद थाने की सीसीटीवी फुटेज नष्ट होने की आशंका भी जताई. इस पर बेंच ने कहा, ‘यदि आप समय से हाई कोर्ट जाएंगे तो फुटेज नष्ट नहीं होगा’. इसके बाद कोर्ट ने याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.