Yamunanagar Crime News: पुलिस अधिकारी के फर्जी दस्तावेजों पर खोली फर्म, 18 साल बाद बैंक खाता फ्रीज होने पर हुआ खुलासा
यमुनानगर: हरियाणा के यमुनानगर से धोखाधड़ी और पहचान के दुरुपयोग का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक पुलिस अधिकारी के राशन कार्ड और अन्य निजी पहचान दस्तावेजों का दुरुपयोग कर फर्जी फर्म का पंजीकरण करवा लिया गया। आरोप है कि अज्ञात जालसाजों ने वर्ष 2008 में पुलिस अधिकारी के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर ‘एमएस यमुना सेल्स कॉरपोरेशन’ (M/s Yamuna Sales Corporation) नाम से एक फर्म का अवैध रूप से रजिस्ट्रेशन कराया और उसके आधार पर वैट (VAT) नंबर भी जारी करवा लिया।
हैरानी की बात यह है कि इस फर्जीवाड़े की भनक पीड़ित पुलिस अधिकारी को करीब 18 साल तक नहीं लगी। जब हाल ही में इस फर्जी फर्म से संबंधित पुराने टैक्स बकाये के मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू हुई और वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा अधिकारी का बैंक खाता फ्रीज कर वेतन (सैलरी) अटैच करने की प्रक्रिया शुरू की गई, तब जाकर उन्हें इस पूरे षड्यंत्र का पता चला। पीड़ित की शिकायत पर थाना शहर यमुनानगर में विभिन्न आपराधिक धाराओं के तहत अभियोग दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
⚠️ 18 साल बाद जीएसटी नोटिस से हुआ भंडाफोड़: बैंक खाता फ्रीज होने पर उड़े होश
मामले के खुलासे और जांच से जुड़े मुख्य तथ्य:
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टैक्स रिकवरी की कार्रवाई: कई वर्षों तक निष्क्रिय या टैक्स चोरी के मामलों में शामिल रही इस फर्म पर जब टैक्स विभाग का नोटिस जारी हुआ और रिकवरी के तहत अधिकारी के बैंक खाते पर रोक लगाई गई, तब पीड़ित ने विभागीय स्तर पर संपर्क किया।
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दस्तावेजों की हेराफेरी: पड़ताल के दौरान सामने आया कि वर्ष 2008 में ही किसी अज्ञात व्यक्ति ने पुलिसकर्मी के राशन कार्ड व पहचान पत्रों की प्रति हासिल कर वाणिज्यिक विभाग में फर्म का पंजीकरण करा लिया था।
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अनोखी धोखाधड़ी: सामान्यतः आम नागरिकों के नाम पर लोन या फर्जी सिम के मामले सामने आते हैं, लेकिन एक पुलिस अधिकारी की आईडी पर पूरी व्यावसायिक फर्म बनाकर करोड़ों का कारोबार और टैक्स डिफॉल्ट करने की यह अनोखी वारदात है।
👮♂️ थाना शहर पुलिस ने दर्ज किया केस: गहराई से जांच में जुटी टीमें
पुलिस कार्रवाई और आगामी कदम:
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केस दर्ज: थाना प्रभारी मनोज कुमार ने बताया कि पीड़ित पुलिस अधिकारी की लिखित शिकायत मिलते ही पुलिस ने संबंधित कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
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नोटिस से खुला राज: थाना प्रभारी ने स्पष्ट किया कि करीब 18 वर्ष पुराने इस फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब जीएसटी और कर विभाग का रिकवरी नोटिस जारी हुआ और जांच में ये चौंकाने वाले तथ्य निकलकर सामने आए।
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दस्तावेज लीक होने की पड़ताल: पुलिस अब इस बिंदु पर गहन जांच कर रही है कि जालसाजों ने 2008 में पुलिसकर्मी के राशन कार्ड व निजी दस्तावेज कहां से और कैसे हासिल किए। साथ ही फर्म के पंजीकरण में किन-किन बिचौलियों, चार्टर्ड अकाउंटेंट या विभागीय कर्मियों की मिलीभगत रही, उसकी कड़ियां भी जोड़ी जा रही हैं।
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