Surajpur News: प्रेमनगर में सीएमओ के खिलाफ बगावत, कलेक्टर से मिलकर जनप्रतिनिधियों ने की हटाने की मांग
सूरजपुर: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के अंतर्गत आने वाली प्रेमनगर नगर पंचायत के जनप्रतिनिधियों ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) की कार्यशैली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सीएमओ के कामकाज से गहरी नाराजगी जताते हुए नगर पंचायत अध्यक्ष सखमनिया जगत और उपाध्यक्ष आलोक साहू के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पार्षद सीधे कलेक्टर दफ्तर जा पहुंचे। कलेक्टर कार्यालय में सभी ने एकजुट होकर सीएमओ को उनके पद से तत्काल हटाने की मांग की है। नाराज पार्षदों का आरोप है कि सीएमओ न सिर्फ अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं, बल्कि क्षेत्र में होने वाले विकास कार्यों को भी जानबूझकर प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि विकास कार्यों को इस तरह रोका जाता रहा, तो वे जनहित के मुद्दों को लेकर उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
टेंडर प्रक्रिया और कार्यादेश जारी होने के बाद से शुरू हुआ प्रशासनिक विवाद
यह पूरा विवाद इसी साल 20 फरवरी को जारी किए गए एक टेंडर विज्ञापन से अपनी जड़ें पकड़ता है। नगर पंचायत के प्रतिनिधियों के अनुसार, नियमानुसार निविदा की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी करने के बाद गत 17 अप्रैल 2026 को दो अलग-अलग ठेकेदारों को आधिकारिक रूप से कार्यादेश जारी किए गए थे। इसके बाद धरातल पर कुल 7 विकास कार्यों पर काम भी शुरू हो चुका था। खास बात यह है कि इन सभी कार्यों का मूल्यांकन खुद मुख्य नगरपालिका अधिकारी द्वारा किया गया था और उसके पश्चात भुगतान की प्रक्रिया भी विधिवत पूरी की जा चुकी थी।
सीएमओ के एकतरफा आदेश से ठप हुए चल रहे विकास कार्य
विवाद तब और अधिक गहरा गया जब गत 9 अक्टूबर 2026 को सीएमओ ने एक नया आदेश जारी करते हुए पहले से संचालित सभी 7 विकास कार्यों के कार्यादेशों को एकतरफा रूप से निरस्त कर दिया। पार्षदों का कहना है कि कलेक्टर कार्यालय की ओर से केवल निविदा प्रक्रिया पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन सीएमओ ने इस निर्देश की गलत व्याख्या करते हुए पहले से जारी और प्रगति पर चल रहे विकास कार्यों पर ही कैंची चला दी। इस मनमाने फैसले के कारण जनता के हित में किए जाने वाले तमाम जरूरी काम बीच में ही रुक गए हैं।
नजदीक आ रहे चुनावों के बीच और गहराया राजनीतिक संकट
प्रेमनगर नगर पंचायत के प्रतिनिधियों का मानना है कि सीएमओ के इस अनुचित कदम से न केवल क्षेत्र का विकास अटका है, बल्कि ठेकेदारों और स्थानीय नगर प्रशासन के बीच असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। आने वाले कुछ ही महीनों के भीतर नगर पंचायत के चुनाव भी होने वाले हैं, जिसके चलते यह प्रशासनिक विवाद अब धीरे-धीरे तूल पकड़कर राजनीतिक रंग लेता नजर आ रहा है। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर क्या और कितनी जल्दी सख्त कदम उठाता है।
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