WhatsApp Security Settings: अनजान कॉल्स और डिजिटल अरेस्ट के खतरे से बचने के लिए आज ही बदल लें ये जरूरी सेटिंग्स
आज के समय में स्मार्टफोन का मतलब लगभग व्हाट्सएप (WhatsApp) हो गया है। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक हम मैसेजिंग और कॉलिंग के लिए इसी ऐप का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। लेकिन अब यह सिर्फ अपनों से बात करने का जरिया नहीं रहा, बल्कि साइबर ठगों ने इसे अपना सबसे बड़ा हथियार बना लिया है। यदि आपके फोन की स्क्रीन पर अचानक पाकिस्तान, वियतनाम या किसी अन्य अनजान देश के कोड वाले नंबर से कॉल आती है, तो आपको तुरंत सतर्क होने की जरूरत है। आपकी एक छोटी सी चूक या लापरवाही आपके बैंक खाते की जीवन भर की कमाई को एक झटके में पूरी तरह खाली कर सकती है।
🕵️♂️ साइबर ठगों का नया जाल: ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर
आजकल साइबर अपराधी लोगों को डराने और धमकाने के लिए इसी प्लेटफॉर्म का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं।
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फर्जी अधिकारी बनकर कॉल: जालसाज इस ताक में रहते हैं कि कोई उनकी कॉल रिसीव करे। कॉल उठाते ही सामने बैठा शख्स खुद को पुलिस अधिकारी, सीबीआई (CBI) या कस्टम विभाग का अफसर बताता है और आप पर फर्जी मामलों में शामिल होने का आरोप लगाता है।
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डिजिटल अरेस्ट: इसे आज के समय में ‘डिजिटल अरेस्ट’ कहा जाता है, जिसमें लोगों को घंटों तक वीडियो कॉल पर डराकर रखा जाता है और मामले को रफा-दफा करने के नाम पर लाखों रुपये की अवैध उगाही की जाती है।
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आईपी लीक का खतरा: तकनीकी रूप से भी अनजान कॉल उठाना खतरनाक है, क्योंकि इससे एक पीयर-टू-पीयर (P2P) कनेक्शन बन जाता है, जिससे आपका आईपी एड्रेस (IP Address) और लाइव लोकेशन हैकर्स तक पहुंच सकती है।
⚙️ सुरक्षा के लिए तुरंत बदलें ये 2 खास सेटिंग्स
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साइलेंट अननोन कॉलर्स (Silent Unknown Callers): इस परेशानी से बचने के लिए सबसे पहले अपने ऐप की सेटिंग्स में जाएं, फिर Privacy > Calls पर जाकर Silent Unknown Callers के विकल्प को ऑन कर दें। इससे आपकी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव न होने वाले नंबरों से आने वाली कॉल्स की घंटी बिल्कुल नहीं बजेगी, जिससे आप हड़बड़ी में कोई फर्जी कॉल उठाने से बच जाएंगे।
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प्रोटेक्ट आईपी एड्रेस इन कॉल्स (Protect IP Address In Calls): साइबर ट्रैकिंग से बचने के लिए सेटिंग्स में जाकर Privacy > Advanced पर क्लिक करें और Protect IP Address in Calls के टॉगल को इनेबल कर दें। इस सेटिंग के ऑन होने से आपकी सभी कॉल्स मेटा (Meta) के सुरक्षित सर्वर्स से होकर गुजरती हैं, जिससे सामने वाले व्यक्ति को आपका असली प्राइवेट नेटवर्क या आईपी एड्रेस कभी पता नहीं चल पाता।
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