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हरियाणा के इतिहास में 5 नवंबर का दिन होने जा रहा है स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज, अंबाला छावनी में 800 करोड़ की लागत से बने भव्य शहीद स्मारक का होगा लोकार्पण

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चंडीगढ़: हरियाणा के इतिहास में आगामी 5 नवंबर का दिन एक अत्यंत महत्वपूर्ण और गौरवशाली अध्याय के रूप में दर्ज होने वाला है। करीब तीन दशक पूर्व अंबाला छावनी की ऐतिहासिक भूमि पर 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीदों की स्मृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का जो स्वप्न देखा गया था, वह अब पूरी तरह साकार होने जा रहा है। देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस दिन लगभग 800 करोड़ रुपए की लागत से अत्याधुनिक सुविधाओं और भव्य रूप में निर्मित इस विशाल शहीद स्मारक को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इस अत्यंत गौरवशाली और ऐतिहासिक अवसर पर अंबाला छावनी में एक विराट जनसभा का भी आयोजन किया जाएगा, जिसे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित करेंगे। इस संपूर्ण आयोजन और विराट परियोजना के केंद्र बिंदु में हरियाणा के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री अनिल विज की वह दूरदर्शी सोच और लंबा संघर्ष है, जिन्होंने अंबाला को 1857 की क्रांति के इतिहास में उसका वास्तविक और गौरवपूर्ण स्थान दिलाने के लिए अथक प्रयास किए। विज की यह परिकल्पना केवल एक साधारण स्मारक के निर्माण तक सीमित नहीं थी, बल्कि उनका मुख्य उद्देश्य स्वतंत्रता आंदोलन के उन तमाम अनसुने और अनगिनत नायकों को इतिहास के दबे पन्नों से निकालकर देश की सामूहिक स्मृति का स्थायी हिस्सा बनाना था, जिनके अद्वितीय बलिदान को अब तक अपेक्षित पहचान नहीं मिल सकी थी।

विधानसभा से लेकर सड़क तक तीन दशक तक जारी रहा कड़ा संघर्ष, आखिरकार परिकल्पना ने लिया भव्य स्वरूप

अंबाला छावनी में एक भव्य शहीद स्मारक के निर्माण का विचार सबसे पहले मंत्री अनिल विज के मन में लगभग 30 वर्ष पूर्व आया था। उन्होंने इस पवित्र मांग को केवल किसी राजनीतिक भाषण या चुनावी घोषणा तक सीमित नहीं रखा, बल्कि विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकालों के दौरान विधानसभा के भीतर और बाहर लगातार इस मुद्दे को मजबूती से उठाया। वर्ष 2014 में जब प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार का गठन हुआ, तब जाकर इस महत्वपूर्ण विचार को एक ठोस विकास परियोजना में तब्दील करने का रास्ता प्रशस्त हुआ। विज ने तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल के समक्ष 1857 की क्रांति से जुड़े तमाम दुर्लभ ऐतिहासिक दस्तावेजों, साक्ष्यों और तथ्यों के साथ इस स्मारक के निर्माण का आधिकारिक प्रस्ताव रखा। इसके उपरांत योजना को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया गया और अंबाला छावनी में एक ऐसे राष्ट्रीय स्तर के परिसर की परिकल्पना को मूर्तरूप दिया गया, जहां इतिहास, उच्चस्तरीय शोध, वैचारिक स्मृति और आधुनिक तकनीक का अद्भुत संगम देखने को मिले। अब आगामी 5 नवंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कर-कमलों द्वारा इस ऐतिहासिक परिसर का लोकार्पण होना इस लंबी और संघर्षपूर्ण यात्रा की सबसे बड़ी परिणति साबित होगा।

1857 की महान क्रांति को मिलेगा व्यापक ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य, किसानों, महिलाओं और आम नागरिकों की भागीदारी होगी प्रदर्शित

इस नवनिर्मित शहीद स्मारक की सबसे अनूठी और बड़ी विशेषता यह है कि इसमें 1857 के स्वतंत्रता संग्राम को किसी एक विशेष शहर, भौगोलिक क्षेत्र या वर्ग तक सीमित करके नहीं दिखाया गया है, बल्कि इसमें नियमित सैनिकों के साथ-साथ देश के अन्नदाता किसानों, वीर महिलाओं और आम नागरिकों की साहसिक भूमिका को भी बेहद व्यापक ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत किया गया है। अंबाला छावनी का इस महान क्रांति के शुरुआती और अहम घटनाक्रमों से गहरा और पुराना संबंध रहा है। इसी ऐतिहासिक महत्ता को राष्ट्रीय पटल पर जीवंत रूप में सामने लाने के उद्देश्य से इस स्मारक की रूपरेखा तैयार की गई थी। इसका मुख्य लक्ष्य देश की युवा पीढ़ी और आने वाले पर्यटकों को यह बताना है कि आज़ादी की इस पहली बड़ी लड़ाई में देश के अलग-अलग कोनों से आए लोगों ने किस प्रकार एकजुट होकर क्रूर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लोहा लिया था।

कुल 23 अत्याधुनिक गैलरियों में उकेरी गई है इतिहास की विस्तृत तस्वीर, 700 से अधिक वीरों के नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित

लगभग 800 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत से तैयार इस विशाल परिसर के भीतर कुल 23 भव्य गैलरियों का निर्माण किया गया है। इन गैलरियों में अंबाला, हरियाणा, मेरठ, दिल्ली, पंजाब, गुजरात, झांसी और देश के अन्य विभिन्न हिस्सों में 1857 के दौरान हुए भीषण संघर्षों एवं प्रमुख घटनाओं को अत्यंत सजीवता के साथ प्रदर्शित किया जाएगा। इस स्मारक की ऐतिहासिक सामग्री और तथ्यों को तैयार करने में अकादमिक शोध को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इसके लिए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. केसी यादव के महत्वपूर्ण शोध कार्यों सहित तमाम प्रामाणिक ऐतिहासिक दस्तावेजों का बारीकी से अध्ययन किया गया है। इतिहास के तथ्यों की शत-प्रतिशत प्रमाणिकता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पाँच प्रतिष्ठित इतिहासकारों की एक विशेष समिति का गठन भी किया गया था। इसके अतिरिक्त देश और विदेश के विभिन्न प्रमुख अभिलेखागारों (Archives) से भी प्रामाणिक सामग्री को बड़े जतन से एकत्रित किया गया है। इसी गहन शोध का परिणाम यह निकला है कि अब तक 700 से अधिक स्वतंत्रता सेनानी वीरों की सटीक पहचान करते हुए उनके नाम, उनके पिता के नाम और उनके पैतृक गांवों से जुड़े तमाम विवरणों को जुटा लिया गया है। इन सभी अमर शहीदों के नाम इस स्मारक के मुख्य परिसर में स्वर्ण अक्षरों में बेहद खूबसूरती के साथ उकेरे गए हैं, ताकि भविष्य में भी प्रामाणिक दस्तावेजों के आधार पर अन्य वीर सपूतों के नाम इसमें जोड़े जा सकें।

इतिहास को केवल पढ़ा ही नहीं, बल्कि दृश्य और ध्वनि के माध्यम से महसूस भी कर सकेंगे देश-विदेश से आने वाले दर्शक

इस स्मारक को आधुनिक तकनीक और डिजिटल मीडिया के साथ इस प्रकार से विकसित किया गया है कि यहां आने वाले पर्यटक और शोधार्थी केवल ऐतिहासिक जानकारियों को पढ़ेंगे ही नहीं, बल्कि 1857 की क्रांति के हर एक घटनाक्रम को अपनी आँखों से देखकर और कानों से सुनकर महसूस भी कर सकेंगे। परिसर के भीतर 360-डिग्री प्रोजेक्शन मैपिंग, अत्याधुनिक साउंड सिस्टम और आकर्षक लेजर शो के जरिए क्रांति की तमाम प्रमुख घटनाओं को एक जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। इसके अलावा, देश के इन महान शहीदों को डिजिटल माध्यम से अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए एक विशेष और समर्पित गैलरी भी तैयार की गई है। आगंतुकों की सुविधा के लिए इस विशाल परिसर में 2500 दर्शकों की भारी क्षमता वाला एक खुला ओपन एयर थिएटर (Open Air Theatre) और 300 लोगों के बैठने की क्षमता से युक्त एक आधुनिक ऑडिटोरियम भी बनाया गया है, जहाँ भविष्य में ऐतिहासिक विषयों पर सेमिनार, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और अन्य शैक्षणिक गतिविधियां आसानी से आयोजित की जा सकेंगी।

63 मीटर ऊंची कमलाकार संरचना बनेगी इस ऐतिहासिक परिसर की मुख्य पहचान, पर्यटकों के लिए मिलेंगी तमाम आधुनिक सुविधाएं

शहीद स्मारक के इस विशाल परिसर के केंद्र में 63 मीटर ऊंची कमल के फूल (कमलाकार) के आकार की एक बेहद आकर्षक और भव्य संरचना का निर्माण किया गया है, जो पूरे परिसर की प्रमुख और दूर से दिखने वाली पहचान बनेगी। इस मीनारनुमा संरचना के भीतर दो हाई-स्पीड लिफ्ट्स की व्यवस्था की गई है और इसके शीर्ष हिस्से पर एक शानदार स्काई कैफे भी विकसित किया जा रहा है। इसके साथ ही परिसर के भीतर सुरक्षित आवागमन के लिए हेलीपैड की सुविधा तथा देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों एवं अतिथियों के लिए अन्य तमाम आधुनिक व बुनियादी सुविधाओं का पुख्ता प्रबंध किया गया है। वास्तुकला की दृष्टि से यह अद्भुत संरचना इस स्थल को केवल एक ऐतिहासिक संग्रहालय तक सीमित नहीं रखती, बल्कि इसे आधुनिक पर्यटन के एक प्रमुख और वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की पूरी क्षमता प्रदान करती है।

लगभग छह घंटे में पूरा होगा इस भव्य स्मारक का विस्तृत भ्रमण, ऑनलाइन टिकट बुकिंग और मोबाइल ऐप की सुविधा

इस ऐतिहासिक स्मारक में पर्यटकों के प्रवेश को सुगम बनाने के लिए ऑनलाइन टिकट बुकिंग की सुविधा से लैस एक समर्पित मोबाइल एप्लीकेशन (App) और आधिकारिक वेबसाइट तैयार की गई है। इसके अलावा परिसर के भीतर इस धरोहर से जुड़े स्मृति चिह्नों (Souvenirs) की बिक्री के लिए आठ आधुनिक दुकानें भी बनाई गई हैं। इस विशाल परिसर में बनी सभी प्रमुख गैलरियों, प्रदर्शनियों और अन्य आधुनिक सुविधाओं का विस्तार से अवलोकन करने में एक पर्यटक को लगभग छह घंटे का समय लग सकता है, जिससे इस बात का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां 1857 की क्रांति से जुड़ी कितनी वृहद, विस्तृत और ऐतिहासिक सामग्री को संकलित किया गया है।

देश के सभी राज्यों को उनके अपने ‘राज्य दिवस’ पर इस राष्ट्रीय स्मारक में विशेष आयोजन करने का दिया गया है खुला निमंत्रण

मंत्री अनिल विज ने देश के सभी राज्यों के प्रशासनिक नेतृत्व से यह अपील की है कि वे अपने-अपने प्रदेश के ‘राज्य दिवस’ (Statehood Day) से जुड़े सांस्कृतिक और आधिकारिक कार्यक्रम इसी राष्ट्रीय स्मारक परिसर में आयोजित करें। इस अनूठी पहल से देश के अलग-अलग राज्यों के नागरिकों को अपने-अपने क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानियों और 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में उनके अमूल्य योगदान को नजदीक से जानने व समझने का बेहतरीन अवसर मिल सकेगा। इस पूरी पहल के पीछे मुख्य विचार राष्ट्रीय एकता, अखंडता और साझा सांस्कृतिक विरासत की भावना को और अधिक प्रगाढ़ करना है। इस स्मारक को एक ऐसे जीवंत मंच के रूप में परिकल्पित किया गया है, जहाँ भारत के विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान एक ही छत के नीचे एक साथ दिखाई दे।

अमित शाह के इस ऐतिहासिक दौरे से वैश्विक और राष्ट्रीय मानचित्र पर चमकेगा अंबाला छावनी का नाम

आगामी 5 नवंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा इस भव्य स्मारक को राष्ट्र को समर्पित किए जाने के साथ ही अंबाला छावनी का नाम देश के राष्ट्रीय इतिहास और पर्यटन के मानचित्र पर एक नई और विशिष्ट ऊंचाई हासिल कर लेगा। इस अवसर पर आयोजित होने वाली विशाल जनसभा के माध्यम से गृह मंत्री का उद्बोधन इस पूरे कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण रहेगा। देश भर के विद्यार्थियों, इतिहासकारों, शोधार्थियों, पर्यटकों और स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में गहरी रुचि रखने वाले तमाम नागरिकों के लिए यह भव्य स्मारक आने वाले समय में एक प्रमुख अध्ययन, शोध एवं पर्यटन केंद्र साबित होगा। संक्षेप में कहें तो इस महत्वपूर्ण परियोजना का असली महत्व इसकी भव्य इमारत, आधुनिक गैलरियों या अत्याधुनिक तकनीक से कहीं अधिक है; इसकी वास्तविक उपलब्धि उन अमर वीरों को उनका बनता हुआ सम्मान दिलाना है, जिनकी अनगिनत कुर्बानियों ने भारत की आज़ादी की लड़ाई को मुख्य ऊर्जा प्रदान की थी। अनिल विज की लगभग तीन दशक पुरानी वह दूरदर्शी परिकल्पना अब एक ऐसी अमर राष्ट्रीय धरोहर का रूप ले चुकी है, जो देश की आने वाली पीढ़ियों को 1857 की क्रांति के अदम्य शौर्य, ऐतिहासिक संघर्ष और बलिदान की गाथा से हमेशा परिचित कराती रहेगी।

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