Chhindwara News: आजीविका मिशन ने बदली ग्रामीण महिलाओं की किस्मत, समता समन्वयक दीपिका और देवी बनीं आत्मनिर्भर
छिंदवाड़ा: कुछ साल पहले तक जिन महिलाओं की पूरी जिंदगी घर की चारदीवारी और खेतों में मजदूरी करते हुए बीतती थी, वे अब पूरी तरह आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। न सिर्फ वे खुद आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं, बल्कि अपने आसपास की अन्य ग्रामीण महिलाओं की समस्याओं का डटकर समाधान भी कर रही हैं। मध्य प्रदेश ग्रामीण राज्य आजीविका मिशन से जुड़कर छिंदवाड़ा की ये महिलाएं समाज में एक बड़ा बदलाव यानी ‘चेंजमेकर’ की भूमिका निभा रही हैं।
समता समन्वयक दीपिका इवनति की प्रेरणादायक कहानी
इस बदलाव की एक बेहतरीन मिसाल समता समन्वयक दीपिका इवनति हैं। उनका कहना है कि 6 साल पहले तक वह सिर्फ घर-गृहस्थी संभालती थीं और खेती-किसानी में पति का हाथ बंटाती थीं। साल 2020 में वह मध्य प्रदेश ग्रामीण राज्य आजीविका मिशन से जुड़ीं और धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए साल 2024 से समता समन्वयक के पद पर जिम्मेदारी संभाल रही हैं। कभी ₹100 खर्च करने के लिए भी सोचना पड़ता था, लेकिन अब आजीविका मिशन की बदौलत उन्हें हर महीने ₹6500 मिलने लगे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति काफी सुधर चुकी है।
लोक अधिकार केंद्र के जरिए महिलाओं को मिल रहा न्याय
दीपिका इवनति ने जानकारी दी कि साल 2024 से 2026 के दौरान उनके लोक अधिकार केंद्र में कुल 650 से अधिक मामले पहुंचे, जिनमें से लगभग 400 मामलों का सफलतापूर्वक निराकरण किया जा चुका है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा संचालित इन लोक अधिकार केंद्रों में घरेलू हिंसा, पात्रता आवास से जुड़ी समस्याएं, जॉब कार्ड, वन स्टॉप सेंटर और महिला हिंसा को रोकने जैसे गंभीर मामलों पर प्रभावी काम किया जाता है, जिससे पीड़ित महिलाओं को समय पर न्याय मिल रहा है।
पति के साथ मिलकर शुरू किया किराना स्टोर और पंचर की दुकान
लोक अधिकार केंद्र में समता सखी के रूप में कार्य करने वाली देवी खतरकर की कहानी भी कम प्रेरणादायक नहीं है। पहले वह अपने पति के साथ मजदूरी का काम करती थीं। आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद उन्हें न केवल आर्थिक संबल मिला, बल्कि उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर घर पर ही किराना स्टोर और हवा-पंचर की दुकान शुरू कर दी। इससे उनके परिवार की आर्थिक नींव बेहद मजबूत हुई है। उन्हें इस बात की सबसे ज्यादा खुशी है कि अपना जीवन संवारने के साथ-साथ वे दूसरी जरूरतमंद महिलाओं की भी मदद कर पा रही हैं।
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