Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Board Exam 2026: हादसे के बाद भी छात्रों ने नहीं मानी हार, शिक्षकों की मदद से दी बोर्ड परीक्षा, DC न... Pregnancy Safety Tips: प्रेग्नेंसी में सावधानी से कम होगा रिस्क, UNICEF और स्वास्थ्य विभाग की वर्कशॉ... Jharkhand News: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी का बड़ा बयान, डीजीपी तदाशा मिश्रा से मांगा इस्तीफा Palamu Crime News: पलामू में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, लाखों की अवैध स्प्रिट के साथ 2 तस्कर गिरफ्तार Maha Shivratri 2026: प्रदोष से निशिता काल तक महाशिवरात्रि की धूम, बाबा नगरी में गूंजेगा हर-हर महादेव Balod Road Accident: बालोद-दल्लीराजहरा मार्ग पर भीषण सड़क हादसा, 3 दोस्तों की मौके पर ही मौत Balodabazar Forest Division: 'जीरो आगजनी' का लक्ष्य, जंगलों को आग से बचाने के लिए बलौदाबाजार वनमंडल ... Chhattisgarh News: जमानत पर आए कैदी ने आंगनबाड़ी में महिला की जान ली, फिर खुद दी जान; बालोद में हड़क... Mainpat Mahotsav: मैनपाट महोत्सव सरगुजा की संस्कृति और अस्मिता का प्रतीक- सीएम विष्णुदेव साय Pulwama Attack Anniversary: पुलवामा के शहीदों को सीआरपीएफ ने दी श्रद्धांजलि, याद में नम हुईं आंखें

महिलाओं के हाथों से बने गोबर के दीयों से जगमग होगी दीपावली

21

दीपावली पर्व को लेकर इस बार लोगों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। ऐसे में इस बार बड़े धूमधाम से पर्व मनने वाला है। इन बातों को ध्यान में रखते हुए इसकी तैयारी अभी से शुरू कर दी गई है और बाजार सजना शुरू हो गया है। इसी में खास है कि ईको फ्रेंडली गोबर के दीये। इन्हें इस बार रंगबिरंगा बनाया गया है और यह बाजार में भी बिकने के लिए आ चुका है।

इस साल गोबर के दीये बनाने के लिए कई महिला स्व सहायता समूह सामने आए हैं। शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित गोठानों में भी इनका निर्माण किया जा रहा है। कुम्हार भी मिट्टी के साथ ही गोबर के दिए बना रहे हैं। साफ है कि दीपावली के समय पर गोबर के दीयों की मांग बढ़ी है और घर-घर इसे जलाना भी लोग पसंद कर रहे हैं। इसी वजह से इस बार बड़े पैमाने पर बाजार में मिट्टी के दीये आना शुरू हो गए हैं और इनकी बिक्री भी शुरू हो गई है। लोग अभी से इन गोबर के दीयों पर रुचि ले रहे हैं। इसकी वजह से जमकर खरीदारी हो रही है।

पर्यावरण के लिए रहता है बेहतर

गोबर के दीये इस बार दो प्रकार के बनाए गए हैं। इसमें पहला प्रकार गोबर का सामान्य दीया है जो पूरी तरह जलकर खत्म हो जाएगा, इसकी खास बात यह है कि यह पर्यावरण को कोई भी नुकसान नहीं पहुंचाता है बल्कि इसका धुंआ पर्यावरण में फैले हानिकारक वायरस को मारता है। वहीं दूसरी प्रकार का गोबर का दीया रंगिबरंगे बनाया गया है। इसका बार-बार उपयोग किया जा सकता है। इस दीये को रोशन करने से भी पर्यावरण को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचता है। इसलिए ही इसे इको फ्रेंडली दीया भी कहा जाता है।

ऐसे बनते हैं गोबर के दीये

सबसे पहले गोबर के कच्चे माल को बारीक़ पीसकर तैयार किया जाता है। इसके बाद तैयार मिश्रण से उत्पाद बनाने के लिए दीये के विभिन्न प्रकार के सांचे का उपयोग किया जाता है। आकार में ढाले जाने के बाद प्रोडक्ट को सूखने के लिए खुले वातावरण में रख दिया जाता है। यह 24 से 48 घंटे में पूरी तरह से सूखकर तैयार हो जाता है।

तीन रुपये से शुरू हो रहा दाम

गोबर से निर्मित दीये का मूल्य अलग-अलग निर्धारित किया गया है। जहां गोबर के सादे दिए तीन से पांच रुपये तक में बिक रहे हैं, इनके रंगबिरंगे दीये के छोटे-बड़े आकार के हिसाब से 10 रुपये व उससे ज्यादा दाम पर बिक रहे हैं। उन्हें पैकेट बनाकर और दर्जन के हिसाब से बेचा जा रहा है। जानकारी के मुताबिक विभिन्न महिला स्व सहायता समूह और कुम्हार मिलाकर शहर में दो लाख से ज्यादा गोबर के दीये बेचने का लक्ष्य रखा गया है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.