Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
जालंधर की डॉक्टर के सोशल मीडिया वीडियो से मचा हड़कंप: LPU छात्रों को लेकर किए सनसनीखेज दावे Punjab Power Crisis: पंजाब में बिजली संकट गहराया, मांग 16,600 मेगावाट पार; जालंधर में सड़कों पर उतरे... Yamunanagar News: टोडरपुर गांव में बंदर को जिंदा निगल गया 15 फीट लंबा अजगर, वन्य जीव विभाग ने किया स... Homemade Soap for Sensitive Skin: घर पर बनाएं नेचुरल नीम-एलोवेरा साबुन, ड्राई स्किन और फंगल इंफेक्शन... Ranchi Crime News: रांची में डॉक्टर से 80.60 लाख रुपये की धोखाधड़ी, रिश्तेदार समेत 6 लोगों पर FIR दर... Ranchi Cyber Crime: बैंक ऑफ इंडिया के फर्जी ऐप से 70 वर्षीय बुजुर्ग से 4.90 लाख की ठगी, 6 आरोपियों प... Khunti Human Trafficking: खूंटी पुलिस ने नाकाम की मानव तस्करी की साजिश, 20 हजार की नौकरी का झांसा दे... Haryana Weather Update: हरियाणा में फिर सक्रिय हुआ मानसून, 18 सितंबर तक झमाझम बारिश; यमुनानगर में आं... Haryana Sports News: बहादुरगढ़ में 1600 तैराकों का महाकुंभ, मुख्य अतिथि अविनाश चोपड़ा ने की अनिल खत्... How to Deactivate FASTag: पुरानी कार बेच दी है तो तुरंत डिएक्टिवेट करें FASTag, वरना कटता रहेगा आपका...

Bareilly News: बरेली में जन्मांध गाय ने दिया 74 किलो के बछड़े को जन्म, IVRI के वैज्ञानिक भी करिश्मा देख हैरान

3

बरेली (उत्तर प्रदेश): प्रकृति के अद्भुत और हैरान कर देने वाले रहस्यों के बीच उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से एक अत्यंत दुर्लभ मामला प्रकाश में आया है।

नकटिया क्षेत्र के पास सेवानिवृत्त पुलिस उपाधीक्षक (पूर्व सीओ) वीरेंद्र सिंह यादव द्वारा संचालित ‘यदु नंदिनी गौशाला’ में एक जन्मांध (दृष्टिहीन) गाय ने 74 किलोग्राम के अत्यंत वजनी और स्वस्थ बछड़े को जन्म दिया है। सामान्यतः गाय के बछड़े का जन्म के समय औसत वजन लगभग 27 से 32 किलोग्राम के आसपास होता है, किंतु इस बछड़े का वजन सामान्य औसत से करीब ढाई से तीन गुना अधिक दर्ज किया गया है। गुरुवार के पावन दिन जन्म लेने के कारण इसका नामकरण ‘गुरु’ किया गया है। सुखद बात यह है कि प्रसव के पश्चात बछड़ा और उसकी मां दोनों पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित हैं।

🩺 अमेरिकन होल्स्टीन फ्रीजियन नस्ल की है मां: तीसरा प्रसव कराकर डॉक्टरों ने बचाई जान

गौशाला संचालक और प्रसव से जुड़े विवरण:

  • गाय की पहचान: गौशाला संचालक वीरेंद्र सिंह यादव के अनुसार, बछड़े को जन्म देने वाली गाय का नाम ‘काजल’ है, जो विदेशी अमेरिकन नस्ल होल्स्टीन फ्रीजियन (HF) की है।

  • जन्म से दृष्टिहीन: काजल जन्म से ही दोनों आंखों से देख पाने में असमर्थ है।

  • सफल प्रसव: यह काजल का तीसरा प्रसव था, जिसे अत्यधिक वजन और जटिलता के कारण पशु चिकित्सकों के विशेष दल की देखरेख में सफलता से संपन्न कराया गया।

  • उमड़ रही भीड़: असामान्य रूप से विशालकाय बछड़े के जन्म का समाचार फैलते ही आसपास के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों से भारी संख्या में लोग इस चमत्कार को देखने पहुंच रहे हैं।

🔬 IVRI के वैज्ञानिकों ने जताई हैरानी: ‘मस्कुलर हाइपरट्रॉफी’ हो सकता है कारण

पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के विशेषज्ञों का दृष्टिकोण:

  • अत्यंत दुर्लभ घटना: भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अभिजीत पावड़े के अनुसार, सामान्य चिकित्सीय इतिहास में इतने अधिक वजन के बछड़े का जन्म लेना अत्यंत विरल और लगभग असंभव माना जाता है।

  • वैज्ञानिक दृष्टिकोण: विशेषज्ञों का मानना है कि जेनेटिक कारणों से होने वाले ‘मस्कुलर हाइपरट्रॉफी सिंड्रोम’ (Muscular Hypertrophy Syndrome) के मामलों में मांसपेशियों का अत्यधिक विकास हो जाता है, जिससे नवजात का वजन असामान्य रूप से बढ़ जाता है।

  • अध्ययन का विषय: पशु चिकित्सा जगत के लिए 74 किलोग्राम के स्वस्थ बछड़े का जन्म एक गहन अध्ययन और शोध का विषय बन गया है।

🌟 11 लाख की ‘स्वर्ण कपिला’ को बेचने से किया था इनकार: गौसेवा में समर्पित पूर्व पुलिस अधिकारी

गौशाला की विशेषताएं और दुर्लभ नस्लें:

  • सेवानिवृत्ति के बाद समर्पण: वीरेंद्र सिंह यादव वर्ष 2018 में बदायूं से पुलिस उपाधीक्षक (CO) पद से सेवानिवृत्त हुए थे और तब से पूर्णतः गौसेवा में लीन हैं।

  • विविध नस्लों का संरक्षण: उनकी गौशाला में साहिवाल, गिर, थारपारकर और अमेरिकन नस्ल की करीब 60 गायें मौजूद हैं। इसके अतिरिक्त 3 दुर्लभ ‘स्वर्ण कपिला’ गायें और देश की सबसे लघु कद की ‘पुंगनूर’ नस्ल की गाय भी पाली जा रही है।

  • लाखों की पेशकश ठुकराई: राजस्थान के एक पशुपालक ने उनकी स्वर्ण कपिला गाय के लिए 11 लाख रुपये तक की पेशकश की थी, जिसे उन्होंने गौसेवा के संकल्प के चलते ठुकरा दिया।

  • सेवा में खर्च होती है आय: गौशाला के दुग्ध उत्पादन से प्राप्त होने वाली एक लाख रुपये से अधिक की मासिक आय को पूरी तरह गौवंश के चारे, दवाओं और देखभाल पर ही व्यय किया जाता है। वर्तमान में 74 किलो का ‘गुरु’ पूरे क्षेत्र में कौतूहल और चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.