Chhattisgarh Politics News: दीपक बैज, भूपेश बघेल और सिंहदेव ने पढ़ाया सियासी पाठ; रायपुर शिविर में पहुंचे दिग्गज
रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस पार्टी द्वारा संगठन को धार देने और वर्ष 2028 के आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के सिलसिले में तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण शिविर का मुख्य उद्देश्य कैडर को वैचारिक रूप से मजबूत करना, जमीनी स्तर पर संगठन का विस्तार करना और अभी से चुनावी मोड में आना है। जोरा स्थित प्रतिष्ठा मांगलिक भवन में आयोजित इस शिविर में रायपुर संभाग के सभी ब्लॉक अध्यक्ष और मास्टर ट्रेनर शिरकत कर रहे हैं। मंच से पार्टी के वरिष्ठ नेता कार्यकर्ताओं को कांग्रेस की विचारधारा, धर्मनिरपेक्षता और वर्तमान राज्य सरकार की नीतियों व वित्तीय आंकड़ों का हिसाब समझाते हुए नजर आ रहे हैं।
🎯 74 ब्लॉक अध्यक्ष और मास्टर ट्रेनर ले रहे हैं हिस्सा: दिग्गज नेताओं ने किया शिविर का आगाज़
रायपुर संभाग के इस महत्वपूर्ण आवासीय प्रशिक्षण शिविर में संभाग के कुल 74 ब्लॉक अध्यक्षों तथा चयनित मास्टर ट्रेनरों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
प्रशिक्षण के दौरान संगठन संचालन, पार्टी की मूल विचारधारा, जनसरोकार के मुद्दे और बूथ स्तर की राजनीतिक गतिविधियों पर विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन दिया जा रहा है। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (PCC Chief) दीपक बैज, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव तथा पूर्व मंत्री शिवकुमार डहरिया समेत पार्टी के कई शीर्ष नेता एक मंच पर उपस्थित रहे।
📢 “प्रशिक्षण केवल कार्यक्रम नहीं, संगठन की रीढ़ है”: पीसीसी चीफ दीपक बैज का संबोधन
शिविर को संबोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के दिशा-निर्देशों पर आयोजित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि तीन दिनों तक चलने वाले इस शिविर में कांग्रेस की नीतियों, सिद्धांतों, इतिहास और संगठनात्मक कामकाज से जुड़े विषयों पर गहन मंथन होगा। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से पूरे तीन दिन तक अनुशासित रहकर आवासीय शिविर का हिस्सा बनने और सीखे गए पाठ को जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं तक पहुंचाने का आह्वान किया।
📚 भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव ने कार्यकर्ताओं को दिया सियासी मंत्र: वैचारिक और आर्थिक मुद्दों पर हुई चर्चा
प्रशिक्षण के पहले दिन पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ‘वर्तमान राजनीति में धर्म एवं धर्मनिरपेक्षता’ विषय पर अपना व्याख्यान दिया और कार्यकर्ताओं को पार्टी के वैचारिक मूल्यों से अवगत कराया।
वहीं, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने ‘छत्तीसगढ़ सरकार का राजस्व प्रबंधन और जनकल्याणकारी योजनाओं में व्यय’ विषय पर विस्तृत सत्र लिया, जिसमें उन्होंने राज्य सरकार के बजटीय आंकड़ों का विश्लेषण प्रस्तुत किया। इसके अतिरिक्त पूर्व मंत्री शिवकुमार डहरिया ने ‘सामाजिक समरसता’ विषय पर विचार रखे। शिविर में कांग्रेस का इतिहास, प्रशिक्षण की भूमिका और संगठन सृजन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा की गई।
🗺️ चार संभागों के सफल आयोजन के बाद रायपुर में अंतिम चरण: बस्तर से सरगुजा तक चला अभियान
उल्लेखनीय है कि रायपुर से पूर्व कांग्रेस पार्टी राज्य के अन्य चार प्रमुख संभागों—बस्तर, दुर्ग, बिलासपुर और सरगुजा में इसी तरह के त्रि-दिवसीय संभागीय प्रशिक्षण शिविर सफलतापूर्वक आयोजित कर चुकी है।
सरगुजा और बस्तर संभाग के शिविरों में भी पार्टी ने संगठन को बूथ स्तर तक पुनर्गठित करने और मैदानी स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया था। रायपुर संभाग का यह शिविर इस श्रृंखला का अंतिम और अत्यंत महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।
🗳️ 2028 के लिए धरातल पर बिछ रही है बिसात: ब्लॉक स्तर पर संगठन को सक्रिय करने की रणनीति
यद्यपि कांग्रेस पार्टी आधिकारिक तौर पर इसे नियमित ‘संगठन सृजन एवं प्रशिक्षण अभियान’ करार दे रही है, लेकिन लगातार संभागवार आयोजनों और ब्लॉक अध्यक्षों की अनिवार्य भागीदारी से स्पष्ट है कि पार्टी का मुख्य ध्येय आगामी विधानसभा चुनावों के लिए ठोस धरातल तैयार करना है। हालिया संभागीय बैठकों में बूथ स्तर के प्रबंधन और राज्य सरकार की विफलताओं को जनता के बीच ले जाने पर विस्तार से चर्चा हुई है।
🔍 राजनीतिक रूप से क्यों अहम माना जा रहा है रायपुर शिविर?
रायपुर में आयोजित इस शिविर पर राज्य के राजनीतिक विश्लेषकों की पैनी नजर बनी हुई है।
चूंकि इस मंच पर प्रदेश कांग्रेस के लगभग सभी अग्रिम पंक्ति के नेता एक साथ एकजुट नजर आ रहे हैं, इसलिए इस आयोजन के गहरे राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। भले ही यह मंच संगठनात्मक प्रशिक्षण के लिए तैयार किया गया हो, लेकिन नेताओं की संयुक्त मौजूदगी और कार्यकर्ताओं को दिए जा रहे संदेश से आने वाले समय में पार्टी की रणनीतिक प्राथमिकताओं के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं।
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