IIT Dhanbad Centenary Event: ‘उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको’; धनबाद आईआईटी में बोलीं पद्मश्री निवेदिता रघुनाथ भिड़े
धनबाद। आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में मंगलवार को शताब्दी वर्ष समारोह के तहत विशेष व्याख्यान का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में पद्मश्री से सम्मानित तथा विवेकानंद रॉक मेमोरियल एवं विवेकानंद केंद्र, कन्याकुमारी की अखिल भारतीय अध्यक्ष निवेदिता रघुनाथ भिड़े मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुईं। उन्होंने “उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्त होने तक मत रुको: युवाओं के लिए एक संदेश” विषय पर अपने विचार साझा किए। संस्थान के इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत विभाग के प्रोफेसर व समन्वयक प्रो. रवि कुमार गंगवार ने मुख्य अतिथि के परिचय से की।
🎓 केवल रोजगार नहीं, समग्र विकास है शिक्षा का उद्देश्य: निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आईआईटी (आईएसएम) के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार किसी एक दौर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे हर युग में युवाओं का मार्गदर्शन करने में सक्षम हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी या रोजगार पाना नहीं है, बल्कि व्यक्ति के चरित्र निर्माण, समग्र विकास और मानवता के प्रति जिम्मेदारी का भाव जगाना होना चाहिए। निदेशक ने विद्यार्थियों से स्वामी जी के सिद्धांतों को केवल याद करने के बजाय अपने दैनिक जीवन में ढालने की अपील की।
🇮🇳 ‘उठो, जागो और रुको मत’ केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, राष्ट्र निर्माण का मंत्र: निवेदिता भिड़े
अपने मुख्य संबोधन में पद्मश्री निवेदिता भिड़े ने स्वामी विवेकानंद के प्रसिद्ध आह्वान की विस्तृत व्याख्या की।
उन्होंने कहा कि यह मंत्र केवल व्यक्तिगत तरक्की के लिए नहीं है, बल्कि यह भारत के पुनरुत्थान और राष्ट्र निर्माण का सबसे बड़ा मार्गदर्शक है। उन्होंने बताया कि भारत की सांस्कृतिक विविधता इसकी कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने युवाओं से आलस्य, जड़ता और ईर्ष्या जैसी प्रवृत्तियों का त्याग कर अपने कर्तव्यों को पहचानने और राष्ट्रहित में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
📱 डिजिटल तकनीक और अनुशासन: ‘तकनीक से खोजें समाज की समस्याओं के समाधान’
युवाओं के जीवन में मोबाइल और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की भूमिका पर चर्चा करते हुए निवेदिता भिड़े ने कहा कि तकनीक एक अत्यंत शक्तिशाली माध्यम है।
इसके जरिए ज्ञान का विस्तार किया जा सकता है और सामाजिक समस्याओं के तकनीकी समाधान ढूंढे जा सकते हैं। हालांकि, उन्होंने सचेत किया कि अनुशासन के अभाव में यही तकनीक समय की बर्बादी का कारण बन जाती है। इसलिए युवाओं को एकाग्रता, आत्मविश्वास और आंतरिक अनुशासन बनाए रखने की आवश्यकता है।
🌿 विज्ञान और तकनीक को समाज व पर्यावरण से जोड़ें युवा: स्मृति चिन्ह देकर की गईं सम्मानित
आईआईटी के भावी इंजीनियरों और शोधकर्ताओं से संवाद करते हुए उन्होंने विज्ञान और प्रौद्योगिकी को समाज की व्यावहारिक जरूरतों से जोड़ने का सुझाव दिया।
उन्होंने कहा कि भारत को ऐसी तकनीकों के विकास पर ध्यान देना चाहिए जो मानव जीवन को आसान बनाने के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल भी हों। कार्यक्रम के समापन पर निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा ने निवेदिता भिड़े को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस दौरान संस्थान के प्राध्यापक, अधिकारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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