Yamunanagar: युवती ने भगवान श्रीकृष्ण को बनाया अपना पति, धूमधाम से संपन्न हुई शादी की रस्में; यमुनानगर में ‘कान्हा’ की दुल्हन बनी युवती
यमुनानगर : कहते हैं भक्ति में इतनी शक्ति होती है कि इंसान अपने आराध्य को ही अपना सब कुछ मान लेता है। इतिहास में हम मीरा बाई की कृष्ण भक्ति के किस्से सुनते आए हैं, लेकिन क्या कलयुग में भी कोई मीरा हो सकती है? हरियाणा के यमुनानगर में ऐसा ही एक अनोखा और भावुक दृश्य देखने को मिला, जहां युवती ने भगवान श्रीकृष्ण को अपना पति मानते हुए पूरे वैदिक रीति-रिवाजों के साथ उनसे विवाह रचा लिया। इस अलौकिक विवाह में परिवार, रिश्तेदार और सैकड़ों शहरवासी भी शामिल हुए।
यमुनानगर की रहने वाली इशिका बचपन से ही भगवान श्रीकृष्ण की भक्त बताई जा रही है। उसकी भक्ति इतनी गहरी हो गई कि उसने अपने जीवन को पूरी तरह ठाकुर जी को समर्पित करने का फैसला किया और विधिवत उनसे विवाह करने का संकल्प लिया। इस अनोखे विवाह की तैयारियां तीन दिनों तक चलती रहीं। रविवार को हल्दी की रस्म निभाई गई, सोमवार को मेहंदी का कार्यक्रम हुआ और मंगलवार को पूरे वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधान के साथ विवाह संपन्न कराया गया।
प्रोफेसर कॉलोनी से धूमधाम से निकाली गई ठाकुर जी की बारात
प्रोफेसर कॉलोनी से ठाकुर जी की बारात धूमधाम से निकाली गई। बैंड-बाजों और नाच-गाने के बीच बाराती पैदल प्रोफेसर कॉलोनी से गोविंदपुरी तक पहुंचे और वहां से गाड़ियों के जरिए हरबंसपुरा स्थित इशिका के घर पहुंचे। रास्ते में लोगों ने बारात पर फूल बरसाकर इस अनोखे विवाह का स्वागत किया।
माता-पिता ने पूरे विधि-विधान के साथ किया कन्यादान
इशिका के पिता राजेश कुमार और माता पूजा ने पूरे विधि-विधान के साथ कन्यादान किया। इसके बाद वैदिक मंत्रों के बीच इशिका और ठाकुर जी के सात फेरे कराए गए। विवाह के बाद विदाई की रस्म भी पूरी की गई, जिसने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। इस दौरान सर्व जागरूक संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. पायल और उनके पति विशाल ने ठाकुर जी के अभिभावक की भूमिका निभाई। विवाह समारोह में सैकड़ों की संख्या में रिश्तेदार, मित्र और शहरवासी मौजूद रहे। कार्यक्रम में जिला पुलिस अधीक्षक कमलदीप गोयल भी अपनी धर्मपत्नी के साथ पहुंचे और नवविवाहिता इशिका को आशीर्वाद दिया।
“यह विवाह पूरी तरह वैदिक परंपरा के अनुसार संपन्न कराया गया है। ऐसे विवाह में कन्या अपना जीवन भगवान की भक्ति और सेवा को समर्पित कर देती है। इसे आध्यात्मिक मार्ग और मोक्ष की दिशा में बढ़ने का एक माध्यम माना जाता है।” फिलहाल यमुनानगर में यह अनोखा विवाह चर्चा का विषय बना हुआ है। कई लोग इसे कलयुग में मीरा जैसी भक्ति का उदाहरण बता रहे हैं और जो लोग इस विवाह में शामिल हुए, वे खुद को सौभाग्यशाली मान रहे हैं।
Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.