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Iran Inflation Rate: ईरान में महंगाई दर पहुंची 69% के पार, भारत के मुकाबले 14 गुना ज्यादा बुरे हाल

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ईरान की अर्थव्यवस्था पर युद्ध और कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों का बेहद बुरा असर पड़ा है, जिसके चलते देश की जीडीपी में भारी गिरावट दर्ज की गई है और महंगाई ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, फारसी कैलेंडर की पहली तिमाही (मार्च के अंत से जून के अंत) के दौरान ईरान की जीडीपी एक साल पहले की तुलना में 10.1% लुढ़क गई है. इसी अवधि के दौरान ईरान अमेरिका और इजराइल के साथ संघर्ष में उलझा हुआ था, जबकि इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने वर्ष 2026 के लिए ईरान की औसत महंगाई 68.9% रहने का अनुमान जताया है.

🛢️ 2. तेल निर्यात में भारी गिरावट और मुद्रा कमजोर होने से बिगड़े हालात, भारत के मुकाबले 14 गुना ज्यादा है महंगाई

ईरान की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से तेल और गैस निर्यात पर टिकी है, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही घटने और अमेरिकी नाकाबंदी के कारण हालात बद से बदतर हो गए हैं. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च में ईरान से जहां प्रतिदिन करीब 20 लाख बैरल कच्चे तेल की लोडिंग होती थी, वहीं अगस्त में यह घटकर महज 2.2 लाख से 2.55 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई है. इसके अलावा, सितंबर की शुरुआत में खुले बाजार में 1 अमेरिकी डॉलर की कीमत 22 लाख रियाल को पार कर गई, जिससे खाने-पीने की चीजों की कीमतें आसमान छू रही हैं और औसत महंगाई 69.9% तक पहुंच गई है, जो भारत की खुदरा महंगाई (4.82%) से लगभग 14.3 गुना ज्यादा है.

🏭 3. इंडस्ट्री पर भी मंडरा रहा उत्पादन ठप होने का खतरा, कच्चे माल की कमी और घटता स्टॉक बना बड़ी चुनौती

युद्ध और आर्थिक प्रतिबंधों का दबाव ईरान के औद्योगिक क्षेत्र पर भी साफ दिखाई दे रहा है. अगस्त में देश का पर्चेसिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) गिरकर 46.9 पर आ गया है (50 से कम PMI आर्थिक गतिविधियों में गिरावट को दर्शाता है), जबकि कच्चे माल का स्टॉक इंडेक्स भी घटकर 39.3 रह गया है. लागत बढ़ने और कच्चे माल का भंडार घटने से कई फैक्ट्रियों की उत्पादन लाइनें धीमी पड़ चुकी हैं या उनके बंद होने का खतरा मंडरा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस गंभीर आर्थिक संकट से उबरने के लिए ईरान को युद्ध और प्रतिबंधों के चक्रव्यूह से बाहर निकलना होगा.

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