Ludhiana Chemist News: स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की कार्रवाई से नाराज केमिस्ट, करोड़ों का स्टॉक कंपनियों को वापस लौटाने का फैसला
लुधियाना: पंजाब राज्य में स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन द्वारा नशे के खात्मे के नाम पर दवा की दुकानों (केमिस्ट शॉप्स) पर की जा रही लगातार ताबड़तोड़ चेकिंग के विरोध में अब पंजाब केमिस्ट एसोसिएशन पूरी तरह मुखर हो गई है। एसोसिएशन ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए यह आधिकारिक ऐलान किया है कि महानगर की लगभग 4000 मेडिकल दुकानों पर अब से प्रीगैबलिन समेत किसी भी प्रकार की ‘हैबिट फॉर्मिंग’ (नशा संभावित) दवा की बिक्री नहीं की जाएगी। थोक और खुदरा (होलसेल और रिटेल) दोनों तरह के दवा कारोबारियों ने यह फैसला लिया है कि वे इन सभी दवाइयों के स्टॉक को कंपनियों को वापस लौटा देंगे, जिसके तहत आगामी एक हफ्ते के भीतर करोड़ों रुपये मूल्य का स्टॉक कंपनियों को रिवर्स भेज दिया जाएगा।
पत्रकार वार्ता में जी.एस. चावला ने सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
एक अहम पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए पंजाब केमिस्ट एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी जी.एस. चावला ने स्वास्थ्य विभाग तथा पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर बेहद गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मानसा में हुई एक घटना के बाद पूरे पंजाब के केमिस्टों को एक ही तराजू में तौलकर देखा जाने लगा है। सरकार की ओर से भले ही ‘युद्ध नशे विरुद्ध’ नाम से अभियान चलाया गया हो, लेकिन जमीनी हकीकत को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि यह अभियान असल में ‘युद्ध केमिस्टों के विरुद्ध’ बनकर रह गया है। जो लोग खुलेआम चिट्टा और अन्य घातक नशीले पदार्थ बेच रहे हैं, उन तक पहुंचने के बजाय पुलिस और विभाग के लोग सीधे ईमानदार दवा कारोबारियों को बेवजह परेशान करने में जुटे हैं। दुकानों पर पहुंचकर पुराने रिकॉर्ड और स्टॉक रजिस्टर खंगाले जा रहे हैं, जिसके कारण पूरे दवा व्यापार से जुड़े लोगों में भारी खौफ और मानसिक तनाव का माहौल बना हुआ है। जी.एस. चावला ने जानकारी दी कि इस मुद्दे पर बीते रविवार को पूरे पंजाब के सभी जिला प्रधानों की एक आपात ऑनलाइन बैठक बुलाई गई थी, जिसमें सभी ने एक सुर में प्रशासन के रवैये के प्रति गहरा रोष व्यक्त किया।
स्टॉक में मामूली अंतर मिलने पर थमाए जा रहे नोटिस और सील हो रही दुकानें
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान यदि किसी मेडिकल स्टोर के रिकॉर्ड में स्टॉक का मिलान करते समय मात्र एक या दो पत्तों का भी मामूली अंतर मिल जाता है, तो अधिकारियों द्वारा तुरंत कानूनी नोटिस थमा दिए जाते हैं और आनन-फानन में दुकानें तक सील कर दी जाती हैं। उन्होंने दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि जो कुछ गिने-चुने लोग वाकई अवैध रूप से नशे का काला कारोबार कर रहे हैं, उन पर कानून का शिकंजा कसना चाहिए और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन उनकी आड़ में तमाम ईमानदार और बेकसूर केमिस्टों को प्रताड़ित करना बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एसोसिएशन ने साफ कर दिया है कि जब तक इस तरह की अनावश्यक चेकिंग और उनका मानसिक उत्पीड़न बंद नहीं होता, तब तक किसी भी प्राइवेट मेडिकल स्टोर पर ऐसी दवाइयों का स्टॉक नहीं रखा जाएगा। साथ ही सरकार से यह मांग भी की गई है कि वह इन विशेष दवाओं को केवल सरकारी अस्पतालों या अपने अधिकृत सरकारी आउटलेट्स के माध्यम से ही मरीजों को उपलब्ध कराए, ताकि सही और जरूरतमंद मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। अंत में जी.एस. चावला ने यह भी कहा कि यदि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह इस मामले में उन्हें बातचीत के लिए आमंत्रित करते हैं, तो केमिस्टों का एक प्रतिनिधिमंडल पूरी बेबाकी के साथ अपनी बात उनके समक्ष रखेगा।
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