Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
दिल्ली के व्यापारियों ने राहुल गांधी को लिखा पत्र, दिवाली के सीजन में 1 नवंबर की महारैली को स्थगित क... Supreme Court on Real Estate Projects: 'हर अटके प्रोजेक्ट के लिए सुप्रीम कोर्ट फोरम नहीं बन सकता', ह... जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस में आंतरिक असंतोष... Allahabad High Court News: अदालत में हंगामा और तोड़फोड़ करने वाले वकीलों पर हाईकोर्ट सख्त, सीसीटीवी ... दिल्ली-एनसीआर में कोहराम मचाने वाला एक लाख का इनामी कुख्यात बदमाश धर्मेंद्र बावरिया गाजियाबाद में पु... Madhepura News: जेएनकेटी मेडिकल कॉलेज के 5वीं मंजिल से ग्रिल और बेडशीट के सहारे भागे दो कैदी गिरफ्ता... NPPA Cancer Drugs Price Drop: कैंसर के मरीजों को बड़ी राहत, NPPA ने जारी की 543 दवाओं के संशोधित MRP... Delhi BJP Padayatra: चांदनी चौक में बीजेपी की ‘लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ’ पदयात्रा, सीएम रेखा गुप्त... Noida News: दिवाली पर 5100 रुपए बोनस मिलने का वायरल मैसेज निकला फर्जी, सुप्रीम कोर्ट के नाम पर फैलाए... Delhi Voter List SIR Update: फॉर्म-6 और फॉर्म-8 के विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने ECI से पूछा सवाल, लाखों...

गणेशोत्सव पर बप्पा की स्थापना: केवल पूजा ही नहीं, वास्तु नियमों का पालन भी बेहद जरूरी

27

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से शुरू होने वाला गणेशोत्सव सनातन धर्म के सबसे पवित्र और प्रमुख त्योहारों में से एक है।

भगवान श्री गणेश को बुद्धि, ऋद्धि-सिद्धि और विघ्नहर्ता का दर्जा प्राप्त है। इसी कारण उनके जन्मोत्सव के इस पावन पर्व पर श्रद्धालु अत्यंत श्रद्धा, भाव और उल्लास के साथ बप्पा को अपने घरों व पंडालों में विराजमान करते हैं। वर्ष 2026 में गणेशोत्सव 14 सितंबर से प्रारंभ हो रहा है, जिसका समापन 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन विसर्जन के साथ होगा। यदि आप भी इस पावन अवसर पर अपने घर में गणपति बप्पा की प्रतिमा स्थापित करने जा रहे हैं, तो विधि-विधान से पूजा के साथ-साथ वास्तु शास्त्र के नियमों का पालन करना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है। सही दिशा और नियमों के साथ की गई स्थापना घर में सुख, शांति और समृद्धि का संचार करती है।

🧭 गणेश जी की मूर्ति के लिए कौन सी दिशा सबसे शुभ? ईशान कोण को माना गया है सर्वोत्तम

मूर्ति स्थापना के लिए सही दिशा का चयन:

  • ईशान कोण (उत्तर-पूर्व): वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करने के लिए उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण सबसे पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर स्थान माना जाता है। आध्यात्मिक साधना और देव-पूजन के लिए यह दिशा सर्वोत्तम है।

  • वैकल्पिक दिशाएं: यदि घर की बनावट के कारण ईशान कोण में पर्याप्त स्थान उपलब्ध न हो, तो गणपति बप्पा को उत्तर दिशा या फिर पश्चिम दिशा में भी विधिपूर्वक स्थापित किया जा सकता है।

  • दक्षिण दिशा से परहेज: मूर्ति स्थापना के समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि बप्पा की पीठ या मुख का संरेखण दक्षिण दिशा की ओर न हो।

👁️ गणपति बप्पा का मुख और पीठ किस दिशा में हो? जानें पीठ की ओर दरिद्रता का रहस्य

मुख की दिशा और धार्मिक मान्यताएं:

  • घर के अंदर की ओर मुख: भगवान गणेश की मूर्ति इस प्रकार स्थापित करनी चाहिए कि उनका मुख सदैव घर के आंतरिक हिस्से की ओर रहे, जिससे पूजा-अर्चना करते समय साधक का मुख बप्पा के सम्मुख रहे।

  • पीठ का रहस्य: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश की पीठ में दरिद्रता और अभाव का वास माना गया है, जबकि उनके सम्मुख भाग (सामने) में सुख, ऐश्वर्य और समृद्धि का वास होता है।

  • दीवार की ओर हो पीठ: यही कारण है कि बप्पा की प्रतिमा को इस प्रकार स्थापित किया जाता है कि उनकी पीठ किसी दीवार की तरफ रहे और घर के किसी भी खुले कमरे अथवा मुख्य हॉल की तरफ उनकी पीठ न दिखे।

🚫 कहां नहीं रखनी चाहिए गणेश जी की प्रतिमा? इन स्थानों पर स्थापना से बचें

स्थान के चयन से जुड़े महत्वपूर्ण नियम:

  • जमीन पर न रखें: भगवान गणेश की पावन प्रतिमा को कभी भी सीधे फर्श या जमीन पर नहीं रखना चाहिए।

  • चौकी या पाटे का प्रयोग: बप्पा को स्थापित करने के लिए लकड़ी की साफ चौकी या पाटे पर नया लाल अथवा पीला वस्त्र बिछाकर ही विराजमान करना चाहिए।

  • अपवित्र स्थानों से दूरी: पूजा स्थल पूरी तरह शुद्ध, शांत और प्रकाशमान होना चाहिए। सीढ़ियों के नीचे, बेडरूम या शौचालय की दीवार से सटे स्थान पर मूर्ति कभी स्थापित न करें।

🌿 कैसी होनी चाहिए गणपति की प्रतिमा? मिट्टी की मूर्ति स्थापना की परंपरा

प्रतिमा के स्वरूप से जुड़े नियम:

  • मिट्टी की इको-फ्रेंडली मूर्ति: गणेश चतुर्थी पर घर में हमेशा प्राकृतिक मिट्टी (शाडू माटी) से निर्मित प्रतिमा ही लानी चाहिए।

  • सहज विसर्जन: मिट्टी की प्रतिमा पर्यावरण के अनुकूल होती है और गणेशोत्सव संपन्न होने पर उसका विसर्जन घर में ही किसी पवित्र गमले या जलपात्र में सरलता से किया जा सकता है।

  • बैठी हुई मुद्रा: गृहस्थ जीवन के लिए बैठी हुई मुद्रा में विराजमान और बाईं ओर मुड़ी हुई सूंड वाले गणपति जी की प्रतिमा को अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है।

🙏 स्थापना और दैनिक पूजन के समय इन विशेष बातों का रखें ध्यान

दैनिक पूजा और मर्यादा के नियम:

  • शुद्धता और संकल्प: चतुर्थी के दिन प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें।

  • प्रिय वस्तुओं का अर्पण: स्थापना के उपरांत भगवान गणेश को उनकी अत्यंत प्रिय दूर्वा (दूब घास), लाल पुष्प, गंध, अक्षत और मोदक या लड्डू का भोग अर्पित करें।

  • नियमित आरती और भोग: जितने भी दिन (डेढ़, तीन, पांच, सात या दस दिन) बप्पा घर में विराजित रहें, प्रतिदिन सुबह और शाम दोनों समय विधि-विधान से आरती करें और सात्विक भोग लगाएं।

  • पवित्रता का वातावरण: बप्पा के प्रवास के दौरान घर में सात्विक माहौल बनाए रखें, किसी भी प्रकार के कलह, तामसिक भोजन अथवा अपवित्रता से पूर्णतः दूर रहें।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.