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महाकाल मंदिर विवाद गरमाया, अखाड़ा परिषद अध्यक्ष रवींद्र पुरी ने केंद्रीय गृह मंत्री और सीएम को लिखा पत्र— प्रशासक को हटाने की मांग

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उज्जैन: मध्य प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध धार्मिक शहर उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में दो दिन पूर्व अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी महाराज और मंदिर के कर्मचारियों के बीच उत्पन्न हुआ विवाद अब और अधिक गंभीर रूप लेता जा रहा है। मंदिर के स्टाफ पर सीधे तौर पर अभद्रता करने का गंभीर आरोप लगाते हुए महंत रवींद्र पुरी ने देश के केंद्रीय गृह मंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री को अपनी लिखित शिकायत भेज दी है। इसके साथ ही उन्होंने मंदिर प्रशासक आईएएस प्रथम कौशिक को उनके पद से तत्काल हटाने की पुरजोर मांग भी उठाई है।

अखाड़ा परिषद अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज ने मुख्यमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री को भेजा पत्र, प्रशासक की कार्यशैली पर जताई गहरी नाराजगी

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज ने प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा उज्जैन के सिंहस्थ मेला अधिकारी सह संभागायुक्त आशीष सिंह को एक औपचारिक पत्र प्रेषित कर मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक की कार्यशैली पर अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की है। अपने इस पत्र में उन्होंने पूरी घटना का जिक्र करते हुए लिखा है कि “जब मैं भगवान महाकाल के दर्शन करने के लिए मंदिर पहुंचा, तो वहाँ मौजूद कर्मचारियों ने मेरे और मेरे साथ आए अनुयायियों के साथ बेहद अभद्र व्यवहार किया। प्रोटोकॉल के नियमों के तहत मेरे साथ जिस सहायक प्रशासक की ड्यूटी लगाई गई थी, वे भी अपने समय पर उपस्थित नहीं हुए। इस दौरान मंदिर के कर्मचारियों ने अभद्रता से यह बात कही कि प्रशासक महोदय के बहुत सख्त आदेश हैं कि किसी भी साधु-संत को बिना सुरक्षा जांच (चेकिंग) के अंदर प्रवेश न दिया जाए।”

महाकाल मंदिर में सनातन संस्कृति और साधु-संतों के अपमान का लगाया गंभीर आरोप, संवेदनशील अधिकारी की नियुक्ति की मांग

महंत रवींद्र पुरी ने कड़े शब्दों में आरोप लगाते हुए कहा है कि महाकालेश्वर मंदिर परिसर में आए दिन देश के सम्मानित साधु-संतों के साथ अपमानजनक और अयोथिति व्यवहार किया जाता है। संतों के प्रति इस तरह का घृणित और अनुचित व्यवहार हमारी महान सनातन परंपरा तथा देश की धार्मिक भावनाओं पर बहुत ही प्रतिकूल प्रभाव डालता है। उन्होंने मांग की है कि मंदिर समिति के प्रशासक प्रथमशिक को इस पद से तुरंत हटाया जाए और उनके स्थान पर किसी अन्य संवेदनशील और जिम्मेदार अधिकारी की नियुक्ति की जाए। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अपनी गहरी नाराजगी जताते हुए अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष शुक्रवार की देर शाम दिल्ली के लिए रवाना हो गए। दूसरी ओर, जिस कर्मचारी (जगदीश गौड़) पर महंत के साथ अभद्रता करने का मुख्य आरोप था, उसे मंदिर समिति ने तत्काल प्रभाव से ड्यूटी से हटाकर उसकी जगह राजू मालवीय को तैनात कर दिया है, परंतु इस कार्रवाई से भी रवींद्र पुरी महाराज पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं।

रवींद्र पुरी का कड़ा बयान, कहा— कुछ लोग अपनी हरकतों से विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर की पवित्र छवि को कर रहे हैं धूमिल

इस पूरे प्रकरण पर खुलकर अपनी बात रखते हुए महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि “संबंधित दोषी व्यक्ति का नाम मंदिर प्रशासन को स्पष्ट रूप से बता दिया गया है, और ऐसे अमर्यादित लोगों को मंदिर जैसी पवित्र संस्था में रखना कतई उचित नहीं है। बाबा महाकाल केवल उज्जैन शहर के ही नहीं, बल्कि संपूर्ण ब्रह्मांड और विश्व के आराध्य हैं। आगामी वर्ष 2028 में सिंहस्थ महाकुंभ का आयोजन होना है, जिसमें देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु आएंगे। ऐसे अनुशासनहीन लोगों की वजह से पूरे मंदिर की वैश्विक छवि धूमिल हो रही है। कुछ विशेष लोगों ने महाकाल मंदिर की पावन दर्शन व्यवस्था को पूरी तरह से एक ‘धंधा’ बनाकर रख दिया है।”

RAVINDRA PURI ALLEGATIONS

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