Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Ajay Devgn Highest Grossing Films: 'दृश्यम 3' की ताबड़तोड़ कमाई, क्या अजय देवगन की ये फिल्म तोड़ पाए... सऊदी अरब पर हूती हमलों के बीच रियाद में अहम बैठक: मक्का डिफेंस पैक्ट एक्टिवेट, पाकिस्तान और तुर्की क... Food Inflation India: खाने-पीने की चीजों की महंगाई पर आरबीआई और अर्थशास्त्रियों की चेतावनी, क्या और ... WhatsApp Scam Alert Feature: वॉट्सऐप लाने जा रहा है स्कैम अलर्ट फीचर, अनजान नंबरों के फ्रॉड से बचाएग... Pitru Visarjan Amavasya 2026: पूर्वजों को समर्पित सर्वपितृ अमावस्या पर इस विधि से करें श्राद्ध और तर... Coloured Cities of India: भारत के इन 5 खूबसूरत शहरों को क्यों कहा जाता है रंगों के नाम से, जानिए इसक... Delhi Police ACP Promotion Controversy: जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में घिरे विवेक भगत, दिल्ली सरकार ने... Harmanpreet Kaur Resigns: हरमनप्रीत कौर ने छोड़ी भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तानी, तीनों फॉर्मेट ... Justice Nitin Sambre Appointed: जस्टिस डीके उपाध्याय के सुप्रीम कोर्ट में प्रमोट होने के बाद जस्टिस ... West Bengal By-Election: नंदीग्राम और रेजीनगर पर महासंग्राम, बंगाल में बीजेपी के पहले राजनीतिक परीक्...

कालकाजी में कूड़े के ढेर के पास मिले पूर्व नेवी डॉक्टर: अमेरिका में बैठी पत्नी-बेटे ने अंतिम संस्कार से मोड़ा मुंह, चाचा ने किया दाह-संस्कार

14

नई दिल्ली: दूसरों को जीवनदान देने और जिंदगी भर लोगों की धड़कनें बचाने वाले एक सम्मानित चिकित्सक की अपनी जिंदगी की अंतिम सांसें इतनी खामोशी और तन्हाई में थमीं कि आखिरी वक्त पर कोई अपना पास तक नहीं था।

70 वर्षीय अरविंद नाथ पाठक भारतीय नौसेना (Indian Navy) में वरिष्ठ डॉक्टर के पद पर सेवाएं दे चुके थे। सेवानिवृत्ति के बाद वह दक्षिण दिल्ली के कालकाजी स्थित एन-ब्लॉक में अकेले निवास कर रहे थे। उनकी मौत के बाद जब दिल्ली पुलिस ने अमेरिका में रह रही उनकी पत्नी और बेटे से संपर्क किया, तो दोनों ने अंतिम विदाई के लिए भारत आने से साफ इनकार कर दिया। जिस बेटे के उज्ज्वल भविष्य के लिए उन्होंने जिंदगी भर सपने बुने, वही बेटा पिता के अंतिम सफर में कंधा देने तक नहीं पहुंचा।

😔 सोनीपत के कपड़ा व्यापारी जैसा दोहराव: वीडियो कॉल और पैसों से पल्ला झाड़ती संतानें

बुजुर्गों के साथ संतानों की ऐसी अमानवीय बेरुखी का यह कोई पहला मामला नहीं है:

  • सोनीपत का चर्चित मामला: कुछ दिन पूर्व हरियाणा के सोनीपत में भी ऐसा ही हृदयविदारक मामला सामने आया था, जहां एक प्रतिष्ठित कपड़ा व्यापारी अपने अंतिम पलों में अपनी संतानों के दीदार के लिए तरसते रहे।

  • बेटियों की बेरुखी: उनकी तीन बेटियों में से किसी ने भी पिता का हाल जानने की जहमत नहीं उठाई। देहांत के बाद भी वे अंतिम दर्शन के लिए नहीं पहुंचीं।

  • जिम्मेदारी से मुंह मोड़ा: एक बेटी ने केवल वीडियो कॉल पर पिता का अंतिम संस्कार देखकर औपचारिकता निभाई, तो दूसरी बेटी ने ₹5100 ऑनलाइन भेजकर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लिया।

🍷 नशे की लत ने छीना हंसता-खेलता परिवार, अकेलेपन और बीमारियों में घिरे अरविंद

डॉ. अरविंद पाठक के जीवन में आए दुखों का घटनाक्रम:

  • शानदार करियर: अरविंद नौसेना में बतौर डॉक्टर देश सेवा कर चुके थे। सेवामुक्त होने के बाद उन्होंने कालकाजी में अपना निजी क्लिनिक खोला, जहां वे अच्छी प्रैक्टिस कर रहे थे।

  • लत और दूरियां: पुलिस जांच के अनुसार, जिंदगी के एक पड़ाव पर वह गंभीर नशे की गिरफ्त में आ गए। इसी लत के कारण पारिवारिक रिश्ते बिखरते चले गए और उनकी पत्नी व बेटा उन्हें अकेला छोड़कर अमेरिका जाकर बस गए।

  • बीमारियों से घिरे: पत्नी और बेटे के जाने के बाद वह गहरे अकेलेपन, डिप्रेशन और डायबिटीज जैसी कई गंभीर बीमारियों से घिर गए। उनकी देखभाल के लिए केवल उनके भाई महेंद्र कभी-कभार आकर सुध ले लेते थे।

🗑️ घर से लापता होने के बाद कूड़े के ढेर के पास मिले अचेत, अस्पताल में डॉक्टरों ने किया मृत घोषित

मृत्यु से पूर्व के अंतिम दिनों का विवरण:

  • लापता होने की शिकायत: 12 अगस्त को जब अरविंद घर में नहीं मिले, तो उनके भाई महेंद्र ने कालकाजी थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई।

  • सघन तलाश: पुलिस ने तत्परता से तलाश शुरू की और अगले दिन शाम को डॉ. अरविंद अपने ही मोहल्ले में कूड़े के ढेर के पास गंभीर अचेत अवस्था में पाए गए।

  • अस्पताल में मौत: पुलिस उन्हें तत्काल नजदीकी अस्पताल लेकर पहुंची, जहां चिकित्सकों ने परीक्षण के उपरांत उन्हें मृत घोषित कर दिया।

📧 अमेरिका में बैठे बेटे ने ई-मेल पर झाड़ा पल्ला: ‘शव चाचा को सौंप दो’

मौत के बाद पुलिस द्वारा परिजनों से किए गए संवाद का ब्योरा:

  • ई-मेल से पल्ला झाड़ा: दिल्ली पुलिस ने अमेरिका में रह रही पत्नी और बेटे को घटना की सूचना दी, लेकिन बेटे ने भारत आने के बजाय ई-मेल भेजकर लिख दिया कि शव उनके चाचा और चचेरे भाई को सौंप दिया जाए।

  • पुलिस की समझाइश विफल: पुलिस अधिकारियों ने मानवीय आधार पर परिवार को पिता के अंतिम संस्कार के लिए भारत आने हेतु काफी समझाया, परंतु उन्होंने आने में असमर्थता जता दी।

  • उदासीनता: बाद में पोस्टमार्टम रिपोर्ट की सामान्य जानकारी लेने के अलावा परिवार की ओर से कोई संवेदना या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.