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Raipur News Today: संवैधानिक आरक्षण बचाओ रैली में गरजे ‘जेन जी’ युवा; राज्यपाल के नाम सौंपा 20 सूत्रीय ज्ञापन

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रायपुर। राजधानी रायपुर में रविवार को ‘जेन जी’ (Gen Z) युवा वर्ग, छत्तीसगढ़ के नेतृत्व में एक विशाल ‘संवैधानिक आरक्षण बचाओ रैली’ का सफल आयोजन किया गया। अंबेडकर चौक से प्रारंभ हुई इस आक्रोश रैली में राज्य के बस्तर से लेकर सरगुजा तक, सभी जिलों से भारी संख्या में छात्र, कर्मचारी, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा और प्रबुद्ध नागरिक शामिल हुए। रैली के समापन पर महामहिम राज्यपाल के नाम 20 सूत्रीय मांग पत्र (ज्ञापन) सौंपा गया। इस ज्ञापन में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के संवैधानिक अधिकारों, सरकारी नौकरियों, शिक्षा और सामाजिक प्रतिनिधित्व से जुड़े अति-महत्वपूर्ण विषयों को प्रमुखता से उठाया गया है।

📈 पदोन्नति में आरक्षण लागू करने की जोरदार मांग: बिना रोस्टर वाली पदोन्नतियों पर रोक की अपील

रैली के दौरान वक्ताओं ने एससी और एसटी वर्ग के सरकारी कर्मचारियों के लिए पदोन्नति (Promotion) में आरक्षण को यथाशीघ्र लागू करने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया।

आयोजकों ने मांग की कि ‘आरक्षण नियम-5’ को पुनः अधिसूचित किया जाए और माननीय उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के अंतरिम आदेशों के अनुरूप पदोन्नति में पारदर्शी आरक्षण दिया जाए। इसके अलावा, बिना किसी स्वीकृत आरक्षण रोस्टर के की जा रही सभी विभागीय पदोन्नतियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का आग्रह किया गया।

📋 आरक्षण रोस्टर का नियमित अद्यतनीकरण और लंबित बैकलॉग पदों पर विशेष भर्ती अभियान

ज्ञापन में ‘छत्तीसगढ़ लोक सेवा आरक्षण अधिनियम, 1994’ और ‘आरक्षण नियम, 1998’ का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने का दबाव बनाया गया।

मांग की गई कि शासन के सभी विभागों में आरक्षण रोस्टर का नियमित संधारण और अपडेशन किया जाए। साथ ही, पृथक राज्य गठन के समय से लेकर अब तक रिक्त पड़े बैकलॉग पदों का आधिकारिक ब्यौरा सार्वजनिक किया जाए और विशेष भर्ती अभियान (Special Recruitment Drive) चलाकर इन सभी पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाए।

📊 SC को 13% और OBC को 27% आरक्षण देने की हुंकार: सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने पर जोर

रैली में मौजूद युवाओं ने अनुसूचित जाति (SC) वर्ग को 13 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27 प्रतिशत आरक्षण की पुरानी मांग को पुनर्जीवित किया।

युवा प्रतिनिधियों का कहना था कि उच्च शिक्षा संस्थानों और सरकारी नौकरियों में सभी वर्गों की आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार को बिना किसी विलंब के ठोस और प्रभावी कानूनी कदम उठाने चाहिए।

💼 आउटसोर्सिंग व संविदा भर्तियों की समीक्षा: प्राइवेट सेक्टर में भी स्थानीय युवाओं को मिले आरक्षण

युवाओं ने सरकारी विभागों में प्लेसमेंट एजेंसियों, आउटसोर्सिंग और संविदा (Contractual) के आधार पर होने वाली भर्तियों में आरक्षण नियमों के खुले उल्लंघन पर चिंता जताई।

उन्होंने मांग की कि किसी भी संविदाकर्मी या आउटसोर्स कर्मचारी के नियमितीकरण से पूर्व उसके सामाजिक प्रतिनिधित्व का पारदर्शी आकलन किया जाए। इसके साथ ही, राज्य सरकार की अनुमति या अनुदान से संचालित निजी उद्योगों और व्यावसायिक संस्थानों में स्थानीय छत्तीसगढ़िया SC, ST और OBC युवाओं के लिए निश्चित आरक्षण व रोजगार कोटा निर्धारित करने की मांग की गई।

💰 SCSP व TSP बजट का पारदर्शी उपयोग: 15-20% राशि युवाओं के स्वरोजगार के लिए हो आरक्षित

रैली में अनुसूचित जाति उपयोजना (SCSP) और जनजातीय उपयोजना (TSP) के लिए आवंटित बजट के डायवर्जन पर रोक लगाने और उसे केवल लक्षित समूहों के विकास के लिए सुरक्षित रखने की मांग की गई।

आयोजकों ने इन निधियों के पारदर्शी संचालन हेतु अलग से विधायी तंत्र बनाने का सुझाव दिया। साथ ही, इस बजट का कम से कम 15 से 20 प्रतिशत हिस्सा एससी-एसटी युवाओं के कौशल विकास, व्यावसायिक प्रशिक्षण और आजीविका/स्वरोजगार योजनाओं के लिए सीधे आरक्षित करने का प्रस्ताव रखा।

🏔️ आदिवासी विकास निधि और नीतियां: अनुच्छेद 275(1) की राशि के सही इस्तेमाल की वकालत

ज्ञापन में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत केंद्र और राज्य से प्राप्त होने वाले कोष का उपयोग केवल और केवल जनजातीय समुदायों के वास्तविक उत्थान एवं कल्याणकारी योजनाओं में करने की हिदायत दी गई।

इसके अतिरिक्त, आदिवासियों से जुड़ी विकास योजनाएं बनाते समय स्थानीय जनजातीय प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य करने पर जोर दिया गया।

🌲 PESA और वन अधिकार कानून (FRA) का पूर्ण क्रियान्वयन: ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने की अपील

आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों के अधिकारों की बात करते हुए रैली में ‘पेसा कानून’ (PESA Act) और ‘अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम’ (FRA) का जमीनी स्तर पर कड़ाई से पालन कराने का आह्वान किया गया।

मांग की गई कि संविधान की 5वीं अनुसूची के अंतर्गत आने वाले सभी क्षेत्रों में ग्राम सभाओं और स्वायत्त स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को संवैधानिक अधिकारों के अनुरूप वास्तविक शक्तियां देकर सशक्त बनाया जाए।

🏛️ शासन-प्रशासन और नीति-निर्माण निकायों में आरक्षित वर्गों को मिले उचित प्रतिनिधित्व

आयोजकों ने शासन, शीर्ष प्रशासन, विभिन्न राज्य आयोगों, विकास बोर्डों और नीति-निर्धारण करने वाली सर्वोच्च संस्थाओं में एससी, एसटी और OBC वर्गों की आनुपातिक उपस्थिति सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

इसके साथ ही, प्रशासनिक सेवाओं, पदोन्नति और सेवाकाल से संबंधित मामलों में आरक्षित वर्गों को मिलने वाली सभी संवैधानिक रियायतों व शिथिलताओं का अक्षरशः अनुपालन करने की मांग रखी गई।

🎓 छात्रवृत्ति दर में वृद्धि और विश्वविद्यालयों में ‘सामाजिक न्याय सुरक्षा तंत्र’ की स्थापना

ज्ञापन में दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले गरीब SC, ST और OBC विद्यार्थियों की पोस्ट-मैट्रिक व उच्च शिक्षा छात्रवृत्ति की राशि बढ़ाने और उसके प्रतिमाह समय पर सीधे बैंक खातों में भुगतान (DBT) की पारदर्शी व्यवस्था की मांग की गई।

साथ ही, राज्य के सभी विश्वविद्यालयों, मेडिकल/इंजीनियरिंग कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों में ‘सामाजिक न्याय सुरक्षा सेल’ तथा प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र (Grievance Redressal System) स्थापित करने का सुझाव दिया गया।

📜 आरक्षण पर विधानसभा में वार्षिक रिपोर्ट पेश करने की अनिवार्यता

रैली के माध्यम से ‘छत्तीसगढ़ लोक सेवा आरक्षण अधिनियम, 1994’ की धारा 19 का हवाला देते हुए मांग की गई कि राज्य सरकार प्रतिवर्ष राज्य विधानसभा के सत्र में आरक्षण के क्रियान्वयन, नई भर्तियों, रिक्त पड़े बैकलॉग पदों और सरकारी नौकरियों में सामाजिक प्रतिनिधित्व की स्थिति पर एक विस्तृत और आधिकारिक ‘वार्षिक रिपोर्ट’ (Annual Report) पटल पर प्रस्तुत करे।

⚖️ आदिवासी भूमि सुरक्षा, न्यायपालिका में प्रतिनिधित्व और जाति प्रमाण-पत्र प्रक्रिया का सरलीकरण

ज्ञापन में अनुसूचित जनजाति की जमीनों के गैर-कानूनी अंतरण को रोकने के लिए भू-राजस्व कानूनों की समीक्षा करने का आग्रह किया गया।

साथ ही, उच्च न्यायपालिका (High Court) में आरक्षित वर्गों की नगण्य उपस्थिति पर ध्यान आकर्षित करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर नीतिगत विमर्श की मांग उठाई गई। इसके अलावा, दूरस्थ ग्रामीण इलाकों के बच्चों के लिए स्थाई जाति, निवास और आय प्रमाण-पत्र जारी करने की जटिल प्रशासनिक प्रक्रिया को बेहद सरल और एकल-खिड़की आधारित बनाने का अनुरोध किया गया।

🛑 समय-सीमा के भीतर कार्रवाई न होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी: शीतकालीन सत्र से पहले घेराव के संकेत

रैली के आयोजकों ने राज्य सरकार से अत्यंत संवेदनशील मांगों पर 1 महीने के भीतर तथा नीतिगत मांगों पर 3 महीने के भीतर कृत कार्रवाई रिपोर्ट (Action Taken Report) जारी करने का समय दिया है।

युवा नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि दी गई समय-सीमा के भीतर राज्य सरकार ने सकारात्मक और ठोस कदम नहीं उठाए, तो पूरे प्रदेश में व्यापक ‘जनजागरण अभियान’ चलाया जाएगा। इसके अलावा, आगामी शीतकालीन विधानसभा सत्र के दौरान राजधानी रायपुर में राज्यस्तरीय ‘आरक्षण बचाओ महारैली’ और विधानसभा घेराव का शंखनाद किया जाएगा।

🤝 सामाजिक न्याय और एकजुटता का संदेश: बस्तर से सरगुजा तक के युवा रहे शामिल

इस ऐतिहासिक रैली में बस्तर के अबुझमाड़ से लेकर सरगुजा के पहाड़ों तक, प्रदेश के कोने-कोने से आए युवाओं, छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने अभूतपूर्व एकजुटता का परिचय दिया।

आयोजकों ने रैली में पहुंचे सभी कार्यकर्ताओं और आम जनता का सहहृदय धन्यवाद ज्ञापित करते हुए राज्य शासन से संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाकर ज्ञापन की सभी जायज मांगों पर शीघ्र कार्रवाई करने की अपील की है।

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