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रीवा में स्वास्थ्य तंत्र की लापरवाही: 2 घंटे तक नहीं पहुंची 108 एंबुलेंस, सांस लेने में तकलीफ से जूझ रहे शिक्षक की मौत

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रीवा (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश में सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं और आपातकालीन सेवाओं की जमीनी हकीकत पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मंडला में एंबुलेंस में ऑक्सीजन खत्म होने से मासूम बच्चे की मौत का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब रीवा जिले से वैसी ही दिल दहला देने वाली लापरवाही सामने आई है। रीवा जिले के बुड़वा गांव में सांस लेने में गंभीर तकलीफ से जूझ रहे एक प्राथमिक शिक्षक की जान सिर्फ इसलिए चली गई, क्योंकि परिजनों द्वारा बार-बार इमरजेंसी कॉल करने के बावजूद 108 एंबुलेंस दो घंटे तक मौके पर नहीं पहुंची।

📞 गंगेव के बुड़वा गांव में बिगड़ी थी तबीयत, परिजनों ने लगातार लगाए 108 पर फोन

रीवा जिले की गंगेव जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाले ग्राम बुड़वा निवासी कमलेश कोल पेशे से एक सरकारी शिक्षक थे।

रविवार को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और उन्हें सांस लेने में तेज तकलीफ महसूस होने लगी। शिक्षक की तेजी से बिगड़ती स्थिति को देखते हुए घबराए परिजनों ने तत्काल 108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा को संपर्क किया। परिजनों का सीधा आरोप है कि लगातार फोन करने और मरीज की नाजुक स्थिति बताने के बावजूद 2 घंटे से अधिक समय तक कोई भी एंबुलेंस गांव नहीं पहुंची।

🏥 निजी साधन से मनगवां PHC लेकर पहुंचे परिजन, डॉक्टरों ने घोषित किया मृत

एंबुलेंस के इंतजार में समय बीतने के साथ शिक्षक कमलेश की हालत अत्यंत नाजुक हो गई।

अंततः एंबुलेंस न आते देख परिजन अपनी व्यवस्था से निजी वाहन में उन्हें लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मनगवां पहुंचे, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। मनगवां स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधिकारी ने जांच के बाद शिक्षक को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों ने पुष्टि की कि अस्पताल लाए जाने से पहले ही मरीज की सांसें थम चुकी थीं।

💔 परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल, एंबुलेंस सेवा की घोर लापरवाही पर जांच की मांग

अस्पताल में शिक्षक की मौत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया और उनका रो-रोकर बुरा हाल है।

परिजनों का कहना है कि यदि 108 एंबुलेंस समय रहते गांव पहुंच जाती और रास्ते में ऑक्सीजन सपोर्ट व प्राथमिक उपचार मिल जाता, तो कमलेश की जान बचाई जा सकती थी। पीड़ित परिवार ने इस पूरी घटना को प्रशासनिक व विभागीय लापरवाही करार देते हुए दोषी कर्मचारियों व कॉल सेंटर प्रबंधन के खिलाफ सख्त व निष्पक्ष जांच की मांग की है।

😡 ग्रामीणों में गहरा आक्रोश, आपातकालीन सेवाओं की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

इस दर्दनाक घटना के बाद से बुड़वा गांव और आसपास के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति भारी रोष व्याप्त है।

ग्रामीणों ने आक्रोश जताते हुए सवाल किया कि आखिर आपातकालीन कॉल दर्ज होने के बावजूद एंबुलेंस को पहुंचने में 2 घंटे का समय क्यों लगा। प्रदेश के दूरदराज इलाकों में एंबुलेंस के समय पर न पहुंचने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। मामले में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा जांच के आदेश दिए जाने की बात कही जा रही है, जिसके बाद ही देरी के तकनीकी या प्रशासनिक कारणों का खुलासा हो सकेगा।

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