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27 साल पुराना कनेक्शन… कौन हैं स्वामी महाराज, जिन्होंने अबू धाबी में हिन्दू मंदिर बनाने का विचार रखा था?

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अयोध्या में 22 जनवरी को श्रीराम जन्मभूमि पर बन रहे मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा प्रभु श्रीराम के बालरूप के रूप में की जा चुकी है, जिसने सारी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा. अब एक और मंदिर दुनिया भर के लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है. यह मंदिर इसलिए भी खास है, क्योंकि यह एक मुस्लिम खाड़ी देश संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में बना है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यानी 14 फरवरी को कर रहे हैं.

इस मंदिर के निर्माण पर 700 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, जिसका सपना BAPS स्वामीनारायण संस्था के मुखिया महंत स्वामी महाराज ने देखा था. क्या आप जानते हैं कि धर्मगुरु महंत स्वामी महाराज कौन हैं, आइए उनके बारे में कुछ रोचक तथ्य जान लेते हैं.

जबलपुर में हुआ था स्वामी महाराज का जन्म

बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था यानी बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था के छठवें आध्यात्मिक गुरु महंत स्वामी महाराज का जन्म 13 सितंबर 1933 को मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में हुआ था. उनके पिता का नाम मणिभाई नारायणभाई पटेल और माता का नाम दहिबेन है. उनके जन्म के कुछ समय बाद ही मणिभाई के घर स्वामी नारायण संस्था के शास्त्रीजी महाराज जबलपुर आए थे. उन्होंने ही मणिभाई के नवजात बेटे को नाम दिया था केशव.

घर के आध्यात्मिक माहौल का पड़ा असर

मूलतः गुजरात में आणंद के रहने वाले मणिभाई व्यापार के लिए जबलपुर आए और वहीं बस गए थे. उनके घर का माहौल काफी आध्यात्मिक था, जिसका असर बालक केशव पर भी पड़ा. माता-पिता संतों का आदर करते और सत्संग में हिस्सा लेते थे. इससे केशव काफी प्रभावित रहते थे.

योगीजी महाराज ने दी थी दीक्षा

केशव ने जबलपुर में स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद एग्रीकल्चर साइंस में स्नातक किया. आध्यात्मिकता की ओर झुकाव के कारण वह ब्रह्मस्वरूप शास्त्रीजी महाराज के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी योगीजी महाराज के संपर्क में आ गए और अध्यात्म की राह पर ही आगे बढ़ते गए.

साल 1957 में योगीजी महाराज ने केशव को सदस्य दीक्षा दी, जिसके बाद उन्होंने अक्षरधाम मंदिर के निर्माण के दौरान सेवाएं दीं. उनका पूरा नाम है स्वामी केशवजीवनदासजी, लेकिन प्रेम से दुनिया भर के भक्त उन्हें महंत स्वामी महाराज कहते हैं. उन्होंने प्रवचन करने शुरू किए तो बड़ी संख्या में भक्त उनसे प्रभावित होते गए.

कौन थे स्वामीनारायण संप्रदाय के संस्थापक?

स्वामीनारायण संप्रदाय की स्थापना सहजानंद स्वामी ने की थी. जिन्हें घनश्याम पांडे और स्वामीनारायण के नाम से भी जाना गया. भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में 1781 में जन्मे स्वामीनारायण की महानता के कारण उन्हें लोग भगवान मानते थे. उन्होंने भारत का भ्रमण किया. दुनियाभर में प्रसिद्धी हासिल की. उनके बाद अलग-अलग गुरुओं को उत्तराधिकारी बनाया गया.स्वामीनारायण संस्था के प्रमुख स्वामी महाराज ने 20 जुलाई 2012 को महंत स्वामी महाराज को अपना उत्तराधिकारी यानी छठवां आध्यात्मिक गुरु घोषित किया था. इसके बाद महंत स्वामी महाराज के नेतृत्व में बीएपीएस संस्था ने देश ही नहीं, दुनिया के कई देशों में कई स्वामीनारायण मंदिर बनवाए.

1997 में पहली बार रखा था विचार

यह साल 1997 की बात है, महंत स्वामी महाराज संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा पर गए थे. तभी उन्होंने अबू धाबी में स्वामीनारायण मंदिर की स्थापना का विचार व्यक्त किया था, जिसके जरिए अलग-अलग देशों, संस्कृतियों और धर्मों के बीच एकता को बढ़ावा दिया जा सके. इसके सालों बाद संयुक्त अरब अमीरात की सरकार ने मंदिर के लिए जमीन आवंटन की घोषणा 2015 में की थी.

भारत और यूएई के बीच दोस्ताना संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए खुद अबू धाबी के क्राउन प्रिंस और यूएई के सशस्त्र बलों के उप सर्वोच्च कमांडर शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने इस मंदिर के लिए 13.5 एकड़ जमीन दान की थी.

2019 में हुआ था मंदिर का शिलान्यास

साल 2018 की फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूएई में थे, तभी बीएपीएस के प्रतिनिधियों और वहां की सरकार के बीच मंदिर निर्माण के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे. 20 अप्रैल 2019 को इसका शिलान्यास हुआ, जिसमें महंत स्वामी महाराज के साथ ही भारत और यूएई के तमाम गणमान्य लोग मौजूद थे. वहां अब 27 एकड़ में फैला मिडिल ईस्ट का पहला हिंदू मंदिर बन गया है.

सात अमीरात के प्रतीक हैं मंदिर के सातों शिखर

32.92 मीटर यानी करीब 108 फुट ऊंचे, 79.86 मीटर यानी 262 फुट लंबे और 54.86 मीटर यानी 180 फुट चौड़े इस मंदिर का निर्माण प्राचीन हिंदू ग्रंथों में बताए गए शिल्प शास्त्र के आधार पर किया गया है. बताया जा रहा है कि एक साथ 10 हजार लोगों की क्षमता वाला यह मंदिर पश्चिम एशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर होगा. इस मंदिर के अंदर सात मंदिर और सात शिखर हैं जो सात अमीरात के प्रतीक बताए जा रहे हैं.

दुनिया भर में फैले हैं मंदिर

बीएपीएस की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार दुनिया भर में संस्था के 1100 से ज्यादा मंदिर और 3850 से ज्यादा सेंटर हैं. संस्था का अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय अहमदाबाद में है. अमेरिका के तो कई शहरों में संस्था की ओर से मंदिर बनवाए गए हैं और इसके सेंटर भी हैं. इसके अलावा यूके समेत यूरोप के देशों पुर्तगाल, बेल्जियम, अफ्रीकी देशों केन्या, तंजानिया, युगांडा, साउथ अफ्रीका, बोत्स्वाना, एशिया पैसिफिक में ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, चीन के हॉन्गकॉन्ग और जापान में भी स्वामीनारायण मंदिर हैं. मिडिल ईस्ट में दुबई, कुवैत, मनामा, शारजाह और मस्कट आदि स्थानों पर बीएपीएस के सेंटर हैं और पहला मंदिर अबू धाबी में बनाया गया है.

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