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बाढ़ की चपेट में पंजाब के ये गांव! हुई भारी तबाही, NDRF टीमों ने संभाला मोर्चा

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सुल्तानपुर लोधी : मंड क्षेत्र के 16 गांवों में ब्यास नदी के बढ़ते जलस्तर से मची तबाही की खबर ‘रोजाना पंजाब केसरी’ द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद हरकत में आए प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित लोगों को मंड बाऊपुर पुल से लेकर चिकित्सा सुविधाएं, राशन सामग्री, पशुओं के लिए हरा चारा, चिकित्सा सुविधाएं समेत तमाम सुविधाएं मुहैया कराने का दावा किया है, लेकिन इसके बावजूद इन बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग इस बात से बेहद नाराज भी हैं कि ये सुविधाएं बाढ़ पीड़ितों तक नहीं पहुंच पाई हैं।

लगातार बढ़ते जलस्तर ने पहले फसलों और अब घरों को भी अपनी चपेट में लेकर चारों तरफ तबाही की कहानी लिख दी है। 15 दिनों से भी ज्यादा समय से बाढ़ से जूझ रहे इन गांवों की ओर या तो सरकार का कोई ध्यान नहीं है या फिर ये एक ही जगह पर ध्यान केंद्रित कर मीडिया के जरिए खबरें भेजकर अपना गुजारा कर रहे हैं। मंड के लोगों का कहना है कि सरकार या प्रशासन को हमारे लोगों की तकलीफों की कोई परवाह नहीं है, बस लोगों की नजरों में खुद को बचाना है। उन्होंने कहा कि अब जब पानी सिर से ऊपर गुजर गया है, तो प्रशासन ने सुविधाएं देनी शुरू कर दी हैं और सरकार के मंत्रियों के दौरे भी शुरू हो गए हैं। अगर सरकार या प्रशासन ने पहले उचित व्यवस्था की होती, तो ऐसी स्थिति से बचा जा सकता था।

बाढ़ से घिरे कुछ गांवों के लोगों ने सरकार और प्रशासन पर कोई कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है। बाढ़ से घिरे कुछ गांवों खिजरपुर, चौधरीवाल, मोहम्मद आलम खान, महिवाल, शेरपुर, मंड धुंदा, मंड प्रतापपुरा के बाढ़ प्रभावित लोगों, किसान नेता अमर सिंह मंड, हरनेक सिंह, सुखदेव सिंह, हरदीप सिंह, वजीर सिंह ने कहा कि मंड बाऊपुर जदीद के पास तटबंध टूटने से पूरा इलाका पानी की चपेट में आ गया है। हर तरफ पानी ही पानी है। हमारी सारी फसलें डूब कर बर्बाद हो गई हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन की किसी भी संस्था की ओर से जो भी राहत सामग्री भेजी जाती है, वह मंड बाऊपुर जदीद पुल से होकर जाती है। उन्होंने कहा कि 11 दिन से हमारे गांवों में न तो कोई प्रशासनिक अमला पहुंचा है और न ही किसी अधिकारी ने हमारी सुध ली है। उन्होंने कहा कि फसल पहले से भी ज्यादा खराब हो गई है। लेकिन भगवंत मान सरकार का कोई भी मंत्री या नेता हमारी सुध लेने नहीं पहुंचा। उन्होंने कहा कि पंजाब में पहले भी जितनी भी सरकारें आई हैं, चाहे वह अकाली दल की सरकार रही हो या कांग्रेस की, हर सरकार ने हमें मुआवजा जरूर दिया है। अगर सरकार अभी तक 2023 का मुआवजा नहीं दे पाई है, तो अब उससे क्या उम्मीद की जा सकती है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से अपील की कि हमारे गांवों की सुध ली जाए और प्रशासन व अधिकारियों को आदेश देकर हमें राहत दी जाए और हमारी फसलों की सफाई करवाकर मुआवजा दिलाया जाए। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों के घर भी गिर गए हैं और उनमें कुछ भी नहीं बचा है। सरकार को उनकी सुध लेनी चाहिए।

प्रशासन की ओर से हर सुविधा मुहैया करवाई जाएगी

डी.सी. कपूरथला अमित पांचाल, एडीसी नवनीत कौर बल्ल ने कहा कि प्रशासन बाढ़ प्रभावित परिवारों को हर सुविधा मुहैया करवा रहा है। एस.डी.आर.एफ. की टीमें लोगों को रेस्क्यू कर उन्हें घरों से सुरक्षित बाहर निकाल रही हैं और जरूरी सामान भी पहुंचा रही हैं। उन्होंने बताया कि इसके अलावा, हमारी मेडिकल टीमें भी गांव-गांव जाकर लोगों की देखभाल कर रही हैं और जरूरतमंदों को दवाइयां दी जा रही हैं। पशुओं के लिए हरा चारा, अचार और अन्य सामान के अलावा, पशु चिकित्सक भी पशुओं की देखभाल के लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी भी तरह की कोई कमी है, तो उसे भी दूर किया जाएगा।

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