आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व शुरू होता है। वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर, रविवार से हो रही है। नवरात्रि के पहले दिन घर-घर में घटस्थापना की जाती है और मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार सही समय पर कलश स्थापित करने से ही पूजा का पूरा फल प्राप्त होता है। यदि आप भी जानना चाहते हैं कि पहले दिन देवी पूजन के लिए सबसे उत्तम समय कौन सा रहेगा, तो बता दें कि कलश स्थापना के लिए दिन में दो सबसे प्रमुख शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। सही समय और विधि से किया गया पूजन घर में सुख-समृद्धि और शांति लेकर आता है।
🌅 प्रातः काल का सबसे उत्तम मुहूर्त
नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना या घटस्थापना करने के लिए सूर्योदय के तुरंत बाद का समय सबसे श्रेष्ठ माना गया है। सुबह के समय वातावरण में शुद्धता और सकारात्मक ऊर्जा होती है।
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शुभ समय: इस दिन सुबह लगभग 6:00 बजे से सुबह 10:00 बजे के मध्य घटस्थापना के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त बन रहा है।
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इस समयावधि में पूजा की पूरी तैयारी करके कलश स्थापित करना बेहद शुभ फलदायी होता है। जो लोग अपने घर में सुख और समृद्धि चाहते हैं, उन्हें प्रातःकाल के इस शुभ समय में ही मां का ध्यान करते हुए घटस्थापना कर लेनी चाहिए।
🕛 दोपहर का अभिजित मुहूर्त और जरूरी सावधानियां
यदि किसी कारणवश आप सुबह के समय कलश स्थापना न कर पाएं, तो परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। इसके विकल्प के रूप में दोपहर का ‘अभिजित मुहूर्त’ दूसरा सबसे श्रेष्ठ समय माना जाता है।
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समय: दोपहर के समय अभिजित मुहूर्त सामान्यतः 11:45 से 12:30 के बीच रहता है। इस दौरान भी आप पूरे विधि-विधान से कलश स्थापित कर सकते हैं।
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विशेष ध्यान रखें: कलश स्थापना हमेशा शुभ चौघड़िया या अभिजित मुहूर्त में ही की जानी चाहिए। राहुकाल के दौरान घटस्थापना करना पूरी तरह वर्जित माना गया है, इसलिए राहुकाल से बचाव करते हुए ही पूजन कार्य संपन्न करें।
🪔 कलश स्थापना की संपूर्ण और सरल विधि
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स्थान की सफाई व लेपन: अपने घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) या पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें और वहां गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें।
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सप्तधान्य या मिट्टी की वेदी: पूजा स्थल पर साफ मिट्टी बिछाएं या लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर जौ (सप्तधान्य) बोएं।
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कलश की तैयारी: तांबे, पीतल या मिट्टी के कलश पर कुमकुम से स्वास्तिक बनाएं और उसके गले में रक्षा सूत्र (कलावा) बांधें। कलश के अंदर शुद्ध जल, गंगाजल, दूर्वा, अक्षत, सुपारी और एक सिक्का डालें।
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आम के पत्ते रखना: कलश के मुख पर 5 या 7 आम (या अशोक के) पत्ते इस प्रकार रखें कि उनका कुछ भाग बाहर की ओर दिखाई दे।
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नारियल की स्थापना: एक सूखे जटा वाले नारियल पर लाल कपड़ा या चुनरी लपेटकर कलावे से बांधें। फिर उस नारियल को आम के पत्तों के बीचों-बीच कलश के ऊपर स्थापित करें (ध्यान रहे कि नारियल का मुख आपकी तरफ हो)।
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देवी का आह्वान व अखंड दीप: कलश को मिट्टी की वेदी के ठीक बीच में स्थापित करें। इसके बाद हाथ में अक्षत और पुष्प लेकर मां दुर्गा एवं सभी देवी-देवताओं का आह्वान करें तथा विधिपूर्वक अखंड दीपक प्रज्वलित करें।
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