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खाकी पर भारी पड़ा ‘ओवर कॉन्फिडेंस’: संभल में 12 पुलिसकर्मियों ने मिलकर लिखी फर्जी मुठभेड़ की कहानी, कानून ने पकड़ ली चोरी

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जो संभल पुलिस अपने ताबड़तोड़ एक्शन को लेकर पूरे यूपी में चर्चा का विषय बनी रही, उसी के 12 पुलिस वाले दागदार हो गए हैं, वो भी फर्जी एनकाउंटर को लेकर. कोर्ट ने 2 इंस्पेक्टर, 4 दारोगा, 5 सिपाही और एक हेड कांस्टेबल पर FIR के आदेश दिए हैं. कोर्ट ने कहा कि इन पुलिसवालों पर केस दर्ज कर तीन दिन में जानकारी दी जाए, लेकिन इन सबके बीच संभल के सिंघम SP कृष्ण कुमार बिश्नोई ने भी साफ कर दिया है कि हम अपने जवानों पर केस दर्ज नहीं करेंगे, बल्कि कोर्ट के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती देंगे. आइए जानते हैं कि क्या है फर्जी एनकाउंटर का पूरा मामला, जिसमें कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है.

दरअसल, ओमवीर नाम के शख्स को 25 अप्रैल 2022 को बहजोई थाना क्षेत्र में हुई एक लाख रुपए की डकैती में गिरफ्तार दिखाया गया था, जबकि वह उस समय बदायूं जेल में बंद था. 11 अप्रैल से 12 मई 2022 तक बदायूं जेल में रहने के बावजूद बहजोई थाना पुलिस ने 7 जुलाई को फर्जी मुठभेड़ में उसकी गिरफ्तारी दिखाई, जिसमें 19 बाइकें, लूटी गई राशि की बरामदगी के अलावा धीरेंद्र और अवनीश नाम के दो अन्य आरोपियों की भी गिरफ्तारी दिखाई गई. ओमवीर का दावा है कि वह 11 अप्रैल से 12 मई 2022 तक बदायूं जेल में बंद था और 12 मई को ही रिहा हुआ था. ऐसे में 25 अप्रैल को डकैती में शामिल होना असंभव था.

इन 12 जवानों के खिलाफ FIR के आदेश

इसको लेकर ओमवीर ने चंदौसी जिला न्यायालय में याचिका दायर की. ओमवीर की तरफ से अधिवक्ता सुकांत कुमार ने कोर्ट में केस लड़ा. याचिका में तत्कालीन बहजोई थाना प्रभारी पंकज लवानिया, क्राइंम ब्रांच इंस्पेक्टर राहुल चौहान, दारोगा प्रबोध कुमार, नरेश कुमार, नीरज कुमार और जमील अहमद, सिपाही वरुण, आयुष, राजपाल, मालती चौहान, दीपक कुमार, हेड कांस्टेबल रूप चंद्र और एक अन्य दुर्वेश के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए.

डकैती के समय बदायूं जेल में बंद था ओमवीर

अधिवक्ता सुकांत कुमार ने बताया कि ओमवीर अप्रैल 2022 में बदायूं जेल में बंद था, बावजूद इसके बहजोई पुलिस ने उसे डकैती की वारदात में शामिल दिखाकर फर्जी मुठभेड़ में गिरफ्तार दर्शाया. अधिवक्ता के अनुसार, पुलिस ने न सिर्फ गिरफ्तारी दिखाई बल्कि बरामदगी भी दर्शाते हुए चार्जशीट भी कोर्ट में दाखिल कर दी. इससे प्रथम दृष्टया यह संकेत मिलता है कि मामले में कुछ पुलिसकर्मियों द्वारा साजिश, गलत तरीके से जांच और दस्तावेजों में हेरा-फेरी की गई.

कोर्ट ने मुठभेड़ की कहानी पर उठाए सवाल

सुनवाई के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) विभांशु सुधीर ने भी इस पूरे मामले को गंभीर माना. रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद उन्होंने कहा कि जिस दिन लूट की घटना दर्शाई गई, उसी दिन आरोपी अन्य मुकदमे में जिला कारागार बदायूं में बंद था. यह तथ्य सामने आने के बाद मुठभेड़ की कहानी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. उन्होंने तीन दिन के अंदर 12 पुलिसकर्मियों और एक अन्य सहित 13 के खिलाफ बहजोई थाने में FIR दर्ज करने का आदेश दिया. कोर्ट का आदेश आते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया.

SP ने कहा- हाई कोर्ट में आदेश को चुनौती देंगे

बहजोई सीओ प्रदीप कुमार सिंह ने कहा कि हमें अभी तक कोर्ट का आदेश औपचारिक रूप से मिला नहीं है. मीडिया के माध्यम से जानकारी मिली है. संभल SP कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि पुलिस कोर्ट के इस आदेश को आगे चुनौती देगी. जवानों पर FIR दर्ज नहीं करेगी. मामले को हम हाई कोर्ट में लेकर जाएंगे. वहीं पीड़ित ओमवीर ने कहा कि कोर्ट का फैसला न्यायसंगत है. मुझे गलत तरीके से फंसाया गया था. मैं उस समय जब जेल में बंद था तो डकैती कैसे डाल सकता हूं?

पुलिस अधिकारियों से की शिकायत, पर नहीं हुई सुनवाई

ओमबीर ने कहा कि उसको फंसाने में तत्कालीन बहजोई सीओ गोपाल सिंह का भी हाथ है. हालांकि कोर्ट ने सीओ गोपाल सिंह को राहत दी है. इस समय वह संभल में तैनात भी नहीं हैं. उनका ट्रांसफर हो चुका है. ओमवीर का कहना है कि फर्जी मुठभेड़ में फंसाने को लेकर उसने कई बार पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से थाना पुलिस की शिकायत की. SP से लेकर अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर लगाए, लेकिन किसी ने उसकी सुनवाई नहीं की. थक-हार कर उसने कोर्ट की शरण ली. कोर्ट का यह आदेश उसकी जीत है.

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