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यमुनानगर में बाढ़ की चपेट में आए 30 गांव, मिनटों का सफर घंटों में तय करने को मजबूर ग्रामीण

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यमुनानगर : यमुनानगर जिले का घाड़ क्षेत्र जो सुविधाओं के मामले में पूरे जिले में सबसे पिछड़ा हुआ है। मानसून सीजन में यह समस्या उस वक्त ग्रामीणों का दर्द बन जाती है जब बोली नदी पर पुल न होने की वजह से करीब 30 गांव की कनेक्टिविटी टूट जाती है। हालांकि फिलहाल तो प्री मानसून की बारिश हुई है और बोली नदी में दो बार पानी आ चुका है।

मोहिद्दीनपुर, जैतपुर और इब्राहिमपुर समेत कई गांव के लोगों को अगर बोली नदी पार करके नगली गांव की तरफ जाना हो तो मानसून सीजन में एक किलोमीटर का सफर 10 किलोमीटर लंबा तय करना पड़ेगा। क्योंकि बोली नदी पर आज तक पुल नहीं बना है। करीब 30 गांव के लोग डीसी से लेकर स्थानीय विधायक और बदलती सरकार तक अपनी गुहार लगा चुके हैं लेकिन उनकी मांग को हर बार अनसुना किया जाता है। यही वजह है कि मानसून सीजन के दौरान उनकी पीड़ा उभरकर सामने आती है। मजबूरन अगर उन्हें दूसरे गांव जाना हो तो उनको लंबा सफर तय करना पड़ेगा या फिर बोली नदी में जलस्तर जब कम होगा तो उन्हें जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ेगी।

ग्रामीण रशीद, हाफिज और जुलफ़ान ने कैमरे के सामने अपना दुख बयां किया। ग्रामीणों ने बताया कि हमने जब से होश संभाला है हम तब से अब तक यही हालात देख रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वोट मांगने के लिए नेता गांव में भी आते हैं और पुल बनाने का आश्वासन भी देते हैं लेकिन विधायक बनने के बाद वह सब कुछ भूल जाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे में अगर हमें आपातकालीन सेवाएं चाहिए तो वह हमें नहीं मिल पाती। हम प्रशासन और सरकार से गुजारिश करते हैं की बोली नदी पर एक पुल बनाया जाए ताकि गांव की कनेक्टिविटी आपस में हो सके लोग पुल के जरिए अपना सफर आसान कर सके।

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