Kanker BSF Camp News: माओवाद के साये से निकलकर वर्दी के सपने; कांकेर के तुमापाल में BSF कैंप में उमड़े युवा
कांकेर। उत्तर बस्तर कांकेर जिले के अंतागढ़ ब्लॉक का तुमापाल गांव कभी माओवादी प्रभाव और खौफ के लिए जाना जाता था।सुरक्षा बलों की मौजूदगी और बंदूक की गूंज से जहाँ पहले डर का माहौल बनता था, आज उसी इलाके में सकारात्मक बदलाव की नई बयार बह रही है। यहाँ के स्थानीय युवा अब पुलिस और सशस्त्र बलों में भर्ती होकर देश सेवा का अपना सपना पूरा करने के लिए पूरे उत्साह के साथ आगे आ रहे हैं।
🛡️ तुमापाल बीएसएफ 28वीं वाहिनी का सराहनीय प्रयास: करियर मार्गदर्शन और भर्ती प्रक्रिया की दी जानकारी
तुमापाल स्थित सीमा सुरक्षा बल (BSF) की 28वीं वाहिनी के कैंप में स्थानीय ग्रामीण युवक-युवतियों के लिए पुलिस और सशस्त्र बलों में भर्ती को लेकर एक विशेष जागरूकता सह मार्गदर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय युवाओं ने भाग लिया। बीएसएफ अधिकारियों ने युवाओं को चयन प्रक्रिया, आवश्यक शैक्षणिक योग्यता, शारीरिक दक्षता परीक्षा, लिखित परीक्षा की तैयारी और सुरक्षा बलों में उज्ज्वल करियर के अवसरों के बारे में विस्तार से समझाया।
🇮🇳 कल तक जिससे दूरी, आज वही वर्दी बनी भविष्य का सपना: बदल रही युवाओं की सोच
इस जागरूकता अभियान की सबसे सुखद तस्वीर यह रही कि जिस वर्दी से कभी दूरी और भय का रिश्ता था, आज बस्तर के युवा उसी वर्दी को अपने गौरवमयी भविष्य से जोड़कर देख रहे हैं।
बीएसएफ अधिकारियों ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि कड़ी मेहनत और सही मार्गदर्शन के बल पर वे पुलिस, बीएसएफ और अन्य अर्द्धसैनिक बलों में शामिल होकर देश की रक्षा में अपना योगदान दे सकते हैं।
📋 6 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर: मेडिकल टेस्ट से लेकर योग्यता तक का मार्गदर्शन
बीएसएफ अधिकारियों ने बताया कि तुमापाल में बच्चों और युवाओं के लिए यह 6 दिवसीय विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
इसमें मुख्य रूप से मैट्रिक पास और अध्ययनरत युवाओं को करियर मार्गदर्शन दिया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, कई बच्चे सुरक्षा बलों में जाना चाहते हैं, इसलिए उन्हें मेडिकल टेस्ट, सिलेक्शन क्राइटेरिया और शारीरिक मानक की पूरी जानकारी दी जा रही है ताकि वे किसी भी भर्ती में पूरी तैयारी के साथ उतर सकें।
🌟 बदलते बस्तर की नई उम्मीद: बंदूकों की जगह युवाओं के हाथों में भविष्य संवारने के अवसर
तुमापाल में आयोजित यह कार्यक्रम केवल भर्ती की जानकारी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह माओवाद प्रभावित बस्तर में आ रहे सामाजिक और मानसिक बदलाव की जीती-जागती मिसाल है।
कभी जिस जमीन पर माओवाद का साया युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेलता था, आज वही जमीन युवाओं के नए सपनों और हौसलों की गवाह बन रही है। यह बदलाव सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर में ही नहीं, बल्कि लोगों की सोच और आकांक्षाओं में दिखाई दे रहा है।
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