Bathinda News: बठिंडा कोर्ट परिसर में सरपंच के रिश्वत मामले को लेकर दो पक्षों में हाई-वोल्टेज हंगामा और झड़प
पंजाब के बठिंडा में गांव कालझरानी की सरपंच एवं आम आदमी पार्टी की पूर्व जिला महिला विंग अध्यक्ष सतवीर कौर सिद्धू से जुड़े कथित रिश्वत मामले में एक नया और बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बठिंडा कोर्ट परिसर के बाहर शिकायतकर्ता जतिंदर सिंह और सरपंच के पति नरोतम सिंह के बीच तीखी झड़प हो गई।
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दोनों पक्षों के आरोप: शिकायतकर्ता जतिंदर सिंह ने गंभीर आरोप लगाया कि नरोतम सिंह ने उन पर हमला कर उनका मोबाइल फोन छीन लिया और तोड़ डाला, ताकि फोन में मौजूद उनकी पत्नी (सरपंच) के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार के सबूत नष्ट किए जा सकें। दूसरी ओर, सरपंच के पति नरोतम सिंह ने पलटवार करते हुए शिकायतकर्ता पर ही खुद पर हमला करने और उनके कपड़े फाड़ने का आरोप लगाया है।
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कोर्ट परिसर में हुए इस हाई-वोल्टेज ड्रामे का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक पुलिस के पास इस मामले में किसी आधिकारिक शिकायत के पहुंचने या एफआईआर दर्ज होने की पुष्टि नहीं हुई है, जिसके चलते दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र जांच होना अभी बाकी है।
🏃♂️ विजिलेंस कार्रवाई के सिलसिले में कोर्ट पहुंचे थे शिकायतकर्ता
शिकायतकर्ता जतिंदर सिंह का दावा है कि वह सरपंच सतवीर कौर सिद्धू की गिरफ्तारी से जुड़ी विजिलेंस कार्रवाई के सिलसिले में ही कानूनी प्रक्रिया के तहत कोर्ट परिसर पहुंचे थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात नरोतम सिंह से हो गई, जो देखते ही देखते कहासुनी और फिर हाथापाई में बदल गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि मोबाइल तोड़ने का मुख्य मकसद रिश्वत मामले से जुड़े डिजिटल सबूतों को खत्म करना था, जबकि दूसरे पक्ष ने इसे निराधार बताया है।
💸 क्या है पूरा रिश्वत मामला और विजिलेंस की कार्रवाई?
इस पूरे विवाद की जड़ वर्ष 2023 से जुड़ी हुई है:
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नौकरी और पैसों की मांग: शिकायतकर्ता जतिंदर सिंह सोहल (निवासी गांव भगवानगढ़) को 24 जुलाई 2023 को पंजाब स्टेट फॉरेस्ट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन में आउटसोर्सिंग के जरिए ड्राइवर के पद पर नौकरी मिली थी, और उनकी ड्यूटी कॉरपोरेशन के चेयरमैन राकेश पुरी के साथ लगाई गई थी। जतिंदर का आरोप है कि यह नौकरी दिलाने और उसे बरकरार रखने के एवज में सरपंच सतवीर कौर सिद्धू ने उनसे हर महीने 10,000 रुपये की मांग की थी, जिसे बाद में बातचीत के बाद 8,500 रुपये प्रतिमाह तय किया गया था। आरोप है कि जब उन्होंने यह रकम देने से इनकार कर दिया, तो अक्टूबर 2023 में उन्हें नौकरी से हटा दिया गया।
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विजिलेंस की एंट्री: नौकरी से हटाए जाने के बाद पीड़ित ने तमाम सबूतों के साथ विजिलेंस ब्यूरो बठिंडा से संपर्क किया। जांच-पड़ताल के बाद विजिलेंस ब्यूरो ने 25 जनवरी 2026 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7-ए के तहत एफआईआर नंबर 2 दर्ज की थी। शिकायतकर्ता ने विजिलेंस को पेन ड्राइव में 11 ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग सौंपने का दावा किया था, जिसमें पैसों की मांग से जुड़ी बातचीत का जिक्र है। हालांकि, इस मामले में चेयरमैन राकेश पुरी की भूमिका की भी जांच की गई थी, लेकिन पर्याप्त सबूत न मिलने के कारण उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
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