Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
बालाघाट में घर में घुसकर सो रही महिला को उठा ले गया बाघ: कान्हा बफर जोन में दिल नहला देने वाला हादसा... पन्ना में दर्दनाक हादसा: 9 माह की गर्भवती महिला और अजन्मे बच्चे की मौत, एनीमिया बनी वजह; पति पर लापर... इंदौर ने नम आंखों से दी वीर सपूत को अंतिम विदाई, मेजर हमजा आरिफ सैन्य सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक ग्वालियर में गुमशुदा तोते 'शकुंतला' के लिए 50 हजार का इनाम: ढोल-लाउडस्पीकर से तलाश में जुटा ओझा परिव... इंदौर में महज 7 दिन में टूटा शादी का बंधन, फैमिली कोर्ट ने तलाक की अर्जी को दी मंजूरी रतलाम में एग्रीमेंट वाली शादी का खौफनाक अंत: 3rd फ्लोर से रस्सी के सहारे भाग रही थी 23 साल की दुल्हन... छतरपुर में हॉस्टल की बड़ी लापरवाही! छत फांदकर एक साथ भागे 3 छात्र; मचा हड़कंप, परिजनों के उड़े होश गोरखपुर में दिल दहला देने वाली घटना, बहन से छेड़छाड़ का विरोध करने पर 9 वर्षीय मासूम की पीट-पीटकर हत... Vपप्पू यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस में हंगामा: चाकू लेकर पहुंचा युवक, समर्थकों ने दबोचा; सांसद बोले— 'म... Solar Eclipse 2027: 75 साल बाद सऊदी अरब में दिखेगा पूर्ण सूर्य ग्रहण, 21वीं सदी की सबसे बड़ी खगोलीय ...

न सड़क, न एंबुलेंस… मरीज को कंधे पर उठाकर ले गए परिजन, वेंटिलेटर पर छत्तीसगढ़ का हेल्थ सिस्टम!

28

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां बीमार व्यक्ति को इलाज के लिए परिजन उसे एंबुलेंस या फिर किसी गाड़ी में नहीं, बल्कि कंधे पर उठाकर कई किलोमीटर दूर अस्पताल तक ले जाते हुए दिखाई दिए हुए हैं. इसका एक वीडियो भी सामने आया है, जिसने शासन-प्रशासन के सभी दावों की पोल खोलकर रख दी है. एक तरफ दावा किया जा रहा है कि 21वीं सदी का भारत विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर हैं. वहीं, दूसरी तरफ लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए भी लंबा संघर्ष करना पड़ा रहा है.

मामला सरगुजा जिले के प्रतापपुर इलाके के गोरगी गांव का है. यहां दुर्गम वनांचल क्षेत्र में रहने वाला कोडाकु जनजाति का एक व्यक्ति बीमार हो गया. धीरे-धीरे उसकी हालत बिगड़ती चली गई. बात यहां तक पहुंच गई कि अब तो इलाज के लिए अस्पताल ले जाना ही होगा. हालांकि, गांव में सड़कें नहीं होने के चलते बीमार आदमी को बिना एंबुलेंस की मदद के ही अस्पताल पहुंचाया गया. पीड़ित को परिजन अपने कंधे पर उठाकर ले गए.

मरीज को कंधे पर ले जाने को मजबूर परिजन

कंधे पर अपने मरीज को ले जाते हुए परिजन पसीने से लथपथ हालत में थे. उनके हाथ कांप रहे थे. हालांकि, इस बीच एक उम्मीद उन्हें हिम्मत दे रही थी. वो उम्मीद जल्द अस्पताल पहुंचने और समय रहते इलाज मिलने की थी. यह दुर्दशा किसी एक व्यक्ति या फिर समाज की नहीं है, बल्कि उन हजारों-लाखों लोगों की है, जो कि आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं. इस घटना ने सभी को झकझोर कर रख दिया है.

प्रशासन की लापरवाही से लोग परेशान

प्रतापपुर का यह मामला प्रशासन की एक बड़ी लापरवाही है, जिसके चलते कई गांवों के लोग काफी परेशानियों का सामना कर रहे हैं. इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक लोगों को इन समस्याओं से जूझना पड़ेगा और कब तक गांव वालों को अपनी जान बचाने के लिए इस तरह की अमानवीय परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा?

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.