Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
EVM में टोटलाइजर से क्यों नहीं हो सकती वोटों की गिनती?: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग से मां... किशनगंज: खकवा नदी के तेज बहाव में तैरकर जनाजा ले जाने की मजबूरी, ग्रामीणों ने डीएम और बिहार सरकार से... शिवपुरी में रहस्यमयी बीमारी का कहर: 10 दिनों में एक ही परिवार के 4 बच्चों की मौत, डेंगू-मलेरिया निगे... भारतीय मुसलमानों के अधिकारों के लिए 51 सदस्यीय राष्ट्रीय निगरानी समिति का गठन: नई दिल्ली में ऐलान अफगानिस्तान टी20 सीरीज के लिए टीम इंडिया का ऐलान: श्रेयस अय्यर बने कप्तान, युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी... 'सैयारा' फेम अनीत पड्डा की नई सीरीज 'हुंकार: द रोर' का टीजर रिलीज: जानें कहानी, स्टार कास्ट और OTT र... नेपाल में 180 km/h की रफ्तार से आई 'हिमालयी सुनामी': रसुवा-धाडिंग में भारी तबाही, सुरंगों में बचाव क... LIC के दो नए धमाकेदार प्लान: गारंटीड सेविंग्स के साथ मिलेगा प्योर लाइफ कवर, 7 सितंबर से शुरू होगी बि... UPI का नया रिकॉर्ड: अगस्त में ₹29.82 लाख करोड़ का लेनदेन, कुल 2,451 करोड़ ट्रांजेक्शन दर्ज; NPCI ने ... श्रीकृष्ण के सबसे प्रिय भोग माखन-मिश्री और पंचामृत की विधि; जानें मलाई से शुद्ध माखन बनाने का आसान न...

नेपाल में 180 km/h की रफ्तार से आई ‘हिमालयी सुनामी’: रसुवा-धाडिंग में भारी तबाही, सुरंगों में बचाव के लिए भारत की विशेष टीम तैनात

2

काठमांडू (नेपाल): नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद रसुवा और आसपास के पर्वतीय इलाके भीषण मानवीय त्रासदी का सामना कर रहे हैं।

इस प्रलयंकारी आपदा में अब तक करीब 900 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि लगभग 4,000 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इस बीच नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थिति की भयावहता को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह कोई सामान्य मौसमी बाढ़ नहीं, बल्कि एक ‘हिमालयी सुनामी’ है। उन्होंने बताया कि पानी की लहरों की ऊंचाई 20 से 30 मीटर तक थी और इसकी गति 180 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई थी, जिसने बवंडर की तरह सब कुछ तहस-नहस कर दिया।

🏚️ 10 नगरपालिकाओं में भारी तबाही: घर, स्कूल और पनबिजली परियोजनाएं क्षतिग्रस्त

आपदा से हुए नुकसान का आकलन:

  • सर्वाधिक प्रभावित जिले: ‘काठमांडू पोस्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती आकलन में नुवाकोट, रसुवा और धाडिंग की 10 नगरपालिकाओं में अत्यधिक नुकसान दर्ज किया गया है। इसके अतिरिक्त गोरखा और चितवन के निचले इलाकों में भी भारी तबाही हुई है।

  • बुनियादी ढांचे का विनाश: बाढ़ के तेज बहाव में हजारों निजी आवास जमींदोज हो गए हैं, शिक्षण संस्थान ध्वस्त हो गए हैं और अरबों रुपये की लागत वाली भूमिगत व सतही पनबिजली (हाइड्रोपावर) परियोजनाओं को भारी क्षति पहुंची है।

🇮🇳 सबसे पहले पहुंचा भारतीय विशेष सुरंग बचाव दल: 72 घंटे में अंतरराष्ट्रीय अभियान

रेस्क्यू ऑपरेशन और भारत की भूमिका:

  • तत्काल आपात बैठक: सुबह 11 बजे बाढ़ का पानी धाडिंग की ओर बढ़ते ही प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय आपदा परिषद की आपात बैठक बुलाई और सुरक्षा बलों को राहत कार्य में झोंक दिया।

  • सुरंगों में फंसे मजदूर: दूसरे दिन भूमिगत जलविद्युत परियोजनाओं के निरीक्षण के बाद सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए विशेष रेस्क्यू टीम की आवश्यकता महसूस हुई।

  • भारतीय दल का त्वरित एक्शन: खराब मौसम और उड़ानें रद्द होने के बावजूद भारतीय विशेष सुरंग बचाव दल तीसरे दिन शाम तक सबसे पहले ग्राउंड जीरो पर पहुंच गया। चीनी दल चौथे दिन पहुंचा और दक्षिण कोरियाई दल ऊपरी त्रिशूली स्थल पर बचाव कार्य में जुटा हुआ है।

💔 ‘नागरिकों की जान केवल संख्या नहीं’: लापता लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना

नेपाल सरकार का मानवीय रुख:

  • परिवारों का दर्द: विदेश मंत्री ने लापता लोगों के परिजनों की निराशा और पीड़ा के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।

  • हर संसाधन झोंकने का वादा: उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का एकमात्र लक्ष्य सभी लापता व्यक्तियों की तलाश करना है। उन्होंने कहा कि प्रशासन के लिए प्रत्येक नागरिक का जीवन मात्र एक आंकड़ा नहीं, बल्कि पूरे परिवार का भविष्य, उम्मीद और खुशी का प्रतीक है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.